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भारत के प्रस्ताव पर WTO में कई देशों का समर्थन, अमेरिका ने नहीं दिया साथ, विदेशों से पैसा भेजना होगा सस्ता?

विदेश में रह रहे या काम कर रहे लोगों को अपने परिवार को पैसा भेजना अब सस्‍ता पड़ने वाला है। विदेश से अपने देश पैसे भेजने पर लगने वाले शुल्‍क यानी रेमिटेंस में कटौती की जा सकती है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने भारत के विदेश से आने वाले रेमिटेंस पर लगने वाले शुल्क को कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका को छोड़कर, अधिकांश देश सस्ती, तेज और अधिक सुलभ सीमा-पार पेमेंट सिस्टम के पक्ष में हैं। यूरोपीय यूनियन ने भी भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

remittance cost will be cheaper

इंडोनेशिया, फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका ने इस विषय पर भारत का समर्थन किया है। भारत ने लेनदेन लागत को कम करने के लिए तेज भुगतान प्रणाली सहित डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे की इंटरऑपरेबिल्‍टी और इंटरलिंक को बढ़ावा देने पर जोर देता रहा है।

क्रॉस बॉर्डर रेमिटेंस का मतलब वो पैसा होता है जो विदेशों में रहने वाले प्रवासी अपने देश में परिवार वालों को भेजते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस का भी अहम योगदान है। साल 2023 में भारत को विदेशों में बसे भारतीयों से कुल 125 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था। यह पूरी दुनिया में सबसे अधिक है।

भारत के बाद मेक्सिको (67 बिलियन डॉलर), चीन (50 बिलियन डॉलर), फिलीपींस (40 बिलियन डॉलर) और मिस्र (24 बिलियन डॉलर) ऐसे देश हैं जिन्हें सबसे अधिक रेमिटेंस मिलता है। भारत को सबसे अधिक रेमिटेंस अमेरिका (17.79%), यूएई (15.67%), सऊदी अरब (10.60%), कुवैत (4.87%) और सिंगापुर (4.18%) से मिलता है।

भारत को मिला कई देशों का समर्थन

रेमिटेंस के नाम पर कई देश अधिक शुल्क वसूलते हैं। भारत ने इसी दर को कम करने को लेकर प्रस्ताव रखा था जिसे कई देशों का समर्थन मिला। जानकारों के मुताबिक कम रेमिटेंस से देशों के बीच असमानता को कम करने में मददगार साबित होगा। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों को इससे काफी मदद मिलेगी। वर्तमान में रेमिटेंस चार्ज औसतन 6.18 फीसदी जिसे 3 फीसदी तक कम किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत ने जो प्रस्ताव दिया है उसके अनुसार, वर्क प्रोग्राम में रेमिटेंस की लागत, ट्रेंड और व्यापार संबंधी विकास की समीक्षा की जानी चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि कैसे टेक्नोलॉजी, नए मार्केट प्लेयर्स का आना और अलग-अलग आपूर्तिकर्ता, नए-नए स्रोत और उपभोक्ताओं का बदलता व्यवहार रेमिटेंस सेवाओं को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

भारत ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि वर्क प्रोग्राम रेमिटेंस की लागत और इसे कम करने से जुड़ी चुनौतियों की जांच करेगा। वर्क प्रोग्राम इस बात की भी पहचान करेगा कि डिजिटलीकरण और नई तकनीकों के आने से रेमिटेंस लागत को कम करने के लिए नए अवसर क्या हो सकते हैं।

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