क्यों अमेरिका ने MOAB को IS के गढ़ पर ही गिराया, 6 वजहें
गैर-परमाणु बम होते हुए भी मोआब किसी परमाणु बम जितना ही ताकतवर है। अफगानिस्तान का नागहर इलाका गहरे पर्वतों वाला इलाका है और यहां पर किसी भी तरह का मिलिट्री ऑपरेशन चला पाना बहुत मुश्किल है।
वॉशिंगटन। अमेरिका ने 13 अप्रैल 2017 को अमेरिकी समयानुसारा शाम 7:32 मिनट पर अफगानिस्तान पर अपना सबसे ताकतवर हथियार, गैर-परमाणु बम मोआब गिराया। इस बम का निशाना अफगानिस्तान के नागहर प्रांत में स्थित आईएसआईएस की सुरंगे थीं। मोआब यानी मैसिव ऑर्डनेंस एयर बर्स्ट बम, जिसे मदर ऑफ ऑल बम कहते हैं, अमेरिकी सेना के बेड़े में सबसे खतरनाक हथियार है। अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के कमांडर जनरल जॉन निकोलसन की मानें तो आईएसआईएस जैसे पत्थरों को हटाने के लिए मोआब से बेहतर और कोई हथियार नहीं हो सकता था। इसके अलावा यह आईएसआईएस की अफगानिस्तान शाखा के खिलाफ अमेरिकी की आक्रामकता को भी बरकरार रखेगा।

शुरू हुई नई बहस
वहीं अमेरिका के इस हमले से यह बहस भी शुरू हो गई है कि क्या यहां से अफगान युद्ध कोई नया मोड़ लेगा? लेकिन इतना तो साफ है कि ट्रंप प्रशासन ने अफगानिस्तान में जारी अपनी लड़ाई की गंभीरता को एकदम स्पष्ट कर दिया है। नागहर प्रांत में ही आठ अप्रैल को एक हमले में स्टाफ सार्जेंट मार्क डे अलेंसर की मृत्यु हो गई थी जो कि स्पेशल फोर्सेज के सैनिक थे।

विशेषज्ञों ने दिए पूरे नंबर
वर्ष 2002 में मोआब को डेवलप किया गया था लेकिन कभी भी इसे किसी लड़ाई में प्रयोग नहीं किया जा सका था। ऐसे में नागहर प्रांत में इस बम से हुआ हमला कई तरह की बातों को जन्म देता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मोआब सही लक्ष्य लगाने के लिए एक बेहतर हथियार था।

किसी परमाणु बम जितना ही खतरनाक
मोआब किसी भी परमाणु बम से कम नहीं है और इसमें 11 टन टीएनटी की ताकत है। अमेरिका ने वर्ष 1945 में हिरोशिमा पर जो परमाणु बम गिराया उसमें 15 टन टीएनटी की ताकत थी। टीएनटी दरअसल वह ऊर्जा होती है जो किसी परमाणु बम को विस्फोट करने के बाद उससे आती है।

क्यों हुआ नागहर में इसका प्रयोग
मोआब को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह घाटी या फिर सुरंग से घिरी किसी जगह में जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सके। इस बम की क्षमता ऐसी नहीं है कि वह मुश्किल जगहों में गहराई में जाकर लक्ष्यों को बर्बाद कर सके। लेकिन यह किसी भी स्थानीय इलाके में मौजूद सुरंगों के मुहाने पर हमला करता है और वहां पर आतंकियों को मार गिराता है।

मिलिट्री ऑपरेशन मुश्किल
गुरुवार को नागहर में जो हमला हुआ है वहां यह जानना काफी अहम है कि अफगानिस्तान का यह प्रांत एक पहाड़ी इलाका है और यहां पर एक साधारण मिलिट्री ऑपरेशन नहीं चलाया जा सकता है। वर्ष 2001 में ऐसी खबरें आई थीं कि अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन ने तोरा-बोरा की पहाड़ियों में शरण ली हुई है। तब अमेरिका ने बीएलयू-82 15,000 एलबी वाले बम का प्रयोग किया था।

क्यों मोआब है बेस्ट
बीएलयू-82 को तोरा-बोरा में मौजूद सुरंगों को सील करने के लिए प्रयोग किया गया था ताकि लादेन और उसके साथी भागने ना पाएं। उस समय अमेरिका के पास मोआब नहीं था। मोआब में , बीएलयू-82 की तुलना में कुछ हजार पौंड ज्यादा ही विस्फोटक है। इस इलाके को देखते हुए माना जा रहा है कि मोआब का प्रयोग ही सर्वश्रेष्ठ है।












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