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दुनिया की सबसे खूंखार जेल, जिंदा रहने के लिए कैदी करते हैं ऐसे काम, जानकर हिल जाएंगे

रवांडा, 14 जुलाई। आपने बहुत सारी बदनाम जेलों की कहानी सुनी होगी लेकिन हम आपको एक ऐसी जेल के बारे में बताने जा रहे हैं जो दुनिया की सबसे खूंखार जेल मानी जाती है। इस जेल के कैदी जिंदा रहने के लिए एक दूसरे को मार देते हैं और फिर उन्हीं मुर्दों को खाते हैं।

जेल में कैदियों के रहने की भी जगह नहीं

जेल में कैदियों के रहने की भी जगह नहीं

रवांडा की गीटारामा जेल को दुनिया की सबसे ज्यादा सघनता वाली जेलों में रिपोर्ट किया गया है। इस जेल को सिर्फ कुछ सौ से कुछ हजार कैदियों के रहने के हिसाब से तैयार किया गया था लेकिन अब यहां पर हजारों कैदियों को ठूंसकर भर दिया गया है। हालात ये है कि इस जेल में कैदियों के रहने के लिए भी ठीक से जगह नहीं है। ऐसे में बाकी व्यवस्थाओं भयावहता की सिर्फ कल्पना की जा सकती है।

15 साल पहले ही थे दोगुने कैदी

15 साल पहले ही थे दोगुने कैदी

अनुमान के मुताबिक इस समय जेल में कैदियों की संख्या 5 हजार से 7000 के बीच है जबकि जेल में कितने कैदी रह सकते हैं इस बारे में कोई सही संख्या सामने नहीं आ पाई है। लेकिन जो रिपोर्ट हैं उसके मुताबिक जेल में सिर्फ कुछ सौ से कुछ हजार कैदियों को ही रख पाने की क्षमता है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की भी इस जेल पर नजर रही है। साल 2007 में संस्था ने कहा था कि रिपोर्ट के मुताबिक इस जेल में 7477 कैदी बंद है हालांकि इसमे कैदियों की रख पाने की क्षमता सिर्फ 3000 है। यानि कि आज से 13 साल पहले ही यह जेल दोगुना भार लेकर चल रही थी।

इंसानी मांस खाने को किया जाता है मजबूर

इंसानी मांस खाने को किया जाता है मजबूर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस जेल में स्थिति काफी भयावह है और कैदियों के बीच विवाद हो जाता है जो अक्सर हिंसक मारपीट में बदल जाता है। इन झगड़ों में कई बार कैदियों को इंसानी मांस खाने के लिए मजबूर किया जाता है।

इंसान नहीं जानवरों जैसे हालात

इंसान नहीं जानवरों जैसे हालात

इस जेल के हालात आज खराब नहीं हुए हैं बल्कि लंबे समय से कैदियों की हालत को लेकर यह निशाने पर रही है। 1995 में एक रिपोर्ट में इस जेल में कैदियों के रहने की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई गई थी। इसके साथ ही यह भी खुलासा हुआ था कि इस तरह से रखे जाने की वजह से उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट को लेकर उस समय अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस के ब्रिगिट ट्रॉयन ने इंडेपेंडेंट को कहा था कि "यहां पर परिस्थितियां पूरी तरह से अमानवीय हैं। इसे अतिशीघ्र सुधारा जाना चाहिए। इस जेल में हर दिन 6 लोग मर रहे हैं। अगर कोई महामारी फैलती है तो कोई नहीं जानता कि कितने मर जाएंगे।"

एक साल में हुई थी 1000 की मौत

एक साल में हुई थी 1000 की मौत

साल 1995 में इस जेल में 1000 कैदियों की मौत हो गई थी जबकि सही इलाज न मिलने और खराब बिस्तर, गंदगी की वजह से कई कैदियों के अंगों में सड़न पड़ गई थी। हाल में जेल के बारे में कोई साफ रिपोर्ट नहीं सामने आई है लेकिन ऐसा पता चलता है कि 27 सालों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

ब्रिटेन की नई डिपोर्ट नीति से एक बार फिर चर्चा

ब्रिटेन की नई डिपोर्ट नीति से एक बार फिर चर्चा

रवांडा वह देश है जहां पर ब्रिटेन की सरकार ने शरणार्थी बनकर आने वाले लोगों को निर्वासित करने का फैसला किया है। ब्रिटेन सरकार ऐसे लोगों को देश में रहने की अनुमति रद्द करके उन्हें रवांडा डिपोर्ट कर देगी। रवांडा की ऐसी स्थितियों को देखते हुए ब्रिटेन की इस नीति की काफी आलोचना भी की जा रही है और इसे अमानवीय कहा जा रहा है।

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