पीएम मोदी से पहले अमेरिका जाएंगे राहुल गांधी, दो रैलियां, दर्जनों मुलाकातें.. विदेशी धरती पर भारत की लड़ाई?
अमेरिका में राहुल गांधी की यात्रा की प्लानिंग ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा कर रहे हैं, जिन्होंने कहा है, कि उनका कार्यक्रम लोकतंत्र पर आधारित होगा। और भारतीय लोकतंत्र की जमीनी स्थिति वो अमेरिका में बताएंगे।

Rahul Gandhi's US trip: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 जून को अमेरिका में राजकीय अतिथि बनकर होंगे, जहां व्हाइट हाउस में उनके सम्मान में डिनर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका दौरे के दौरान राजकीय अतिथि बनकर जाएंगे, लेकिन उनकी यात्रा से पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का अमेरिका दौरा तय किया गया है।
बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी 4 जून को अमेरिका में होंगे, जहां वो एक विशालकाय रैली करेंगे। बताया गया है, कि राहुल गांधी न्यूयॉर्क राज्य के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में रैली करेंगे। राहुल गांधी का अमेरिका दौरा 31 मई को शुरू हो रहा है, जो 10 दिनों का होगा और इस दौरान राहुल गांधी, अमेरिका में अलग अलग कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।
यानि, जून महीने में प्रधानमंत्री मोदी भी अमेरिका जाएंगे और राहुल गांधी भी अमेरिका में रहेंगे। तो क्या अब भारतीय राजनीति की लड़ाई अमेरिका की धरती से लड़ी जाएगी?
राहुल का कार्यक्रम कैसा होगा?
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा है, कि जून में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान जनसभाओं को संबोधित करने और विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत करने की योजना है, जिसका उद्देश्य "वास्तविक लोकतंत्र" के साझा मूल्यों और दृष्टि को बढ़ावा देना है।
राहुल गांधी का सैन फ्रांसिस्को, वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क का दौरा करने का कार्यक्रम है, जहां वह भारतीय अमेरिकियों के साथ दो जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इसके अलावा, कैपिटल हिल में सांसदों और थिंक टैंक के सदस्यों से उनकी मुलाकात होगी, विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत होगी और वॉल स्ट्रीट के अधिकारियों से मिलने की भी उनकी योजना बनाई जा रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के एजेंडे और मकसद के बारे में बात करते हुए पित्रोदा ने कहा, कि 'हम यहां शिकायत करने नहीं आए हैं। हम यहां भारत में क्या हो रहा है उसे साझा करने के लिए आए हैं"।
उन्होंने शिकागो में कांग्रेस समर्थकों के एक समूह से कहा, कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हम लोगों को जमीन पर वास्तविक स्थिति क्या है, उसके बारे में बताएंगे। उन्होंने कहा, कि "हम हर किसी से आने और हमारी मदद करने के लिए नहीं कह रहे हैं। हम समस्याओं से निपट सकते हैं। हम आपके साथ साझा करना चाहते हैं, कि हमें क्या जरूरत है।"
सैम पित्रोदा ने शिकागो में कर्नाटक विधानसभा की जीत के जश्न को संबोधित किया, जिसका आयोजन प्रतिष्ठित समुदाय के नेता इफ्तिकार शेरिफ और इंडियन ओवरसीज कांग्रेस-यूएसए ने किया था।
अमेरिका में बनेगी राहुल की अलग छवि?
सैम पित्रोदा ने रविवार को एक बयान में कहा, "उनकी (राहुल गांधी की) यात्रा का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तियों, संस्थानों और मीडिया के साथ एक नई बातचीत शुरू करना है, जिसमें भारतीय डायस्पोरा भी शामिल है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और विदेशों में साझा मूल्यों और दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, दुनिया भर में स्वतंत्रता, समावेश, स्थिरता, न्याय, शांति और अवसरों पर ध्यान देने वाला वास्तविक लोकतंत्र के लिए बड़ी संख्या में बढ़ रहा है"।
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस-यूएसए के वाइस-चेयरमैन जॉर्ज अब्राहम ने कहा, कि 'मुझे उम्मीद है कि राहुल गांधी की यात्रा प्रवासी भारतीयों को लोकतंत्र और स्वतंत्रता की नए सिरे से सराहना करने के लिए उत्साहित करेगी, क्योंकि पूरी दुनिया में भारतीय प्रवासियों की संख्या 3 करोड़ से ज्यादा है"। पित्रोदा ने कहा, कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस ने राहुल गांधी के लिए तीन शहरों में कई बैठकें करने की योजना बनाई है।
सैम पित्रोदा ने कहा, कि "हमने थिंक टैंकों, विश्वविद्यालयों के साथ बहुत सारी बैठकें करने की योजना बनाई है। सैन फ्रांसिस्को में एक हजार लोग, वाशिंगटन डीसी में 200 लोगों के साथ डिनर करने का हमारा प्लान है।" उन्होंने कहा, कि राहुल गांधी के कार्यक्रम खचाखच भरे हुए हैं और इनका शिड्यूल इतना पैक है, कि उनके पास आधा घंटा भी खाली नहीं होगा।
इसके अलावा, वॉशिंगनटन में राहुल गांधी भारतीय-अमेरिकी फ्रैंक इस्लाम ने के एक निजी रात्रिभोज कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
अमेरिका में लड़ी जाएगी भारत की लड़ाई?
राहुल गांधी की यात्रा में बार बार लोकतंत्र का जिक्र किया गया है, लिहाजा पूरी संभावना है, कि उनकी रैलियां राजनीतिक होंगी और निशाने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे।
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ऐसा इसलिए भी, क्योंकि इसी साल मार्च में, जब राहुल गांधी ने यूके का दौरा किया था, तो उन्होंने आरोप लगाया था, कि भारतीय लोकतंत्र की संरचना पर हमला हो रहा है और देश के संस्थानों पर "पूर्ण पैमाने पर हमला" हो रहा है। जिसको लेकर भारत में भी सियासी तूफान मचा था।
अमेरिका में एक वर्ग पहले से ही ऐसा है, जो भारत को नीचा दिखाने के लिए बहाने खोजता रहता है, और अल्पसंख्यक और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर अनर्गल आरोप भारत पर लगाए जाते हैं, तो क्या राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से ठीक पहले की रैली, अमेरिका में भारत की छवि तो नहीं खराब करेगा, इसपर सबकी नजर बनी रहेगी।












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