Diplomacy: मॉस्को से टोक्यो तक! यूक्रेन पर फिर एक्टिव हुआ QUAD, भारत कैसे बना रहा मुश्किल डिप्लोमेटिक बैलेंस?
QUAD News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब तीन हफ्ते पहले राजधानी मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी और तीन हफ्ते बाद भारत ने सोमवार को क्वाड समूह (QUAD) में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ मिलकर "यूक्रेन में चल रहे युद्ध" पर अपनी "गहरी चिंता" जताई है।
इसके अलावा क्वाड समूह ने "संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान" का झंडा फहराया,जो साफ तौर पर यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खिलाफ था।

जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टोक्यो में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, जापानी विदेश मंत्री योको कामिकावा और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग से मुलाकात की, तो क्वाड ने "स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की, एक ऐसे क्षेत्र की दिशा में काम करने की कसम खाई, जहां कोई भी देश, दूसरे पर हावी न हो और प्रत्येक राज्य अपने सभी रूपों में किसी भी जबरदस्ती से मुक्त हो।"
क्वाड की बैठक में जब इंडो-पैसिफिक का जिक्र किया गया, तो उसका संदर्भ साफ तौर पर चीन को लेकर था, जो कई देशों को धमका रहा है और सलामी स्लाइसिंग तकनीक के जरिए दूसरे देशों की जमीन को हड़पने की कोशिश करता रहता है।
क्वाड की बैठक में जयशंकर ने क्या कहा?
क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद, जयशंकर ने कहा, कि "कुल मिलाकर संदेश यह है, कि हमारे चार देश, सभी लोकतांत्रिक राजनीति, बहुलवादी समाज और बाजार अर्थव्यवस्थाएं- एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक, नियम-आधारित व्यवस्था और वैश्विक भलाई के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। यह अपने आप में एक अनिश्चित और अस्थिर दुनिया में एक शक्तिशाली स्थिर कारक है।"
यहां, "लोकतंत्रों" शब्द का संदर्भ महत्वपूर्ण है, क्योंकि राष्ट्रपति जो बाइडेन के तहत अमेरिकी प्रशासन ने चीन और रूस के साथ बहस को "निरंकुशता" और "लोकतंत्र" के बीच एक प्रतियोगिता के रूप में ढालने की कोशिश की है।
मोदी ने 8-9 जुलाई की अपनी रूस की यात्रा के दौरान पुतिन को गले लगाया और सार्वजनिक रूप से पुतिन के साथ यह भी साफ किया, कि युद्ध के मैदान में समाधान नहीं खोजा जा सकता। और उन्होंने कीव में एक अस्पताल पर रूसी हमले में बच्चों की हत्या पर चिंता व्यक्त की।
क्वाड विदेश मंत्रियों ने यह भी कहा, कि इस साल के अंत में भारत में क्वाड लीडर्स शिखर सम्मेलन होगा, जबकि अमेरिका अगले साल क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने की उम्मीद कर रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के इस साल की शुरूआत में क्वाड की बैठक में भारत आने की संभावना थी, लेकिन शिड्यूल की वजह से उनका दौरा टल गया और माना जा रहा है, कि साल के अंत से पहले भारत में जो क्वाड शिखर सम्मेलन होगा, उसमें भाग लेने के लिए बाइडेन, भारत का दौरा कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक क्वाड बैठक के लिए तारीख तय नहीं की गई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर, क्वाड विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान में कहा गया, कि "हम यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हैं, जिसमें इसके भयानक और दुखद मानवीय परिणाम शामिल हैं। हम अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप एक व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति की आवश्यकता को दोहराते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है, जिसमें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान शामिल है।"
आपको बता दें, कि "संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान" के इस सूत्रीकरण का उपयोग भारत द्वारा रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपने राष्ट्रीय वक्तव्यों में नहीं किया गया है।
बयान में आगे कहा गया है, कि "हम वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के संबंध में यूक्रेन में युद्ध के नकारात्मक प्रभावों को भी देखते हैं, खास तौर से विकासशील और कम विकसित देशों के लिए। इस युद्ध के संदर्भ में, हम इस नजरिए को साझा करते हैं, कि परमाणु हथियारों का उपयोग, या उपयोग की धमकी, अस्वीकार्य है। हम अंतर्राष्ट्रीय कानून को बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हैं, और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप, दोहराते हैं, कि सभी राज्यों को किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के प्रयोग या धमकी से बचना चाहिए।"
आपको बता दें, कि रूस को लेकर भारत और क्वाड के बाकी सदस्यों अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच मतभेद और खालिस्तानी आतंकवादी पन्नुन की हत्या की साजिश को लेकर द्विपक्षीय मतभेदों ने QUQAD समूह पर छाया डाल दी है। बीजिंग को मुख्य चुनौती मानते हुए, क्वाड मतभेदों को दूर करने और सहयोग के लिए मामला बनाने की कोशिश कर रहा है।
QUAD बैठक में चीन पर क्या कहा गया?
वहीं, चीन के आक्रामक व्यवहार पर, संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "हम एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए क्वाड की दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं, जो समावेशी और लचीला है, और स्वतंत्रता, मानवाधिकारों, कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत के लिए अपने मजबूत समर्थन के साथ स्वतंत्र और खुले, नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता में एकजुट हैं, और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक बल के प्रयोग या धमकी पर प्रतिबंध लगाते हैं।"
बयान में आगे कहा गया है, कि "क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देने में सभी देशों की भूमिका है, जबकि हम ऐसा क्षेत्र चाहते हैं, जिसमें कोई देश हावी न हो और किसी देश का वर्चस्व न हो, प्रतिस्पर्धा को जिम्मेदारी से प्रबंधित किया जाए और प्रत्येक देश अपने सभी रूपों में दबाव से मुक्त हो और अपने भविष्य को निर्धारित करने के लिए अपनी एजेंसी का प्रयोग कर सके।"
वहीं, बाद में, चीन के साथ भारत के सीमा विवाद में तीसरे पक्ष की भूमिका के बारे में सवालों का जवाब देते हुए, जयशंकर ने कहा, कि दोनों पड़ोसियों के बीच एक मुद्दा है और उन्हें इसका समाधान निकालना है।
जापान की राजधानी टोक्यो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवालों के जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, "हम भारत और चीन के बीच वास्तव में क्या मुद्दा है, इसे सुलझाने के लिए दूसरे देशों की ओर नहीं देख रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "हमारे पास एक समस्या है, या मैं कहूंगा कि भारत और चीन के बीच एक मुद्दा है...मुझे लगता है, कि हम दोनों को इस पर बात करनी चाहिए और कोई रास्ता निकालना चाहिए।"
उन्होंने इस महीने दो बार चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अपनी बैठक को याद करते हुए कहा, "जाहिर है, दुनिया के अन्य देशों की इस मामले में रुचि होगी, क्योंकि हम दो बड़े देश हैं और हमारे संबंधों की स्थिति का बाकी दुनिया पर प्रभाव पड़ता है। लेकिन, हम अपने बीच वास्तव में क्या मुद्दा है, इसे सुलझाने के लिए दूसरे देशों की ओर नहीं देख रहे हैं।"
आपको बता दें, कि जयशंकर और वांग यी पिछले हफ्ते लाओस की राजधानी वियनतियाने में मिले थे, जहां उन्होंने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की बैठक में भाग लिया था। बैठक में, वे मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद विघटन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मजबूत मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर सहमत हुए।
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