खतरे में पड़ गया है मालदीव में भारत का सैन्य अड्डा? जानिए कैसे पांच सालों की मेहनत पर फिर सकता है पानी

India in Maldives: हाल ही में खत्म हुए मालदीव के राष्ट्रपति चुनावों में जोरदार जीत के बाद, चीन समर्थक विजयी राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने घोषणा की है, कि वह एटोल राष्ट्र में तैनात भारतीय सैनिकों को हटाने की शुरुआत अपना शासन संभालने के पहले दिन से शुरू कर देंगे।

मोहम्मद मुइज्जू ने अपने समर्थकों को चुनावी जीत मिलने के बाद जश्न मनाते हुए कहा, कि वह मालदीव के निवासियों की इच्छा के खिलाफ मालदीव में किसी विदेशी सेना के रहने का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने अपने भाषण में कहा, कि "लोगों ने हमें बताया है कि वे यहां विदेशी सेना नहीं चाहते।"

India’s Military Base In Maldives

मोहम्मद मुइज्जू के चुनाव को मालदीव और हिंद महासागर में चीन के साथ चल रहे भूराजनीतिक मुकाबले में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण झटके के रूप में देखा गया है।

हालांकि, मालदीव में भारत और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस चुनाव के दौरान यह नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई, जब मोहम्मद मुइज्जू ने मौजूदा मोहम्मद सोलिह के प्रशासन को इस बात पर घेरा, कि उन्होंने भारत को मालदीव में सैन्य ठिकाना बनाने की इजाजत दी है।

मालदीव में अब चीन समर्थक सरकार

चुने गये राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सोलिह पर भारत के साथ मजबूत संबंधों के कारण मालदीव की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है, कि मौजूदा प्रशासन ने भारतीय सेना को मालदीव की धरती पर अपना प्रभाव और उपस्थिति स्थापित करने और विस्तार करने की अनुमति दी है।

हालांकि, मौजूदा राष्ट्रपति सोलिह इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।

चुने गये राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 17 नवंबर को शपथ लेंगे और फिर उनका कार्यकाल शुरू होगा।

मालदीव में एक दशक से ज्यादा समय से भारत विरोधी भावनाएं पनप रही हैं, जब प्रोग्रेसिव पार्टी (पीपीएम) के अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम 2013 में राष्ट्रपति चुने गए थे और उन्होंने खुलकर भारत विरोधी मुहिम चलाई।

वहीं, पिछले 3 सालों से मालदीव की विपक्षी पार्टियों ने 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया है, जिसकी वजह से भारत विरोधी भावनाओं का काफी विस्तार हुआ है।

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मालदीव में कहां है मिलिट्री की मौजूदगी?

मोहम्मद मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है और अगर भारतीय मिलिट्री को मालदीव में झटका लगता है, जाहिर तौर पर उससे चीन को फायदा होगा।

हालांकि, चीन समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन (2013-18) ने ही अपने कार्यकाल के दौरान भारत को दो ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएफ) हेलीकॉप्टरों को वापस कर अपमानित करने की कोशिश की थी, जिससे समुद्री मौसम की निगरानी की जाती थी।

लिहाजा माना जा रहा है, कि इस बार भी कुछ इसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।

यामीन प्रशासन ने आरोप लगाया था, कि भारत की सैन्य कार्रवाई की इच्छा "उसकी संप्रभुता का अनादर है।" दावा किया गया, कि घरेलू राजनीति शुरू होने पर नई दिल्ली ने मालदीव द्वीप को घेरने का इरादा किया था और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत को इसमें शामिल होने के लिए कहा था।

उनका आरोप था, कि मालदीव की घरेलू राजनीति में भारत हस्तक्षेप करने के लिए कभी भी सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। और उन्होंने भारत के दिए दोनों ध्रुव हेलीकॉप्टर वापस लौटा दिए थे।

लेकिन, 2018 में मोहम्मद सोलिह सत्ता में आ गये, जो भारत के कट्टर समर्थक थे।

सत्ता संभालने के बाद, इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने यामीन सरकार द्वारा पारित निर्देश को पलट दिया और उसके बाद मालदीव में भारतीय सेना का प्रभाव बढ़ गया। भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर्स का ऑपरेशन फिर शुरू हो गया। लेकिन, अब जब सोलिह सरकार का पतन हो गया है, तो फिर भारत के सामने, वही पुराने सवाल आ खड़े हुए हैं।

इस बार के चुनाव में 'इंडिया ऑउट' अभियान चलाया गया, लेकिन मालदीव के कुछ पत्रकारों का कहना है, कि एटोल राज्य में भारतीय सैन्य उपस्थिति में केवल दो ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएफ) हेलीकॉप्टर शामिल हैं, जो कई वर्षों से माले के लिए ही काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, भारत ने 2020 में मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (एमडीएनएफ) को इस शर्त के साथ एक डोर्नियर विमान प्रदान किया था, कि वो मालदीव की सेना के आदेश और नियंत्रण के तहत काम करेगा, लेकिन संचालन लागत भारत द्वारा वहन की जाएगी।

डोर्नियर विमान तब से भारत और मालदीव द्वारा हिंद महासागर एटोल राज्य के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की संयुक्त निगरानी गतिविधियों में सहायता कर रहा है।

नवंबर 2021 में, मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (एमएनडीएफ) ने खुलासा किया था, कि भारत सरकार द्वारा उपहार में दिए गए डोर्नियर विमान और दो हेलीकॉप्टरों के संचालन में सहायता के लिए 75 भारतीय सैनिक मालदीव में रुके थे। जिसके बाद मालदीव की विपक्षी पार्टियों ने इसे मालदीव की सुरक्षा के लिए खतरा बताया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

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मालदीव में बनेगा नौसैनिक सुविधा केन्द्र

हालांकि, सबसे बड़ी चिंता मालदीव में बनने वाली एक नौसैनिक सुविधा केन्द्र को लेकर है। फरवरी 2021 में, भारत ने रक्षा परियोजनाओं के लिए मालदीव को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान की थी। साथ ही, इसने देश की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण नौसैनिक सुविधा के निर्माण और रखरखाव के लिए माले सरकार के साथ एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे।

उथुरु थिला फाल्हू में तटरक्षक बंदरगाह के "विकास, समर्थन और रखरखाव" के समझौते पर जयशंकर और मालदीव के रक्षा मंत्री मारिया दीदी ने हस्ताक्षर किए थे। उस समय, दीदी ने कहा था, कि बंदरगाह और डॉकयार्ड द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में "एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर" होंगे।

इस समझौते को मालदीव के विपक्ष ने देश की जनता के सामने देश की धरती पर भारतीय सैनिकों को तैनात करने की एक चाल के रूप में पेश किया गया। इन दावों को खारिज करने का प्रयास करते हुए, निवर्तमान राष्ट्रपति सोलिह ने दोहराया, कि मालदीव में भारतीय सेना की उपस्थिति पूरी तरह से एक डॉकयार्ड का निर्माण करने के लिए है और यह उनके देश की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करेगी।

लेकिन, अब जबकि राष्ट्रपति सोलिह चुनाव हार चुके हैं, तो आशंका है, कि चीन समर्थक सरकार, भारत के साथ किए गये सैन्य सहयोगों को खारिज कर सकती है, जो हिंद महासागर में भारत के लिए बड़ा झटका होगा।

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