समंदर का 'सुरसा' बना चीनी ड्रैगन, विध्वंसक जहाजों का रिकॉर्ड उत्पादन, भारत के लिए बनेगा सिरदर्द?
चीन न केवल अपने तट के पास के पानी पर हावी होना चाहता है, बल्कि तथाकथित फर्स्ट आईलैंड चेन को भी तोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है, ताकि दूसरे महासागरों में भी अपनी शक्ति का विस्तार किया जाए।
हांगकांग, जनवरी 03: दुनिया में अपनी शक्ति प्रदर्शन करने के लिए चीन लगातार अपनी नौसेना को ताकतवर बना रहा है और 2021 चीन की सेना के लिए बेहद शानदार रहा है और 2021 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी PLAN ने करीब 170,000 टन के नए जहाजों को अपनी नौसेना में शामिल कर लिया है। हर साल इस तरह के जहाजों की आमद से लैस PLAN दुनिया की सबसे आधुनिक और सक्षम और शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक बन गई है, जो किसी भी अन्य एशियाई नौसेना से ज्यादा ताकतवर बन गई है।

2021 में चीन की नौसेना की ताकत
साल 2021 में चीन की नौसेना ने अपने बेड़े में टाइप 094A बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), टू टाइप 075 हेलीकॉप्टर लैंडिंग डॉक (LHD), थ्री टाइप 055 क्रूजर, सेवन टाइप 052D विध्वंसक जहाज, सिक्स टाइप 056A कोरवेट, सिक्स टाइप 082II माइम काउंटरमेयर वेसल और एक केबल-बिछाने वाला जहाज शामिल किया है। इसके साथ ही चीन की नौसेना ने अपने बेड़े में टाइप थ्री 927 सर्विलांस जहाज को भी शामिल किया है। चीन अपनी नौसेना को जिस रफ्तार से विस्तार दे रहा है, वो साफ बताता है कि, चीन की प्लानिंग आने वाले समय के लिए क्या है। अत्याधुनिक जहाजों की विशाल संख्या और विविधता चीन की नौसेना को और भी ज्यादा आत्मविश्वास से भर रही है, जो पहले से ही एक मार्शल कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा समर्थित राष्ट्रवाद से मजबूत है।

समुद्रों पर कब्जा करने की कोशिश
चीन न केवल अपने तट के पास के पानी पर हावी होना चाहता है, बल्कि तथाकथित फर्स्ट आईलैंड चेन को भी तोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है, ताकि दूसरे महासागरों में भी अपनी शक्ति का विस्तार किया जाए और जानकारों का मानना है कि, साल 2022 में चीन अपनी नेवी के जरिए समुद्रों में अपनी बादशाहत का विस्तार करने की कोशिश करेगा। साल 2022 वो साल बन रहा है, जब चीन की सेना अदन की खाड़ी में अपनी उपस्थिति का 14वीं वर्षगांठ मनाएगा, जिसे जिबूती एयरबेस पर बनाए गये पीएलए के सैन्य बेस से सहायता मिलती है।

2021 में विध्वंसक जहाजों का निर्माण
आईये एक नजर डालते हैं उन चीनी जहाजों पर, जिनका निर्माण चीन ने साल 2021 में किया है। चीन की सेना ने साल 2021 में टाइप 075 एलएचडी जहाज को शामिल किया है, जो फ्लैट डेक की वजह से एक विमान वाहक पोत की तरह दिखता है। चीन के इस एलएचडी टाइप 75 जहाज में एक साथ 28 हेलिकॉप्टर्स को रखा जा सकता है और ये हेलिकॉप्टर कभी भी उड़ान भरने में सक्षम हो सकते हैं। इसके साथ ही ये जहाज एक साथ कम से कम एक हजार सैनिकों को अपने साथ ले जा सकता है और दूसरी बड़ी खासियत इस जहाज की ये है, कि ये पानी के अंदर और पानी के ऊपर, दोनों जगहों से मार करने में सक्षम है, लिहाजा इसे उभयचर भी कहा जाता है। इस जहाज को चीन ने अपनी नौसेना में 23 अप्रैल 2021 को शामिल किया था, जबकि, इस टाइप के दूसरे जहाज को चीन ने अपनी नौसेना में 26 दिसंबर को देश को क्रिसमस का तोहफा देते हुए समर्पित किया है, भले ही चीन में ईसाइयों की संख्या महज पांच फीसदी से भी कम क्यों ना हो।

ताइवान को ध्यान में रखकर अलग जहाज
चीन ने अपना दूसरा एलएचडी जहाज इस्टर्न कमांड को सौंपा है और इसे विशेषकर ताइवान को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि, चीन ने अभी तक अपने इस्टर्न बेड़े को ना तो विमानवाहक पोत दिया था और ना ही एलएचडी ही सौंपा था। विशेषज्ञों का कहना है कि, एलचडी के जरिए चीन किसी भी वक्त ताइवान के खिलाफ आकस्मिक कार्रवाई कर सकता है और भविष्य में अगर ताइवान से लड़ाई होती है और अगर अमेरकी नौसेना ताइवान की मदद करने के लिए आती है, तो उस वक्त एलएचडी जहाज चीन के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होगी।

कई एलएचडी जहाजों का निर्माण
इसके साथ ही रिपोर्ट है कि, चीन कई और एलएचडी जहाज का निर्माण कर रहा है और रिपोर्ट है कि, चीन हर 6 महीने में अपनी नौसेना को एक सौंपने वाला है और विशेषज्ञों का कहना है कि, दुनिया का कोई भी देश सही मायनों में अब चीन की रिकॉर्ड गति से जहाज बनाने का मुकाबला नहीं कर सकता है। फर्स्ट क्लास टाइप 075 बनाने से लेकर उसे पानी में उतारने में चीन को सिर्फ 340 दिन ही लगे और कोविड के बाद भी चीन को दूसरा एलएचडी पानी में उतारने में सिर्फ 245 दिनों का ही समय लगा है, जो अविश्वसनीय है।

तेजी से पानी जहाजों का निर्माण
चीन किस रफ्तार से जहाजों का निर्माण कर रहा है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, हुडोंग जोंगहुआ फैसिलिटी से चीन ने एक ही दिन में तीन टाइप-2 054A फ्रिगेट, टाइप-1 071E लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक(एलपीडी) लॉंच किया, जिनमें से एलपीडी को थाईलैंड के लिए बनाया गया था और चीन का यही यार्ड पाकिस्तान के लिए भी टाइप 054A/P फ्रिगेट बना रहा है। इसके साथ ही शंघाई में जियांगन चांग्जिंगदाओ शिपयार्ड पर सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि, पीएलएएन के तीसरे विमान वाहक का भी निर्माण किया जा रहा है, जिसे टाइप 003 कहा जाता है, यह पोत पिछले दोनों पोत से काफी अलग हैं। इसके साथ ही चीन ने पहले भाप से चलने वाले गुलेल प्रणाली को अपनाने के बजाय सीधे विद्युत चुम्बकीय विमान प्रक्षेपण प्रणाली (EMALS) में तकनीकी छलांग लगाई थी, जिसका फायदा काफी ज्यादा चीन को मिला है।

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि, EMALS टाइप 003 कैरियर में धनुष पर दो लॉन्च सिस्टम लगे हैं और यह पोत करीब 316 मीटर लंबा और 71.3 मीटर चौड़ा है। वहीं हैंगर डेक करीब 21 मीटर चौड़े हैं, ये जहाज के स्टारबोर्ड की तरफ स्थित हैं। EMALS चीन की नौसेना के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह टाइप 001 और 002 कैरियर्स की तुलना में अधिक भारी हथियारों से लैस और ईंधन से चलने वाले फाइटर्स को टाइप 003 से उड़ान भरने के लायक बनाता है। इसका मतलब यह भी है कि विभिन्न विमान जैसे कि डेवलपमेंटल केजे-600 हवाज भी टाइप 003 से संचालित हो सकते हैं, जो इससे पहले के पोत के लिए असंभाव था।संयोग से, सान्या में एक विशाल नई सूखी गोदी का निर्माण किया गया है, जो कि टाइप 003 वाहक को समायोजित करने के लिए पर्याप्त है। इससे पता चलता है कि इसे दक्षिण सागर बेड़े में शामिल हो जाएगा। सान्या एक प्रमुख नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित हुआ है, जो क़िंगदाओ, निंगबो और झानजियांग में तीन मौजूदा बेड़े मुख्यालयों के बराबर है।

समुद्र में आक्रामक बनती चीनी नौसेना
विश्लेषकों का कहना है कि, चीन जिस रफ्तार से विध्वंसक जहाजों का निर्माण कर रहा है, उससे पता चलता है कि, वो किसी 'मिशन' पर है। न केवल अपनी नौसेना के साथ, बल्कि चाइना कोस्ट गार्ड (CCG) और पीपुल्स आर्म्ड फोर्सेस मैरीटाइम मिलिशिया (PAFMM) द्वारा भी चीन दक्षिण चीन सागर में अपने व्यवहार को आक्रामक बना रहा है। अमेरिका के बाद चीन की नौसेना सबसे बड़ी ताकत बन चुकी और कई मामलों में चीन की नेवी ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है।

चीन के खिलाफ खड़ा होगा अमेरिका?
राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक पॉलिसी द्वारा प्रकाशित "होल्ड द लाइन थ्रू 2035" नामक एक नई रिपोर्ट में, लेखक गेब्रियल कॉलिन्स और एंड्रयू एरिकसन का तर्क है कि, संयुक्त राज्य अमेरिका को फौरन बीजिंग के खिलाफ खड़ा होना चाहिए औ यथास्थिति को बदलने की कोशिश करनी चाहिए । वहीं, दो अमेरिकी शिक्षाविदों ने उल्लेख किया कि, "चीन यकीनन आगे बढ़ रहा है और पहले से ही आक्रामक चीन अब और तेजी के साथ पड़ोसी देशों को परेशान करेगा, समुद्र में व्यापार को प्रभावित करेगा, तेल शोधन करेगा और पड़ोसी देशों के मछुआरों को परेशान करेगा और सबसे बढ़कर दुनिया में अपनी शक्ति का इस्तेमाल करेगा।












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