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अलग-अलग देशों से भारत की शिकायत क्यों कर रहे PM ट्रूडो? दबाव बनाकर रिश्ता ठीक करना चाहता है कनाडा?

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ फोन पर बातचीत की। इसके अलावा पीएम ट्रूडो ने इसी दिन जॉर्डन के शासक अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल-हुसैन से भी बातचीत की।

इस दौरान पीएम ट्रूडो ने दोनों देशों के शीर्ष हस्तियों से भारत-कनाडा विवाद पर चर्चा की। ट्रूडो ने दोनों देशों से भारत और कानून के शासन को बनाए रखने और उसका सम्मान करने के महत्व के बारे में भी बात की।

India-Canada row

इससे पहले 6 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान भी दोनों नेताओं के बीच कनाडा-भारत विवाद पर चर्चा की गई।

आपको बता दें कि कनाडा में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप ट्रूडो सरकार ने भारत पर लगाया था जिसके बाद से ही दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं।

डाउनिंग स्ट्रीट के एक बयान में कहा गया कि सुनक ने ट्रूडो से भारत-कनाडा विवाद को कम करने की अपील की। PM ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच बातचीत से कूटनीतिक विवाद में कमी आएगी।

इससे पहले ट्रूडो और विदेश मंत्री मेलानी जोली ने संकेत दिया कि वे सार्वजनिक रूप से भारत के बारे में बोलकर उसके साथ तनाव को बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं।

विवाद पिछले महीने तब शुरू हुआ जब कनाडा ने ब्रिटिश कोलंबिया में एक सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में सीधे तौर पर भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया दिया था।

कनाडा ने ओटावा में भारतीय दूतावास के खुफिया प्रमुख को निष्कासित कर दिया। भारत ने इसके जवाब में एक कनाडाई राजनयिक को निष्कासित कर दिया। इसी दौरान मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत को गहरे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

राजनयिकों के निष्कासन के अलावा, भारत ने कनाडा में वीजा सेवाओं को निलंबित कर दिया है। ऐसे में वे कनाडाई जो भारत के शीर्ष विजिटर्स में से आते हैं - तब तक भारत की यात्रा करने में असमर्थ होंगे जब तक कि उनके पास पहले से वीजा न हो।

दोनों देशों के बीच शुरू हुए इस विवाद से कनाडा में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय लोगों, खासकर पंजाबियों पर काफी असर पड़ने जा रहा है। आपको बता दें कि पूरी दुनिया में भारत के बाद सबसे ज्यादा सिख कनाडा में ही रहते हैं।

दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2021-22 में दोनों मुल्कों के बीच 7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। चालू वित्त वर्ष यानी 2022-23 के शुरुआती छह महीनों में ही दोनों देशों के बीच 8.16 अरब डॉलर का व्यापार हो चुका है।

कनाडा के एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर और डेयरी फार्मिंग सेक्टर में पंजाबियों का पूरी तरह दबदबा है। कनाडा से खेती और बागबानी से जुड़े उत्पाद भारत सप्लाई होते हैं और इसका सीधा फायदा वहां रहने वाले पंजाबियों यानी भारतीयों को मिलता है। भारत-कनाडा के संबंध बिगड़ने पर वहां किसानों को काफी नुकसान होगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा में इस समय पंजाब के तकरीबन एक लाख 60 हजार स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। ये सभी वहां स्टडी वीजा पर वहां गए हैं। इनसे कनाडा को हर साल हजारों करोड़ रुपये की आमदनी होती है।

अगर भारत सरकार कनाडा जाने वाले छात्रों के लिए नियम सख्त कर देती है तो इससे कनाडा को जबरदस्त आर्थिक नुकसान होगा। यही वजह है कि कनाडाई पीएम अमेरिका के बाद भारत के अन्य मित्र देशों पर भारत संग संबंध बेहतर करने पर जोर दे रहे हैं।

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