पाकिस्तान के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक' में सफलता दिलाने वाले इजरायल के छह हथियार
तेल अवीव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले कुछ घंटों में इजरायल में होंगे। पीएम मोदी के इजरायल पहुंचते ही दोनों देशों के बीच रिश्तों का नया समीकरण तैयार होगा। इजरायल न सिर्फ भारत का रणनीतिक साझीदार है बल्कि भारत और इजरायल की सेनाएं भी काफी करीब हैं। इजरायल और भारत की सेनाएं आपसी सहयोग के लिए जानी जाती हैं। अगर बात हथियारों की करें तो इजरायल , रूस के बाद दूसरा ऐसा देश है जो भारत को सबसे ज्यादा मिलिट्री उपकरण सप्लाई करता है। ऐसे समय में जब सेनाओं के आधुनिकीकरण की चर्चा चल रही है और पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की नापाक हरकतें बढ़ती जा रही है, इजरायल कई मायनों में हमारा मददगार साबित हो सकता है। आइए आज आपको ऐसे मिलिट्री इक्विपमेंट्स के बारे में बताते हैं जिनका प्रयोग सेना ने सितंबर 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में प्रयोग किया और आने वाले समय में भी इनका प्रयोग हो सकता है।

टैवोर गन
टेवोर टीएआर यह इंडियन आर्मी के पैराट्रूपर्स और पैराकमांडोज का अहम हथियार है। सर्जिकल स्ट्राइक के समय पैराकमांडोज ने इसी हथियार का प्रयोग किया था। टैवोर गन को इजरायल डिफेंस फोर्सेज के अलावा अमेरिका और भारत की स्पेशल फोर्सेज प्रयोग करती हैं। सेना, वायुसेना और नौसेना के कमांडोज इसका प्रयोग करते हैं। सितंबर 2016 में जब पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो इसी गन का प्रयेाग हुआ था। साल 1962 में जब चीन-भारत के बीच जंग हुई तो सीआईए की मदद से स्पेशल फ्रंटियर फोर्स यानी एसएफएफ का गठन किया गया। यह फोर्स भी इसका प्रयोग कर रही है।

बराक मिसाइलें
बराक मिसाइल को दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल माना जाता है। कहते हैं कि अगर जमीन पर इन मिसाइलों से कहीं भी निशाना लगाए जाए तो वह निशाना कभी चूक नहीं सकता है। फरवरी में भारत और इजरायल के बीच 2.5 बिलियन डॉलर यानी 17,000 करोड़ की डील हुई है। इस डील के साथ इजरायल मध्यम रेंज की जमीन से हवा तक मार कर सकने वाली मिसाइलें तैयार करेगा।इंडियन आर्मी की पांच रेंजीमेंट्स जिसमें 40 यूनिट्स और 200 मिसाइलें होंगी उन्हें इस डील के तहत डेवलप किया जाएगा।

ईएलएस-2238 रडार सिस्टम
The EL/M-2238 थ्रीडी-स्टार रडार सिस्टम जिसका प्रयोग वर्तमान समय में इंडियन नेवी कर रही है। यह सिस्टम कई तरह से प्रयोग किया जा सकता है। यह हवा के अलावा जमीन पर भी प्रभावशाली रडार सिस्टम है। इसे इजरायल की आईएआई एल्टा कंपनी ने तैयार किया है। दुनिया में सबसे तेज रडार सिस्टम के तौर पर मशहूर इस सिस्टम की रेंज 350 किलोमीटर है। यह 20 किलोमीटर से आने वाली छोटी रेंज की मिसाइल से लेकर 350 किलोमीटर की अत्यधिक दूर से आने वाली मिसाइल को पल भर में लॉक कर सकता है।

अवॉक्स यानी एयर वॉर्निंग सिस्टम
इंडियन एयरफोर्स के पास मौजूद अवाक्स यानी एयरबॉर्नी अर्ली एयर वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम। भारत और इजरायल के बीच इस सिस्टम के लिए भारत ने वर्ष 2004 में 8,000 करोड़ से भी ज्यादा का करार हुआ। इस सिस्टम को इजरायल की आईएआईए एल्टा कंपनी ने तैयार किया है। आज यह सिस्टम इंडियन एयरफोर्स की रीढ़ की तरह है। इस सिस्टम की खासियत है यह बहुत कम समय में ही खतरे को भांप लेता है और तुरंत ही एयरफोर्स को अलर्ट कर देता है।

इजरायल की डर्बी मिसाइल
इजरायल की यह डर्बी मिसाइल आज दुनिया के 15 से ज्यादा देशों की सेनाएं प्रयोग कर रही हैं और भारत को हाल ही में यह मिसाइल हासिल हुई है। पश्चिमी देशों ने इसे पायथन नाम दिया हुआ है। मई में भारत के देसी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के साथ इस मिसाइल को फायर किया गया था। मिसाइल ने सफलतापूर्वक अपना टारगेट हिट किया था।

ड्रोन से होगी सर्जिकल स्ट्राइक
भारत को इजरायल से पहला मिसाइल से लैस ड्रोन हासिल होगा। यह ड्रोन पीएम मोदी के इसी इजरायली दौरे पर भारत को मिलेगा। इस ड्रोन के आने से पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करने के ताकत में दोगुना इजाफा होगा। हेरॉन टीपी-सशस्त्र ड्रोन को दुश्मन के अड्डों का पता लगाने, दुश्मनों को ट्रैक करने और जमीन से हवा में फायर की गई मिसाइल को मार गिराने जैसे कामों में महारत हासिल है।












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