PM Modi Ukraine Visit: आज पोलैंड और यूक्रेन के ऐतिहासिक दौरे पर रवाना होंगे पीएम मोदी, एजेंडे में क्या-क्या?
PM Modi Ukraine Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पोलैंड और यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं और भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री सबसे पहले 21 से 22 अगस्त तक पोलैंड का दौरा करेंगे और फिर 23 अगस्त को कीव जाएंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है, कि 45 साल के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पौलैंड का दौरा हो रहा है। इससे पहले 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने वारसॉ का दौरा किया था।

वर्ष 2024 में भारत और पोलैंड के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी अपने पोलिश समकक्ष डोनाल्ड टस्क से मिलेंगे और पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा और भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। पोलैंड की राजधानी वारसॉ में प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद वो व्यापारिक नेताओं से मुलाकात करेंगे।
पीएम मोदी के पोलैंड दौरे का एजेंडा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत और पोलैंड के बीच सदियों पुराने संबंधों को याद करते हुए बताया है, कि कैसे 2022 में संघर्ष छिड़ने के बाद पोलैंड ने यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने में भारत की सहायता की थी। MEA ने 1940 के दशक के उस प्रकरण का भी जिक्र किया, जब 6000 से ज्यादा पोलिश महिलाओं और बच्चों को भारतीय रियासतों- जामनगर और कोल्हापुर में शरण दी गई थी।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने सोमवार को बताया, कि "पोलैंड में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 25,000 है। इसमें लगभग 5,000 छात्र शामिल हैं। पोलैंड की सरकार और लोगों ने यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' के दौरान बहुमूल्य सहायता की पेशकश की थी। 2022 में पोलैंड के रास्ते 4,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों को निकाला गया।"
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के समझौतों के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "रक्षा सहयोग काफी पुराना है। हमारे बीच रक्षा सहयोग पर एक समझौता है, जिस पर 2003 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें परामर्श और संयुक्त कार्य प्रारूप का प्रावधान है। भारत ने हाल ही में वारसॉ में दूतावास में रक्षा विंग को फिर से खोला है।"
पोलैंड के बाद यूक्रेन जाएंगे पीएम मोदी
इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा को "ऐतिहासिक" यात्रा बताया है और कहा है, कि वे 30 साल पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से कीव का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं।
प्रधानमंत्री पोलैंड से कीव तक ट्रेन से यात्रा करेंगे, जिसमें लगभग 10 घंटे लगेंगे। मामले से परिचित लोगों ने बताया, कि वापसी की यात्रा भी उतनी ही अवधि की होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन सहित कई विश्व नेताओं ने भी यूक्रेनी सीमा के पास पोलिश ट्रेन स्टेशन से ट्रेन द्वारा कीव की यात्रा की थी।
प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रधानमंत्री की यूक्रेन यात्रा, कीव की तरफ से रूसी क्षेत्र में नए सैन्य हमले के बीच हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी की कीव यात्रा, मॉस्को की उनकी हाई-प्रोफाइल यात्रा के कुछ सप्ताह बाद हो रही है, जिसकी अमेरिका और उसके कुछ पश्चिमी सहयोगियों ने आलोचना की थी।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, कि "रूस और यूक्रेन दोनों के साथ भारत के ठोस और स्वतंत्र संबंध हैं और ये साझेदारी अपने आप में खड़ी हैं।"
उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत और यूक्रेन के बीच निरंतर सहयोग को आगे बढ़ाएगी।
तन्मय लाल ने कहा, कि "मैं यह कहना चाहूंगा, कि यह कोई शून्य-योग खेल नहीं है। प्रधानमंत्री ने रूस की यात्रा भी की थी। कई विचारों पर चर्चा की गई।"
उन्होंने आगे कहा, कि "प्रधानमंत्री ने पिछले एक साल में कई मौकों पर राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की और अब वे फिर से यूक्रेन में मिलेंगे।" उन्होंने कहा, "मैं यह कहना चाहूंगा कि ये स्वतंत्र व्यापक संबंध हैं और निश्चित रूप से चल रहे संघर्ष दोनों नेताओं के बीच चर्चा का हिस्सा होंगे।"
क्या प्रधानमंत्री मोदी जेलेंस्की से शांति वार्ता के लिए आग्रह करेंगे?
यूक्रेन में संघर्ष के बारे में पूछे जाने पर लाल ने कहा, कि "भारत इस जटिल मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान खोजने में मदद करने के लिए हर संभव सहायता और योगदान देने को तैयार है।" साथ ही, उन्होंने पीएम मोदी और जेलेंस्की के बीच वार्ता के परिणाम का पूर्वानुमान लगाने से इनकार कर दिया।
लाल ने कहा, "भारत ने बहुत स्पष्ट और सुसंगत स्थिति बनाए रखी है, कि कूटनीति और बातचीत से इस संघर्ष को सुलझाया जा सकता है, जिससे स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। इसलिए बातचीत बहुत ज़रूरी है। स्थायी शांति केवल उन विकल्पों के जरिए ही हासिल की जा सकती है, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हों और यह केवल बातचीत के ज़रिए ही हो सकती है। भारत सभी हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखता है।"
लाल ने यह भी कहा, कि भारत लगातार यूक्रेन संघर्ष के लिए बातचीत के ज़रिए समाधान तक पहुंचने के लिए कूटनीति और बातचीत की वकालत करता रहा है। लाल ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह युद्ध का समय नहीं है। युद्ध के मैदान में समाधान नहीं खोजा जा सकता। यह एक स्पष्ट और सुसंगत स्थिति है, जिसे भारत ने अपनाया है और हमारा मानना है कि अधिकांश देश इस दृष्टिकोण को साझा करते हैं।"
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