जनता के विद्रोह के आगे पेरू की राष्ट्रपति ने डाले हथियार, जल्द चुनाव की घोषणा, पेड्रो कैस्टिलो भी होंगे रिहा
अमेरिका ने भी पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो के संसद भंग करने के फैसले का विरोध किया था। अमेरिका ने कहा कि हम पेरू में संविधान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का विरोध करते हैं।

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पेरू में राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को पद से हटाए जाने के बाद राजनीतिक संकट गहरा गया है। देश में आम चुनाव कराने और पेड्रो कैस्टिलो की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से भी अधिक लोग घायल हुए। मरने वाले लोगों में एक युवक की उम्र 15 साल और एक की 18 साल है। नवीनतम जानकारी के मुताबिक पेरू की राष्ट्रपति डीना बोलुआर्टे ने सोमवार को प्रसारित एक संबोधन में प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार कर लिया है और वह जल्द चुनाव कराने पर सहमत हो गई हैं।

महाभियोग से हटाए गए पेड्रो कैस्टिलो
इससे पहले गुरुवार को खबर आई थी कि पेरू में राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को सांसदों ने महाभियोग चलाकर उन्हें उनके पद से हटा दिया है। संसद को भंग करने के बाद उनकी जगह उपराष्ट्रपति डीना बोलुआर्टे को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया गया। पेरू में 200 साल से ज्यादा के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार किसी महिला को राष्ट्रपति बनाया गया। इसके बाद पेड्रो को हिरासत में ले लिया गया। नयी राष्ट्रपति बोलुआर्टे ने कार्यालय में अपने पहले दिन के शुरुआती चुनावों से इंकार कर दिया। जिसके बाद पेड्रो कैस्लिस्टो के समर्थक उग्र हो गए औऱ उन्होंने शनिवार को दक्षिणी पेरू के अंदाहुयालस शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

शनिवार को हिंसक हुआ प्रदर्शन
शुक्रवार से शुरू हुआ ये विवाद शनिवार को हिंसक हो उठा। प्रदर्शनकारियों ने कुछ पुलिस अधिकारियों को बंधक बना लिया। हिसंक विरोध प्रदर्शनों को लेकर लोकपाल कार्यालय ने बताया कि कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि लोकपाल कार्यालय ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। साथ ही लोकपाल कार्यालय ने लोगों से विरोध के दौरान हिंसक साधनों का सहारा नहीं लेने की अपील भी की है। इसके साथ ही लोकपाल कार्यालय ने पुलिस से भी कहा कि कानून व्यवस्था को बहाल करने के लिए कोई भी कार्रवाई कानून के ढांचे के भीतर की जानी चाहिए।

पेड्रो कैस्टिलो ने की आपातकाल की घोषणा
पेरू कई वर्षों तक राजनीतिक उथल-पुथल से गुजरा है। बीते 3 सालों में देश को कई नए राष्ट्रपति मिल चुके हैं। नया विवाद अक्टूबर में शुरू हुआ जब अभियोजक के कार्यालय ने कैस्टिलो के खिलाफ एक सांविधानिक शिकायत दायर की। उन पर आरोप था कि वह एक आपराधिक संगठन से पाए लाभ के लिए जांच में बाधा डाल रहे हैं। इसके बाद बुधवार को पेड्रो कैस्टिलो ने नाटकीय ढंग से देश के नाम संबोधन में ऐलान किया था कि वह देश में आपातकाल लगाने जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह विपक्षी दलों के वर्चस्व वाली कांग्रेस को भंग कर देंगे।

अमेरिका ने भी की आलोचना
इस घोषणा के कुछ घंटों बाद ही विपक्ष ने आपात बैठक बुलाई और उनके खिलाफ महाभियोग लाने का फैसला किया। 130 सदस्यीय संसद में प्रस्ताव के पक्ष में 101 वोट पड़े, जबकि राष्ट्रपति के समर्थन में मात्र 6 सांसदों ने वोटिंग की। सीएनएन की खबर के अनुसार राष्ट्रपति बोलुआर्टे ने अपने पहले ही भाषण में संसद भंग करने के पेड्रो के फैसले की आलोचना की। अमेरिका ने भी पूर्व राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो के संसद भंग करने के फैसले का विरोध किया था। अमेरिका ने कहा कि हम पेरू में संविधान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का विरोध करते हैं। ऐसा कोई भी कार्य जो पेरू में लोकतंत्र को कमजोर करेगा, हम उसके खिलाफ हैं।












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