फिलीस्तीन ने उइगर मुसलमानों को बताया आतंकवादी, चीन के साथ शिनजियांग के पीड़ित मुस्लिमों का किया सौदा

Palestine China Tie: दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं, जो कब अपनी बात से पलट जाएं, कहा नहीं जा सकता। ऐसे में देशों में पाकिस्तान और फिलीस्तीन कुख्यात हैं। पाकिस्तान की तो खैर अब विश्वसनीयता भी नहीं है, लेकिन इस्लाम के नाम पर पूरी दुनिया में पीड़ित बनने वाले फिलीस्तीन ने उइगर मु्स्लिमों को लेकर बाकी इस्लामिक देशों की तरह मुंह पर पट्टी बांध लिया है।

जो फिलीस्तीन, इजरायल पर क्रूरता का आरोप लगाता है और इस्लाम के नाम पर दुनियाभर के इस्लामिक देशों से समर्थन मांगते रहता है, उसने दोगलापन दिखाते हुए चीन के साथ उइगर मुस्लिमों से होने वाले 'नरसंहार' पर सौदा कर लिया है।

Palestine China Tie

फिलीस्तीन ने क्या किया है?

फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस हफ्ते चीन का दौरा किया है, जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है। लेकिन, सबसे हैरान करने वाली बात ये है, कि फिलीस्तीन के राष्ट्रपति ने शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ चीन के अभियान का समर्थन कर दिया है।

जिस शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों को आतंकवाद निरोधी कैंपों में रखा जाता है और जिस शिनजियांग क्षेत्र में हजारों-हजार मुस्लिमों को अभी तक शी जिनपिंग की सरकार मौत के घाट उतार चुकी है और जिस शिनजियांग में मुस्लिमों से होने वाले अत्याचार को संयुक्त राष्ट्र तक 'क्रूरता की हद' कह चुका है, वहां पर फिलीस्तीन के राष्ट्रपति ने शी जिनपिंग के पक्ष में समर्थन की आवाज उठाई है।

यानि, इस्लाम के नाम पर समर्थन मांगने वाले फिलीस्तीन ने उन लोगों की जिंदगी का सौदा कर लिया, जो इस्लाम में ही विश्वास करते हैं और इस्लाम के लिए ही चीन की सरकार से जंग लड़ रहे हैं।

फिलीस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने शिनजियांग क्षेत्र में चलाए जा रहे कंसट्रेशन कैंपों को लेकर शी जिनपिंग की नीतियों का समर्थन किया है।

बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अब्बास की मुलाकात के तुरंत बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "शिनजियांग से संबंधित मुद्दे बिल्कुल भी मानवाधिकार के मुद्दे नहीं हैं, बल्कि हिंसक आतंकवाद, कट्टरवाद और अलगाववाद विरोधी मुद्दे हैं।"

यानि, फिलीस्तीन ने शिनजियांग में अपनी स्वतंत्रता और अपने मजहब के लिए संघर्ष करने वाले उइगर मुस्लिमों को आतंकवादी और अलगाववादी करार दे दिया है।

संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "फिलिस्तीन, शिनजियांग से संबंधित मुद्दों को लेकर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का दृढ़ता से विरोध करता है।" संयुक्त बयान ने ताइवान और हांगकांग के संबंध में चीन के लिए फिलिस्तीनी प्राधिकरण के समर्थन की भी घोषणा की गई है और फिलीस्तीन ने शी जिनपिंग की सरकार को "पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र कानूनी सरकार" के रूप में मान्यता दी है।

आपको बता दें, कि फिलीस्तीन के राष्ट्रपति अब्बास, इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति वार्ता में चीन की संभावित भूमिका पर चर्चा करने के लिए चार दिवसीय यात्रा पर बीजिंग में हैं। फिलीस्तीन चाहता है, कि इजरायल के खिलाफ चीन उसका साथ दे और उन फिलीस्तीनियों के लिए आवाज उठाए, जो इजरायल के कथित 'कब्जे वाले' क्षेत्र में रहते हैं।

फिलीस्तीन ने क्यों दिखाया 'दोगलापन'?

तुर्की में हैसेटेपे विश्वविद्यालय में चीन की विदेश नीति के एक सहयोगी प्रोफेसर एर्किन एक्रेम ने कहा, कि फिलीस्तीन के पास उइगर मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के सैकड़ों कारण हैं, लेकिन फिलीस्तीन ने अपने हितों को देखा है और उसने उइगर मुस्लिमों को छोड़ना उचित समझा है।

उन्होंने कहा, कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण चीन पर अधिक निर्भर होता जा रहा है और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन के पैसों, और चीन की टेक्नोलॉजी और चीन के समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, कि "उइगर मुद्दा फिलीस्तीन के हितों का समर्थन नहीं करता है, इसीलिए फिलीस्तीन ने चीन का समर्थन किया है।"

एर्किन एक्रेम ने कहा, कि "वे चीन से जो लाभ प्राप्त कर सकते हैं, वो उइगरों का समर्थन करके मिलने वाले लाभ से काफी ज्यादा हैं और इसलिए, फिलीस्तीन के लिए उइगर मुस्लिम कोई मुद्दा नहीं हैं।" आपको बता दें, कि यासिर अराफात सहित पिछले फिलिस्तीनी नेताओं ने भी चीन की उइगर नीतियों के लिए समर्थन व्यक्त किया था।

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