पाकिस्तानी PM के मुंह से निकली 'अमन' की बात, क्या नरेन्द्र मोदी को लुभाने की कोशिश कर रहे शहबाज शरीफ?
Pakistan News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों की इच्छा जताई है और इस बात पर जोर दिया है, कि प्रगति और शांति एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है, कि पाकिस्तान का कोई आक्रामक इरादा नहीं है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
रक्षा एवं शहीद दिवस समारोह के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, कि "पाकिस्तान का किसी भी देश के खिलाफ आक्रामकता का कोई इरादा नहीं है... इसने क्षेत्र में शांति और स्थिरता में भूमिका निभाई है... शांति हमारी पहली इच्छा है", क्योंकि प्रगति और शांति 'एक दूसरे से जुड़े हुए हैं'।" इस कार्यक्रम में शीर्ष सैन्य अधिकारियों, सरकारी प्रतिनिधियों और सैनिकों के परिवारों ने भाग लिया।

भारत-पाकिस्तान संबंध
शहबाज शरीफ की यह टिप्पणी पाकिस्तान की तरफ से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अक्टूबर में इस्लामाबाद में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के लिए औपचारिक निमंत्रण दिए जाने के बाद आई है। विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने निमंत्रण मिलने की पुष्टि की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, कि "हमें एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान से निमंत्रण मिला है।"
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक आतंकवाद खत्म नहीं हो जाता, भारत पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेगा। जम्मू-कश्मीर के लिए बीजेपी का घोषणापत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा, "जब तक आतंकवाद खत्म नहीं हो जाता, हम पाकिस्तान से बातचीत के पक्ष में नहीं हैं। लेकिन हम कश्मीर के युवाओं से जरूर बात करेंगे।"
भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दा
इसी कार्यक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने इस बात पर जोर दिया, कि राजनीतिक मतभेदों को नफरत में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, कि सेना और जनता के बीच मजबूत संबंध विभाजन पैदा करने की कोशिश करने वाले किसी भी 'दुश्मन' को हराने में मदद करेंगे। मुनीर ने यह भी कहा, कि कश्मीर मुद्दा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व रखता है।
हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से फिर से शांति का राग अलापा गया है, लेकिन भारत अब इसके झांसे में आने के मूड में नहीं दिख रहा है।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले कहा था, कि "पाकिस्तान के साथ निरंतर बातचीत का युग समाप्त हो गया है, क्योंकि कार्रवाई के परिणाम होते हैं।" नई दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन के मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा था, कि "पाकिस्तान के साथ निर्बाध बातचीत का युग समाप्त हो गया है। कार्रवाई के परिणाम होते हैं। जहां तक जम्मू-कश्मीर का सवाल है, अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है।"
जिसपर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज बलूच ने दोहराया, कि पाकिस्तान कूटनीति और बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, कि दक्षिण एशिया में सच्ची शांति केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों के अधिकारों के अनुरूप समझौते के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।
बलूच ने उन दावों को भी खारिज कर दिया, कि जम्मू-कश्मीर विवाद को एकतरफा तरीके से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन करना जरूरी है।
इस्लामाबाद और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक तनाव मुख्य रूप से कश्मीर संघर्ष और पाकिस्तान से उत्पन्न सीमा पार आतंकवाद से उपजा है। भारत सामान्य पड़ोसी संबंधों पर जोर देता है, लेकिन उसका कहना है, कि इस्लामाबाद को आतंक-मुक्त वातावरण बनाना चाहिए।
क्या भारतीय प्रधानमंत्री को लुभाने की है कोशिश?
और इस बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) का आयोजन इस बार पाकिस्तान कर रहा है और उसने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भेजा है।
डॉन ने बलूच के हवाले से लिखा है, कि "भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा गया है।'' उन्होंने कहा, कि कुछ देशों ने पहले ही बैठक में भाग लेने की पुष्टि कर दी है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे कौन से देश हैं।
5 अगस्त, 2019 को भारतीय संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने राजनयिक संबंधों को कम कर दिया। इस कदम से दोनों देशों के बीच संबंध और तनावपूर्ण हो गए। और अगर नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान की यात्रा करते हैं, तो शहबाज शरीफ के लिए इसे एक बड़ी डिप्लोमेटिक कामयाबी मानी जाएगी और माना जा रहा है, कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का पड़ोसी देशों को लेकर दिया गया बयान इसी कड़ी से जुड़ता है।












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