Watch: पाकिस्तान में सदियों पुराना मंदिर बना जानवरों का तबेला, मुस्लिम देश में देखिए हिंदुओं की दुर्दशा
Pakistan Hindu Temple Converted into Animal farm: पाकिस्तान में हिन्दुओं को लगभग-लगभग खत्म किया जा चुका है और जो भी बचे खुचे मंदिर हैं, उनका भी नामोनिशान अब मिटाया जा रहा है। कुछ समय पहले पाकिस्तान के एक नेता ने बहुत मासूमियत से कहा था, कि जब देश में हिंदू ही नहीं हैं, तो फिर मंदिर का क्या होगा और शायद पाकिस्तान में इसी नीति पर काम किया जाता है।
पाकिस्तान में सादिकाबाद के अहमदपुर लुम्मा शहर में एक मंदिर को जानवरों के फार्म में बदलने का एक वायरल वीडियो ने व्यापक आक्रोश फैला दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में एक प्राचीन मंदिर दिखाया गया है, जिसे जानवरों के बाड़े में बदल दिया गया है और अब यह मवेशियों, बकरियों, बत्तखों और मुर्गियों का घर बना दिया गया है। वीडियो में दिखाया गया है, कि दो लोग मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं और वीडियो बनाते हैं।
पाकिस्तान का यह वीडियो उस वक्त वायरल हुआ है, जब एक अन्य वीडियो में दिखाया गया है, कि कैसे सादिकाबाद शहर में ही भगवान कृष्ण के एक मंदिर को मस्जिद और मदरसे में बदल दिया गया।
इन घटनाओं ने विवाद को जन्म दिया है, और पड़ोसी देश में धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने लिखा है, कि पाकिस्तानी "इसीलिए इस हालत में हैं, कि उनके पास खाने के लिए खाना नहीं है, जलाने के लिए ईंधन नहीं है और पैसे भी नहीं हैं। आशा है कि उन्होंने वहां हमारे हिंदू समुदाय और हमारे मंदिरों के साथ जो किया है, उसके लिए उन्हें और ज्यादा दर्द भोगना होगा।"
पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा
साल 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान को 'एक कन्ट्री ऑफ पार्टिकुलर कन्सर्न' (a country of particular concern) की श्रेणी में रखा था। जिसका मतलब होता है, वो देश जहां धार्मिक आजादी का महत्व नहीं है। जहां पर अल्पसंख्यकों पर जुल्म किए जाते हैं, उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया जाता है, बगैर किसी आरोप के उन्हें हिरासत में रखा जाता है और अल्पसंख्यक लड़कियों को घर्म परिवर्तन कराने में जिस देश में जोर दिया जाता है।
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम की रिपोर्ट के आधार पर पाकिस्तान को 'अल्पसंख्यकों के लिए नर्क' ठहराया गया था। जिसे तत्कालीन पाकिस्तानी सरकार ने खारिज कर दिया था। अमेरिकन रिपोर्ट में साफ कहा गया था, कि पाकिस्तान में सिर्फ धर्म परिवर्तन के लिए अल्पसंख्यक लड़कियों को अगवा किया जाता है और फिर उनकी शादी मुस्लिमों से करवा दी जाती है। पाकिस्तान अल्पसंख्यक समुदायों के लिए रहने लायक नहीं बचा है।
चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्टिविस्ट जिबरान नासिर बताते हैं, पाकिस्तान में अब सिर्फ 3.6 प्रतिशत ही अल्पसंख्यक रह गये हैं। पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है और अगर कोई हिन्दू परिवार उस विरोध के खिलाफ थाने में जाता है तो उसके ऊपर ईश-निंदा का आरोप मढ़ दिया जाता है। पाकिस्तान में ईश-निंदा के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान है। लिहाजा, ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराने पीड़ित परिवार नहीं जाता है।












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