कश्मीर पर उगलता रहता था जहर, पाकिस्तान का दोस्त मलेशिया अब भारत के कैंप में क्यों आया?

Malaysia-India Tie: सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र को संबोधित करते हुए, तत्कालीन मलेशियाई प्रधान मंत्री महाथिर मोहम्मद ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा था, कि "नई दिल्ली ने कश्मीर पर आक्रमण किया और कब्जा कर लिया था।" तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री की अप्रत्याशित और बेईमान टिप्पणियों के कारण भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिससे दोनों देशों के आपसी संबंध बुरी तरह प्रभावित हुए, खासकर द्विपक्षीय व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र में।

महाथिर, सऊदी अरब विरोधी कट्टरपंथी इस्लामी समूह के खिलाफ तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के कैंप के थे, जिन्हें तुर्की के राष्ट्रपति ने सऊदी राजघराने के हाथों से इस्लामी दुनिया का नेतृत्व छीनकर ओटोमन की श्रेष्ठता को पुनर्जीवित करने की अपनी महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने का काम सौंपा था। इस काम में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल थे।

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लेकिन, यह साजिश तब नाकाम हो गई, जब सऊदी क्राउन प्रिंस सलमान ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। जिससे डरकर इमरान खान दबे पांव भाग लिए और इमरान खान ने दसियों पर सऊदी राज परिवार के खिलाफ जाने को लेकर सऊदी क्राउ प्रिंस से माफियां मांगी।

लेकिन, मलेशिया.. तुर्की के चक्कर में आकर भारत से संबंध खराब कर चुका था।

प्रधानमंत्री महाथिर की लापरवाह टिप्पणियों के बाद भारत ने मलेशियाई पाम तेल के आयात फर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया। और भारतीयों के बीच मलेशियाई उत्पादों को त्यागने का आह्वान वायरल हो गया। मलेशिया से पाम तेल के आयात को रोकने के तुरंत बाद, एक केंद्रीय भारतीय वनस्पति तेल व्यापार निकाय ने अपने 875 सदस्यों से मलेशिया से पाम तेल खरीदने से बचने का आह्वान कर दिया, यह देखते हुए कि सरकार जवाबी कदम उठाने पर विचार कर रही है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल चतुवेर्दी ने कहा, "आपके हित के साथ-साथ हमारे देश के साथ एकजुटता दिखाने के लिए, हमें फिलहाल मलेशिया से खरीदारी करने से बचना चाहिए।" यह मलेशिया के लिए एक झटका था, क्योंकि 2018 में 6.84 अरब रिंगिट (1.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के साथ भारत पाम तेल और पाम तेल उत्पादों की खरीददारी करने वाला मलेशिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार था।

जिसके बाद तत्कालीन मलेशियाई वाणिज्य मंत्री टेरेसा कोक ने तनाव को कम करने की कोशिश शुरू की और एसोसिएशन के कदम को "बड़ा झटका" बताया और उन्होंने कहा, कि मलेशिया भारत से चीनी और मांस के आयात को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।

मलेशिया के डर की सबसे बड़ी वजह ये है, कि यूरोपीय संघ ने 2030 तक जैव ईंधन में पाम तेल को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की योजना की घोषणा की है, जिससे मलेशिया को और बहुत बड़ा झटका लगा है। मलेशिया और इंडोनेशिया इस कदम से डरे हुए हैं और उनका कहना है, कि इससे लाखों छोटे पैमाने के किसानों की आजीविका खत्म हो जाएगी।

... तो इसलिए बदल गये मलेशिया के तेवर

पाकिस्तान, जिसकी औकात मलेशिया से गेहूं का एक दाना खरीदने की नहीं थी, वो भला मलेशिया को आर्थिक संकट में फंसने से कैसे बचा सकता था। लिहाजा, मलेशिया समझ गया, कि भारत से बैर मोल लेकर वो अपने देश को तबाही की ही तरफ ले जाएगा, क्योंकि यूरोपीय देश पाम तेल खरीदना बहुत जल्द बंद करने वाले हैं।

लिहाजा, तब से लेकर आज तक, कई ऐसे कारण हैं, जो भारत-मलेशिया संबंधों के सामान्य होने की भविष्यवाणी करते हैं। मलेशिया के विदेश मंत्री जाम्बरी अब्दुल कादिर की 5-8 नवंबर तक नई दिल्ली यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय डेवलपमेंट है।

उन्होंने छठी भारत-मलेशिया संयुक्त आयोग बैठक के लिए अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात की। जेसीएम ने उन्नत रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, निवेश आदि सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।

ज़ाम्बरी की नई दिल्ली यात्रा, सांस्कृतिक और सभ्यता संबंधों को पुनर्जीवित करने और शीघ्र ही सहयोग के अधिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने का वादा करती है।

लेकिन, ध्यान देने वाली बात ये है, कि किसी को इस जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, कि भारत मलेशिया के दस सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक है, और आसियान देशों में मलेशिया, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

भारत, जो आमतौर पर अपनी विदेश नीति में व्यावहारिक है, उसने अपने विदेश मंत्री के नेतृत्व में संकेत दिया है, कि मलेशिया के साथ संबंधों में सुधार, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को समर्थन देने में सहायक होगा।

गर्मियों में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मलेशिया यात्रा और उसके बाद विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री की मलेशिया यात्रा से पता चलता है, कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आम जमीन की तलाश की जा रही है। ज़ाम्बरी ने कहा, कि मलेशियाई प्रधान मंत्री अनवर इब्राहिम भी जल्द ही भारत का दौरा करने का इरादा रखते हैं।

अनवर इब्राहिम, भारत समर्थक माने जाते हैं और वो मलेशिया को भारत के कैंप में देखना पसंद करते हैं।

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मोदी सरकार की आक्रामक विदेश नीति

पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने आक्रामक विदेश नीति अपनाया है और ग्लोबल साउथ में भारत लीडर की भूमिका में उतरा है, लिहाजा मलेशिया ने भारत के साथ संबंधों को सुधारना अपने राष्ट्रीय हित में पाया है।

लिहाजा, मलेशियाई मंत्री ज़ाम्बरी ने घोषणा की, कि मलेशिया 1 दिसंबर 2024 से भारतीय नागरिकों को 30-दिवसीय वीज़ा-मुक्त प्रवेश की अनुमति देगा। यह कदम अधिक उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने के इरादे का संकेत देता है।

भारत के 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने का अनुमान है। यह मलेशिया के लिए डिजिटल, फिनटेक और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी शुरू करने और उसका लाभ उठाने का एक बेहतरीन मौका है।

इसके अलावा, भारत डिजिटल भुगतान में एक सफलता की कहानी कह रहा है, और भारत की इस सुविधा का लाभ मलेशिया को उठाना और अपनाना चाहिए, जैसे कि यूपीआई और रुपे भुगतान सेवा, जो दोनों देशों के बीच वित्तीय जुड़ाव को बढ़ावा देगी।

भारत से जुड़कर फायदे ही फायदे

2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए मलेशिया के पूर्व नेता के एक गैर-जिम्मेदाराना बयान ने मुख्य रूप से मलेशिया के लिए कठोर आर्थिक परिणामों के साथ भारत-मलेशिया विवाद पैदा कर दिया था।

लेकिन, मलेशिया में सरकार के बदलाव ने नए प्रशासन को नई दिल्ली के साथ अपने संबंधों में गतिरोध पर फिर से विचार करने का मौका दिया है और अब मलेशिया को तय करना है, कि वो भारत के साथ किस तरह के रिश्ते रखना चाहता है।

और फिलहाल मालदीप से जो संकेत मिल रहे हैं, वो यही हैं, कि वो भारत के साथ रिश्ते को बेहतर करना चाहता है और भारत से दोस्ती का फायदा उठाना चाहता है।

चूंकि, भारत एक विशाल अर्थव्यवस्था बन गया है और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए इसकी प्रासंगिकता और महत्व का ग्राफ काफी ऊपर चला गया है, लिहाजा यह अच्छी खबर है, कि मलेशिया ने पाकिस्तान की बर्बाद करने वाली साजिशों को छोड़ा है और भारत के साथ मजबूत संबंधों का आनंद लेने का विकल्प चुना है।

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