तालिबान के कब्जे के वक्त पाकिस्तानी हैकर्स ने अफगान यूजर्स पर किया था 'साइबर अटैक'
नई दिल्ली, 16 नवंबर: अगस्त के आसपास जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो बहुत से पाकिस्तानी हैकर्स ने अफगानी यूजर्स को निशाना बनाया था। हाल ही में फेसबुक में खतरों की जांच करने वाली टीम ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में इस बात खुलासा किया। पाकिस्तान हैकर्स के टारगेट पर ज्यादातर वो लोग थे, जिनका कनेक्शन पिछली सरकार से था।

फेसबुक अधिकारियों ने बताया कि सिक्योरिटी इंडस्ट्री में साइडकॉपी के नाम से जाना जाने वाला ग्रुप मैलवेयर वाली वेबसाइटों के लिंक साझा करता है, जो लोगों के उपकरणों की निगरानी करते थे। उनके लक्ष्य काबुल में सरकार, सेना, कानून प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़े लोग थे। जांच के बाद अगस्त में साइडकॉपी को फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया। अधिकारियों ने आगे कहा कि हैकिंग ग्रुप ने फिशिंग लिंक पर क्लिक करने या दुर्भावनापूर्ण चैट ऐप डाउनलोड करने के लिए महिलाओं की फेक प्रोफाइल भी बनाई। इसमें कुछ वैध वेबसाइटों से भी समझौता किया गया था, ताकि लोगों के फेसबुक क्रेडेंशियल्स में हेरफेर की जा सके।
फेसबुक के साइबर जासूसी जांच के प्रमुख माइक डिविल्यांस्की ने कहा कि जब भी साइबर अटैक होता है, तो अंतिम लक्ष्य के बारे में अनुमान लगाना हमेशा मुश्किल होता है। अभी उनकी टीम को नहीं पता कि किससे समझौता किया गया था। वहीं सोशल मीडिया की बड़ी कंपनियां फेसबुक, ट्विटर, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट आदि का मानना है कि तालिबान के अधिग्रहण के दौरान अफगान उपयोगकर्ताओं के अकाउंट को बंद करने के लिए ऐसा किया गया।
फेसबुक ने कहा कि उसने पहले हैकिंग अभियान का खुलासा नहीं किया था, लेकिन अप्रैल और अगस्त के बीच देश में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा चिंता को लेकर उसने इस दिशा में ज्यादा काम करने की जरूरत समझी। जिसमें ये सब जानकारियां सामने आई हैं। इन सब को उसी समय अमेरिकी विदेश विभाग के साथ साझा कर दिया गया था।












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