इमरान खान को जड़ से उखाड़ फेंकेगी पाकिस्तानी सेना, 6 एक्शन प्लान पर तेजी से काम, बड़बोलापन पड़ा भारी?
इमरान खान का मानना है, कि उनकी छवि इतनी विशालकाय है, कि सेना और सरकार उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकती है। इमरान खान को वैश्विक समुदाय से भी मदद की उम्मीद है।

Pakistan News: पाकिस्तान में इस साल अक्टूबर में चुनाव करवाने को लेकर सरकार की तरफ से पहसी बार बड़ा ऐलान किया गया है और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है, कि अक्टूबर में ही तय समय पर देश में चुनाव होंगे।
लेकिन सवाल इमरान खान के राजनीतिक भविष्य को लेकर है, कि उनका क्या होगा?
फिलहाल के लिए पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान और उसके राजनीतिक सहयोगी का गेम प्लान ये है, कि इमरान खान का कोई जिक्र भी ना हो। उनकी पार्टी को छोड़ कर उनका सफाया किया जा रहा है। उनके समर्थकों को चुप कराया जा रहा है और कैद किया जा रहा है।
उनके घोटालों और छल-कपटों को उजागर करके उनकी प्रतिष्ठा और छवि को धूमिल किया जा रहा है। उन्हें सैकड़ों मामलों में फंसाया जा रहा है, जिसमें आतंकवादी और देशद्रोही धाराएं भी शामिल हैं। पूरी संभावना है, कि इमरान खान के खिलाफ आर्मी कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा।
वहीं, इमरान के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के अलावा पाकिस्तान की हाइब्रिड शासन को यह तय करना होगा कि इमरान खान का क्या किया जाए और माना जा रहा है, कि
पाकिस्तान की फौज 6 विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।
देश से बाहर निकाला जाए- पाकिस्तानी सेना इमरान खान को एक बार देश से बाहर निकल जाने का विकल्प दे चुकी है, लेकिन अगर इमरान खान निर्वासन में जाने के लिए तैयार हो जाते हैं, तो इमरान 'प्रतिष्ठान' के लिए एक दुःस्वप्न बन जाएंगे। वह सेना के खिलाफ स्वतंत्र रूप से अभियान चला सकेगें और पश्चिमी देशों में सेना की छवि को धूल में मिला देंगे।
जेल- इमरान खान अगर जेल में जाते हैं तो भी वो राजनीतिक खेल में बने रहेंगे। जेल में उनकी उपस्थिति उनके समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। वह एक जीवित शहीद कहलाएंगे, जो उनकी सेलिब्रिटी स्टेटस को और मजबूत करेगी। उनके कारावास को उचित ठहराना, सेना और सरकार के लिए काफी मुश्किल होगा, क्योंकि इसे राजनीतिक उत्पीड़न के रूप में देखा जाएगा।
अयोग्यता- अगर इमरान खान को अयोग्य ठहराकर उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, फिर भी इमरान खान राजनीतिक को प्रभावित करने के लिए अकेले ही काफी होंगे और मौजूदा हालात में, इमरान खान अकेले ही सेना और सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। इमरान खान भले खुद चुनाव ना लड़ें, लेकिन वो अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाने और उन्हें जिताने की हैसियत अभी भी रखते हैं, लिहाजा शासन कुछ भी चाह ले, ये ऑप्शन भी इमरान खान को रोकने में शायद ही कारगर हो पाएगा।
पीटीआई पर प्रतिबंध- इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पर प्रतिबंध। ये शायद पाकिस्तानी सेना के पास मौजूद सभी विकल्पों में सबसे व्यर्थ है। पार्टी का नाम बदलकर या नई पार्टी बनाकर प्रतिबंध से आसानी से बचा जा सकता है, जिसमें भले ही इमरान की कोई औपचारिक भूमिका न हो, लेकिन पार्टी उनके ही अधीन होगी।
सेवानिवृत्त और पुनर्वास- इमरान कम झूठ बोलने और यहां तक कि निकट भविष्य के लिए राजनीति से दूर रहने के लिए सहमत हो जाएं और कुछ सालों का बनवास बिताकर वापस आ जाएं। लेकिन यह विकल्प न तो इमरान (यह उनके चरित्र के खिलाफ है) को मंजूर होने वाला है और न ही आसिम मुनीर को।
उन्मूलन- इमरान खान का सफाया या तो न्यायिक मार्ग से होगा या फिर प्राकृतिक तौर पर इमरान खान की मृत्यु हो जाए। जहां यह इमरान के दुश्मनों के लिए एक आकर्षक विकल्प हो सकता है, वहीं यह एक बहुत ही जोखिम भरा विकल्प भी है। अगर इमरान खान को फांसी दी जाती है, तो इसमें कोई शक नहीं है, कि पाकिस्तान गृहयुद्ध में फंसने के अलावा, अंतर्राष्ट्रीय तौर पर भी घिर जाएगा। लिहाजा, इसकी उम्मीद कम है, कि इमरान खान को फांसी की सजा दी जाएगी। हालांकि, बेनजीर भुट्टो के पिता जुल्फीकार अली भुट्टो, जो इमरान खान से कम लोकप्रिय नहीं थे, उन्हें भी सेना फांसी पर लटका चुकी है, लिहाजा इमरान खान को फांसी नहीं ही दी जाएगी, ये भी नहीं कहा जा सकता है।
तो फिर इमरान खान का क्या होगा?
पाकिस्तान की सेना इन 6 विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है और इन विकल्पों के लागू होने के परिणामों पर भी काम कर रही है। लेकिन, उस वक्त तक के लिए, इमरान खान के तेवर बरकरार हैं।
इमरान खान यह तो समझने लगे हैं, कि वह गंभीर संकट में है, लेकिन फिर भी वह उद्दंड बने हुए हैं। ऐसा लगता है, कि वह अभी भी सोच रहे हैं, कि वह शक्तिशाली सेना का मुकाबला कर सकते हैं और शीर्ष पर आ सकते हैं। लेकिन, इमरान खान के पास ये आत्मविश्वास कहां से आ रहा है, ये कहना मुश्किल है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये इमरान खान की अदम्य इच्छाशक्ति हो सकती है या फिर उनका जिद हो सकता है, जिसने उन्हें भ्रम में डाल दिया है। ये तो सच है, कि सालों की मेहनत के बाद वो प्रधानमंत्री बने, भले ही उन्हें शुरू से ही खारिज किया गया हो। लेकिन, मौजूद हालात में यही लगता है, कि इमरान खान की जिद उन्हें अभी और मुसीबत में डालेगी।
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