UNSC की स्थाई सदस्यता के लिए भारत का समर्थन नहीं करेगा पाकिस्तान, बिलावल भुट्टो का बयान
श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को कहा कि, उनकी सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और जापान को स्थायी सदस्य का दर्जा देने के प्रयासों का समर्थन करेगी।
इस्लामाबाद, सितंबर 30: संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई सदस्यता का पाकिस्तान समर्थन नहीं करेगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने गुरुवार को इस बात का ऐलान किया है और कहा है, कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के उन सुधारों का विरोध करता है, जो भारत को संयुक्त राष्ट्र की हाई टेबल में लाने के लिए सुरक्षा परिषद का विस्तार करते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने वाशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये टिप्पणी की। हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत की यूएनएससी की स्थाई सदस्यता में शामिल होने की कोशिश का जरूर विरोध किया, लेकिन उन्होंने भारत और अन्य देशों के साथ जलवायु संकट के मुद्दे पर एक साथ काम करने की इच्छा जताई।

बिलावल भुट्टो ने क्या कहा?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि, "मैंने पहले ही सभी चेतावनियों के साथ, मुख्य रूप से यह सही है कि हमें जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर एक साथ काम करना चाहिए। जब मैं अमेरिका और चीन से इस पर मिलकर काम करने का आग्रह करता हूं, तो मुझे यह स्वीकार करने की नैतिक शक्ति होनी चाहिए, कि मतभेद जो भी हों , भारत और पाकिस्तान को इस विषय पर भी मिलकर काम करना चाहिए।" पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने कहा कि, बिलावल भुट्टो ने कहा कि, पाकिस्तान भारत की संयुक्त राष्ट्र की स्थाई सदस्यता की बोली का समर्थन नहीं करेगा। हाल ही में संपन्न संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में, भारत ने अपनी आर्थिक और विदेश नीति के लिए कई विकासशील और विकसित देशों से प्रशंसा प्राप्त की है और कई देशों ने महासभा में भारत की UNSC बोली का भी समर्थन किया। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे वीटो पावर वाले देश पहले से ही भारत का समर्थन करते आए हैं, लेकिन हर बार चीन भारत के रास्ते का रोड़ा साबित होता आया है।

कश्मीर का मुद्दा उठाता पाकिस्तान
UNGA में अपने संबोधन के दौरान, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले सप्ताह भारत के साथ शांति की इच्छा जरूर जताई, लेकिन वह कश्मीर मुद्दे को उठाने से भी नहीं चूके। शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि, "हम भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांति चाहते हैं, दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता होना चाहिए, लेकिन जम्मू-कश्मीर विवाद के न्यायसंगत और स्थायी समाधान पर यह निर्भर है।" उन्होंने कहा कि, "भारत को रचनात्मक जुड़ाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए। हम पड़ोसी हैं और हम हमेशा के लिए हैं, चुनाव हमारा है कि हम शांति से रहें या एक-दूसरे से लड़ते रहें।" आपको बता दें कि, मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ बातचीत रोक दी है और कश्मीर को लेकर भारत अपनी लंबे समय से चली आ रही स्थिति पर अडिग है, कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पीओके भी शामिल है, वो भारत का हिस्सा है।

श्रीलंका करेगा भारत का समर्थन
वहीं, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को कहा कि, उनकी सरकार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और जापान को स्थायी सदस्य का दर्जा देने के प्रयासों का समर्थन करेगी। मंगलवार को जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी के साथ एक बैठक के दौरान, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने "अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जापान (श्रीलंका को) द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनने के लिए जापान और भारत दोनों के अभियान का समर्थन करने की अपनी सरकार की इच्छा व्यक्त की।" आपको बता दें कि, भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वर्षों से प्रयास कर रहा है और भारत इस कोशिश में सबसे आगे रहा है और भारत ने हमेशा से कहा है कि, संयुक्त राष्ट्र का स्थाई सदस्य बनने का हकदार भारत है और संयुक्त राष्ट्र का मौजूदा ढांचा 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

कैसा है UNSC का मौजूदा प्रारूप
वर्तमान में UNSC में पांच स्थायी सदस्य और 10 गैर-स्थायी सदस्य देश शामिल हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। पांच स्थायी सदस्य देशों में रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं और ये देश किसी भी ठोस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। जबकि, भारत समकालीन वैश्विक वास्तविकता को प्रतिबिंबित करने के लिए स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है। वहीं, भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक निर्वाचित गैर-स्थायी सदस्य है और भारत का कार्यकाल 2 सालों का है। भारत पिछले साल अगस्त महीने में यूएनएससी का अध्यक्ष था, जबकि इस साल दिसंबर में भी भारत यूएनएससी का अध्यक्ष बनेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि, भारत बड़ी जिम्मेदारियां उठाने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि, यूएनएससी में स्थाई सदस्यता के लिए भारत का समर्थन अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन भी करते हैं, लेकिन चीन बार बार अड़ंगा लगा देता है।












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