वॉशिंगटन में अपनी प्रॉपर्टी बेचेगा पाकिस्तान, भारतीय कंपनी ने लगाई बोली, यहूदी कंपनी भी शामिल
पाकिस्तान डिफॉल्टर होने के कगार पर पहुंच गया है। इसी महीने पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मुफ्ता इस्लाइल ने कहा था, कि पाकिस्तान का डिफॉल्टर होना निश्चित है। मुफ्ता इस्लाइल, शहबाज शरीफ की ही पार्टी से हैं।
Pakistan Property Sell In Washington: खराब आर्थिक स्थिति में फंसे पाकिस्तान ने डिफॉल्टर होने से बचने के लिए विदेशों में अपनी प्रॉपर्टी को बेचना शुरू कर दिया है। सबसे दिलचस्प बात ये है, कि अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में पाकिस्तान अपनी जिस प्रॉपर्टी को बेचेगा, उसे खरीदने के लिए एक यहूदी कंपनी और एक भारतीय कंपनी ने भी बोली लगा दी है। जिन यहूदियों से पाकिस्तान नफरत करता है और जिस भारत को पाकिस्तान अपना नंबर वन दुश्मन मानता है, उनके ही नागरिकों ने पाकिस्तानी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए सबसे ज्यादा की बोली लगाई है।

प्रॉपर्टी बेच रहा है पाकिस्तान
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में स्थिति अपनी एक बिल्डिंग को बेचने का फैसला किया है और इस प्रक्रिया में अभी तक तीन खरीददारों ने बोलियां लगाई हैं, जिनमें एक यहूदी और एक भारतीय कंपनी शामिल है। ये बिल्डिंग एक वर्क वॉशिंगटन में पाकिस्तान का डिफेंस सेक्शन हुआ करता था, लेकिन अब ये बिल्डिंग बिकने के लिए तैयार है। डॉन ने वॉशिंगटन में पाकिस्तान डिप्लोमेटिग सूत्रों का हवाला देते हुए कहा है, कि एक यहूदी ग्रुप की तरफ से पाकिस्तानी बिल्डिंग को खरीदने के लिए 68 लाख डॉलर की बोली लगाई गई है, जो अभी तक की सबसे ऊंची बोली है। ये यहूदी कंपनी पाकिस्तानी बिल्डिंग में एक सिनेगॉग (synagogue) बनाना चाहता है। आपको बता दें कि, सिनेगॉग यहूदियों के पूजा स्थल को कहते हैं, यानि पाकिस्तानी बिल्डिंग में यहूदी ग्रुप एक मंदिर बनाना चाहता है और इसीलिए उसने बोली लगाई है।

भारतीय कंपनी ने भी लगाई बोली
डॉन के पाकिस्तान के डिप्लोमेटिक सूत्रों ने बताया कि, पाकिस्तानी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए दूसरी बोली एक भारतीय प्रॉपर्टी कारोबरी कंपनी की है, जिसने 50 लाख डॉलर की बोली लगाई है। वहीं, तीसरी बोली एक पाकिस्तानी प्रॉपर्टी कंपनी की तरफ से लगाई गई है, जो 40 लाख डॉलर की है। यानि, अभी तक जो तीन बोली लगाई गई है, उसमें पहली बोली यहूदियों की, दूसरी बोली भारतीय प्रॉपर्टी कंपनी की और तीसरी बोली पाकिस्तानी प्रॉपर्टी कंपनी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, रियल्टी बाजार में पाकिस्तानी-अमेरिकन्स ने कहा है, कि जो सबसे ज्यादा कीमत लगाएगा, उसके हाथों में पाकिस्तानी प्रॉपर्टी को बेचा जाना चाहिए। डॉन ने पाकिस्तानी खरीददार के हवाले से कहा है कि, पाकिस्तानी अमेरिकन्स का मानना है, कि पाकिस्तानी प्रॉपर्टी को यहूदियों के हाथों बेचा जाना चाहिए, जो वहां पर पूजा स्थल बनाना चाहते हैं, इससे प्रभावशाली अमेरिकी समुदाय में पाकिस्तान को लेकर सद्भावना पैदा होगी। पाकिस्तानी खरीददार ने अपना नाम नहीं छापने का अनुरोध किया है।

विदेशी प्रॉपर्टी को बेच रहा पाकिस्तान
आपको बता दें कि, इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों ने डॉन को बताया था कि, वाशिंगटन में देश की तीन राजनयिक संपत्तियों में से एक, प्रतिष्ठित आर स्ट्रीट एनडब्ल्यू पर स्थित एक बिल्डिंग को बेचने का फैसला किया है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने ये भी साफ किया, कि पाकिस्तान, ना तो अपने नये और ना ही पुराने दूतावासों को ही बेचेगा। वहीं, जो बिल्डिंग पाकिस्तान ने बेचने का फैसला किया है, वो 1950 के दशक के मध्य से 2000 के दशक के प्रारंभ तक पाकिस्तानी दूतावास का डिफेंस सेक्शन था। इससे पहले सोमवार को, निजीकरण पर पाकिस्तानी कैबिनेट समिति (सीसीओपी) ने निजीकरण आयोग से न्यूयॉर्क में रूजवेल्ट होटल साइट को पट्टे पर देने के लिए भी एक फाइनेंशियल एडवाइजर की नियुक्ति करने के लिए कहा था।

दूतावासों को बेचने से इनकार
डॉन के मुताबिक, फिलहाल पाकिस्तानी डिप्लोमेट्स इस बात पर विचार कर रहे हैं, कि जिस बिल्डिंग को बेचा जाना है, उसे मरम्मत करवाकर बेचा जाए, या फिर बिना मरम्मत करवाए ही बेच दिया जाए। एक पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने कहा कि, "हम जल्दबाजी में नहीं हैं और हम ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे, जिससे पाकिस्तान को लाभ नहीं हो।" पाकिस्तान सरकार पहले ही बिल्डिंग को बेचने का आदेश जारी कर चुकी है। पाकिस्तान में पहले दावा किया गया था, कि पाकिस्तान सरकार ने अमेरिका में अपने नये और पुराने दूतावासों को भी बेचने का फैसला किया है, जिससे पाकिस्तानी डिप्लोमेट्स ने इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि, पाकिस्तान का नया दूतावास साल 2000 में बनाया गया था, जबकि पाकिस्तान का पुराना दूतावास भारतीय दूतावास के करीब मैसाचुसेट्स एवेन्यू शहर के केंद्र में था।

जीर्णोद्धार के नाम पर धांधली
डॉन ने एक और चौंकाना वाला खुलासा किया है, कि जिस बिल्डिंग को बेचा जाना है, उसके जीर्णोद्धार के नाम पर सरकार को खर्च की एक रकम भेजी गई थी, लेकिन असल में उस बिल्डिंग का जीर्णाद्धार कभी हुआ ही नहीं। लिहाजा, अब पाकिस्तान में उसकी जांच की मांग की जा रही है। जिस क्षेत्र में पाकिस्तानी बिल्डिंग स्थिति है, उस क्षेत्र के निवासियों ने कई बार अमेरिकी अधिकारियों से शिकायत की है, कि पाकिस्तानी बिल्डिंग उनकी सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है और उसे तोड़ देना चाहिए। डॉन के मुताबिक, आर स्ट्रीट बिल्डिंग को 1953 और 1956 के बीच राजदूत सैयद अमजद अली ने खरीदा था। वहीं, पुराने दूतावास को अमेरिका में पाकिस्तान के पहले राजदूत एम.ए.एच.इस्पहानी ने खरीदा था। दोनों भवन करीब 20 साल से खाली पड़े हैं। एक पूर्व पाकिस्तानी राजदूत ने डॉन को बताया कि, दो राजदूत जलील अब्बास जिलानी और शेरी रहमान पहले दूतावास की पुरानी इमारत को बेचने के करीब आए थे, लेकिन मीडिया के हंगामे के बाद सरकार पीछे हट गई।












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