पाकिस्तान किसी भी वक्त हो सकता है डिफॉल्ट, कराची बंदरगाह बेचेगा, मुस्लिम देशों का मदद से इनकार
Pakistan Deafult: गहरे आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान अब किसी भी वक्त डिफॉल्ट होने की घोषणा कर सकता है और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है, कि आईएमएफ से पाकिस्तान को बेलऑउट पैकेज मिलने की रही सही कसर भी सरकार के बजट से खत्म हो गई है।
ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अंकुर शुक्ला ने पाकिस्तान इनसाइट की रिपोर्ट में कहा है, कि "यह जुलाई में शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में डॉलर की गंभीर कमी का कारण बनेगा, और पाकिस्तान के डिफॉल्ट होने की संभावनाओं को काफी बढ़ा देगा।"

आईएमएफ ने टैक्स आधार को व्यापक बनाने और टैक्स माफी को शामिल करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने को लेकर शहबाज सरकार के बजट की आलोचना की थी। वहीं, डिफॉल्ट होने से बचने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की जमीन-जायदाद को बेचना शुरू कर दिया है।
कराची पोर्ट को बेचने का फैसला
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान की सरकार ने कराची बंदरगाह को बेचने का फैसला कर लिया है और बिक्री की प्रक्रिया को फाइनल करने के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है, जो कराची बंदरगाह को बेचने के लिए डील करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि ये कमेटी संयुक्त अरब अमीरात से कराची बंदरगाह की बिक्री को लेकर डील को फाइनल करेगा। पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, शहबाज सरकार ने देश को आर्थिक संकट से बचाने के लिए कराची बंदरगाह को बेचना का फैसला आपातकालीन कदम के तौर पर किया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने अंतर-सरकारी वाणिज्यिक लेनदेन पर कैबिनेट समिति की बैठक की अध्यक्षता की है। जिसमें, कैबिनेट समिति ने कराची पोर्ट ट्रस्ट (केपीटी) और यूएई सरकार के बीच एक वाणिज्यिक समझौते पर बातचीत करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है।
इस फैसले के मुताबिक, कराची बंदरगाह टर्मिनलों को सौंपने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की एक नामित एजेंसी के साथ सरकार से सरकार की व्यवस्था के तहत एक मसौदा संचालन, रखरखाव, निवेश और विकास समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वार्ता समिति को भी अनुमति दी गई है।
पाकिस्तान की कोशिश अबू धाबी पोर्ट्स ग्रुप की सहायक कंपनी अबू धाबी पोर्ट्स (एडीपी) को टर्मिनलों को सौंपने के लिए एक समझौते पर पहुंचने की है। यूएई सरकार ने पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल्स (पीआईसीटी) के प्रशासनिक नियंत्रण वाले कराची पोर्ट टर्मिनलों को हासिल करने में दिलचस्पी दिखाई थी।
पाकिस्तानी अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि ये कमेटी इसी हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात जाएगही और डील फाइनल करेगी, जिसके बाद कराची बंदरगाह पर यूएई का नियंत्रण हो जाएगा।
डिफॉल्ट होने से सिर्फ एक कदम पीछे
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार इस महीने 4 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जिसमें से 900 मिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज पाकिस्तान को इसी महीने चुकाना है। वहीं, जून के अंत तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह से खत्म होने की आशंका जताई गई है।
वहीं, जुलाई से दिसंबर के बीच, पाकिस्तान को अतिरिक्त 4 अरब डॉलर चुकाने होंगे, जिसे रोलओवर नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "विदेशी मुद्रा भंडार वित्त वर्ष 2024 की शुरुआत में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो जाएगा और देश डिफॉल्ट कर जाएगा।"
वहीं, ब्लूमबर्ग ने कहा है, कि "अक्टूबर में देश में आम चुनाव होने के बाद तक, किसी भी नए खैरात पर आईएमएफ के साथ बातचीत शुरू होने की संभावना नहीं है। और नई सरकार के गठन होने के बाद भी फिर से एक नये बेलऑउट कार्यक्रम के लिए किसी समझौते तक पहुंचने में काफी वक्त लगेगा।" वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इस देरी की वजह से पाकिस्तान के पास खरीदने की क्षमता खत्म हो जाएगी और देश की स्थिति श्रीलंका जैसी हो जाएगी।












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