भारत और पाकिस्तान में होने वाली है दोस्ती? आज प्रधानमंत्री बनने से पहले ही शहबाज शरीफ ने उठाए 2 बड़े कदम
India-Pakistan News: पाकिस्तान में शहबाज शरीफ और बिलावल भुट्टो की शक्ल में एक नई नागरिक सरकार का चेहरा बनने लगा है, जिसे सेना का समर्थन हासिल है। पाकिस्तानी संसद में आज प्रधानमंत्री का चुनाव होने जा रहा है।
लेकिन, जैसे ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की नई नागरिक सरकार आकार ले रही है, इस्लामाबाद की तरफ से दो ऐसे बड़े कदम उठाए गये हैं, जिनसे पता चलता है, कि नई दिल्ली से पड़ोसी देश फिर से जुड़ाव बढ़ाना चाहता है।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को मोदी सरकार की तरफ से खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान ने नई दिल्ली से अपने दूत को वापस बुला लिया था और उसके बाद साल 2019 से दोनों देशों में एक दूसरे के उच्चायुक्त नहीं थे। लेकिन, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ना सिर्फ पिछले हफ्ते अपने उच्चाचुक्त को भारत भेज दिया है, बल्कि वो एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है।
पाकिस्तान का पहला बड़ा कदम
इस्लामाबाद का पहला कदम इस सप्ताह की शुरुआत में आया, जब उसने साद अहमद वाराइच को तीन साल के कार्यकाल के लिए नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग में नए प्रभारी डी'एफ़ेयर (सीडीए) के रूप में भेजा।
नई दिल्ली में पाकिस्तान के पास पिछले 6 महीने से अस्थायी सीडीए था और ऐजाज खान पिछले 6 महीने से अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पूर्ववर्ती सलमान शरीफ ने पिछले साल जुलाई में भारत छोड़ दिया था।
26 फरवरी को सीडीए के रूप में जिम्मेदारी संभालने वाले वाराइच ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन में इस्लामाबाद के राजनयिक के रूप में भी काम किया है। उन्होंने पाकिस्तान विदेश मंत्रालय में अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की डेस्क के महानिदेशक के रूप में भी काम किया है।
पाकिस्तान का दूसरा बड़ा कदम
पाकिस्तान का दूसरा कद प्रतीकात्मक है, लेकिन काफी ठोस सार्वजनिक संदेश भेजता है। पता चला है, कि साल 2019 के बाद पहली बार पाकिस्तान अपना राष्ट्रीय दिवस समारोह सार्वजनिक तौर पर नई दिल्ली में मनाएगा और इसे बड़ा डिप्लोमेटिक हलचल माना जा रहा है।
पाकिस्तान राष्ट्रीय दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है - जिस दिन 1940 में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए एक स्वतंत्र देश के निर्माण के लिए लाहौर प्रस्ताव को अपनाया था - और पाकिस्तान उच्चायोग आमतौर पर इसे अपने दूतावास परिसर में मनाता है। लेकिन, इस बार के गेस्ट लिस्ट में कई भारतीय रणनीतिक समुदाय के जानकार और नई दिल्ली में विदेशी राजनयिक कोर के सदस्य शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस साल पाकिस्तानी दूतावास ने 23 मार्च की जगह 28 मार्च को पाकिस्तान राष्ट्रीय दिवस मनाने का फैसला किया है।
यदि ऐसा होता है, तो पाकिस्तान उच्चायोग को भारतीय विदेश मंत्रालय में दिल्ली पुलिस के राजनयिक सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रभागों के साथ काम करना होगा। पिछली बार पाकिस्तान ने अपना राष्ट्रीय दिवस पुलवामा हमलों और बालाकोट हवाई हमलों के साये में मनाया था, जब तत्कालीन उच्चायुक्त सोहेल महमूद ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की थी।
संयोग से, 2019 से पहले पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस में शामिल होने के लिए जो भी भारतीय मेहमान पाकिस्तान उच्चायोग जाने वाले होते थे, उनसे दिल्ली पुलिस पूछताछ करती थी। यही काम पाकिस्तान में भी होता है। जब इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग इफ्तार पार्टी का आयोजन करता था, तो पाकिस्तान की स्थानीय पुलिस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों से पूछताछ करती है।
लेकिन, अब जबकि 2019 के बाद पाकिस्तान एक बार फिर से नई दिल्ली में सीडीए भेज चुका है और अपना राष्ट्रीय दिवस मनाने की योजना बना रहा है, वो उसके नई दिल्ली के साथ फिर से संबंध सुधारने की दिशा में बड़े कदम माने जा रहे हैं। ये भी कहा जा रहा है, कि सैन्य प्रतिष्ठान की तरफ से शहबाज शरीफ को संबंधों को सामान्य करने की दिशा में बढ़ने की इजाजत दी गई है।
नई दिल्ली का क्या है नजरिया?
नई दिल्ली के नजरिए से, भारत अब चुनावी मोड में आ चुका है और पाकिस्तान के इन इशारों पर फिलहाल प्रतिक्रिया देने की कोई जल्दी नहीं है, कम से कम इस साल मई तक, जब चुनाव परिणाम स्पष्ट हो जाएंगे। नई दिल्ली की "आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चलती" वाली नीति का मतलब है, कि उसने पिछले पांच वर्षों में अब तक पाकिस्तान के प्रति उदासीनता का सिद्धांत अपनाया है।
सूत्रों ने कहा, कि इस मुद्दे को मई तक टालने से नई दिल्ली को पाकिस्तान की चुनावी प्रक्रिया के नतीजों का आकलन करने के लिए "डिप्लोमेटिक स्पेस और समय" भी मिलता है।
पाकिस्तान में पिछले महीने का आम चुनाव भारी विवादों में है, जिसमें शहबाज शरीफ की पीएमएल-एन (75 सीटें) और पीपीपी (54) गठबंधन सरकार बनाने पर सहमत हुए हैं, जबकि जेल में बंद पूर्व प्रधान मंत्री इमरान खान द्वारा समर्थित उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा (93) सीटें मिली हैं। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 266 निर्वाचित सीटें हैं। इमरान खान ने आरोप लगाया है, कि नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली नई सरकार, जो सोमवार को प्रधान मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं, वो लोगों के जनादेश का उल्लंघन है।
भारतीय सूत्रों ने कहा है, कि मई के अंत तक, जब लोकसभा नतीजे आ जाएंगे, नई दिल्ली के पास पाकिस्तान की नई सैन्य समर्थित नागरिक सरकार की "स्थिरता और दूरदर्शिता का पूरा आकलन" होगा।
सूत्रों ने कहा, संबंध सुधारने को लेकर पाकिस्तान कितना गंभीर है, वो इस बात पर भी निर्भर करेगा, कि वो भारत विरोधी बयान बाजी में कितनी कमी आती है, साथ ही आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान कितनी गंभीरता दिखाता है।
कि, भारत विरोधी बयानबाजी में कमी, खासकर कश्मीर पर, और नियंत्रण रेखा पर और भारत में कहीं भी आतंक-मुक्त माहौल, दिल्ली के अगले कदमों को भी निर्धारित करेगा। एक भारतीय अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा है, कि "इससे फर्क नहीं पड़ता, कि पाकिस्तान कितना 'कम महत्वपूर्ण या कम रिस्क' वाले कदम उठा रहा है, हमारे लिए मायने रखता है, कि इसमें हमारे लिए क्या है।"
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