थंडर या ब्लंडर? कटिंग एज लड़ाकू विमान बोलकर चीन ने पाकिस्तान को थमाया कबाड़! एक और JF-17 एयरक्राफ्ट क्रैश
JF-17: क्या चीन ने पाकिस्तान को 5th जेनरेशन फाइटर जेट बोलकर JF-17 नाम का कबाड़ बेच दिया है? पाकिस्तान के अंदर भी ये सवाल इसलिए पूछे जा रहे हैं, क्योंकि 5 जून 2024 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झांग जिले में JF-17 थंडर ब्लॉक 2 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस दुर्घटना के बाद पाकिस्तान के डिफेंस महकमे में सवाल पूछे जा रहे हैं, कि क्या चीन ने पाकिस्तान को एक घटिया लड़ाकू विमान तो नहीं बेच दिया है। पाकिस्तानी एयरफोर्स की तरफ से हालांकि कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों ने कहा है, कि महकमें में अब इस फाइटर जेट की क्वालिटी को लेकर गंभीर सवाल उठ गये हैं।

पाकिस्तानी मीडिया और एयरफोर्स ने इस घटना को लेकर अभी तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों ने हादसे की पुष्टि कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जून को JF-17 फाइटर जेट में इजेक्शन सीट के निर्माता मार्टिन-बेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स एक्स पर एक पोस्ट में हादसे की पुष्टि कर दी है।
मार्टिन बेकर पोस्ट में लिखा, कि "बुधवार 5 जून को पाकिस्तान वायु सेना का JF-17 ब्लॉक 2 विमान झांग जिले के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मार्टिन बेकर PK16LE सीट का उपयोग करके पायलट ने सफलतापूर्वक इजेक्ट किया।" यानि, मार्टिन बेकर के मुताबिक, हादसे में पाकिस्तान के पायलट की जान बच गई है। लेकिन, एयरफोर्स के अधिकारियों ने माथा पकड़ा हुआ है, क्योंकि अभी तक 5 जेएफ-17 फाइटर एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुके हैं।
JF-17 थंडर की क्वालिटी पर उठे सवाल
JF-17 लड़ाकू विमान, एक सिंगल इंजन वाला, हल्का, मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है, जिसे पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स और चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के इस फाइटर जेट का 58 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान में और 42% हिस्सा चीन में बना है।
JF-17 को पाकिस्तानी वायुसेना के बेड़े में फ्रांसीसी और चीनी तीसरी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के उत्तराधिकारी के रूप में माना गया था, जैसे कि A-5C, F-7P/PG, मिराज III और मिराज-5। आज की तारीख में, पाकिस्तान वायुसेना के पास सेवा में लगभग 150 जेएफ-17 हैं। हालांकि, स्पुतनिक इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि ज्यादातर विमान अभी भी ग्राउंडेड ही हैं।
फ्लाइट सेफ्टी फाउंडेशन के एविएशन सेफ्टी नेटवर्क द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, पिछले 13 सालों में ये पांचवी बार है, जब JF-17 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। दूसरी तरफ, जेएफ-17 के भारतीय समकक्ष, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस को लगभग आठ साल की सेवा में सिर्फ एक दुर्घटना का सामना करना पड़ा है।
JF-17 की क्वालिटी कितनी ज्यादा खराब है?
इंजन की मेंटिनेंस में दिक्कत- JF-17 लड़ाकू विमान में चीन में बने RD-93 इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी काफी खराब क्वालिटी है और पाकिस्तानी वायुसेना को लगातार ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 2023 में SP's एविएशन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, 40 JF-17 ब्लॉक 1 और 2 लड़ाकू विमानों को उड़ान भरने से रोक दिया गया है, और उन्हें उड़ान भरने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
गाइड वैन, एग्जॉस्ट नोजल और फ्लेम स्टेबलाइजर्स में काफी संख्या में इंजनों में दरारें आ गई थीं। यहां तक कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स (PLAAF) ने भी इसे कई मोर्चों पर कमज़ोर पाया और इसे अपने बेड़े में शामिल नहीं किया।
2021 में भारत के एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (सेवानिवृत्त) ने घटिया JF-17 इंजन के बारे में बात करते हुए कहा था, भारत LCA तेजस में पाकिस्तानी जेट की तुलना में कहीं ज्यादा विश्वसनीय इंजन इस्तेमाल कर रहा है। इस प्रकार, पाकिस्तानी एयरफोर्स और चाइना नेशनल एयरो-टेक्नोलॉजी इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (CATIC) मॉस्को से सीधे सोर्स करके चीनी RD-93 इंजन को प्रतिस्थापित करना चाहते हैं। हालांकि, यह बदलाव उतना आसान नहीं है जितना लगता है।
JF-17 थंडर में RD-93 इंजन का उपयोग किया गया है, जिसे आधिकारिक तौर पर रूसी इंजन निर्माता क्लिमोव ने बनाया है। एक निश्चित संख्या में उड़ान घंटों के बाद, विमान के इंजन को मूल उपकरण निर्माता (OEM) द्वारा नियमित रूप से बदला जाना चाहिए। लेकिन, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे पाकिस्तान अपने इस फाइटर की मरम्मत नहीं करना पा रहा है।
विमान की टेक्नोलॉजी में भी कई समस्याएं
इंडियन एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन डीके पांडे के मुताबिक, JF-17 वायु रक्षा भूमिकाओं के लिए अविश्वसनीय है। इसके स्वदेशी रूप से विकसित लिंक-17 डेटा लिंक में पर्याप्त डेटा ट्रांसफर दर नहीं है। इस लड़ाकू विमान की इंटरऑपरेबिलिटी सीमित है, क्योंकि इसे पाकिस्तानी F-16 के लिंक-16 के साथ एकीकृत नहीं किया जा सकता है।
इसके अलावा, जेट में प्रभावी बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) या एयरबोर्न इंटरसेप्शन रडार नहीं है। 27 फरवरी 2019 को ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट के दौरान भारतीय पायलट ने जब आकाश को जैम कर दिया था, तो जेएफ-17 को लौटना पड़ा था। और पाकिस्तान के सभी रेंज एक्सटेंशन किट (आरईके) बम किसी भी महत्वपूर्ण लक्ष्य को हिट करने में नाकाम रहे हैं।
इस प्रकार, जेएफ-17 में गंभीर खामियां हैं, जैसे कम सहनशक्ति, खराब सटीकता, अविश्वसनीय हवाई अवरोधन रडार, कम पेलोड वहन क्षमता, रखरखाव की समस्याएं, विमान के मुख्य कंप्यूटरों की कम विश्वसनीयता और इसके कई मॉड्यूलों का बार बार नामा होगा।
जेएफ-17 की खराब क्षमता
पाकिस्तान को अपने JF-17 के लिए कई ग्राहक मिल गए हैं, जो नाइजीरिया और म्यांमार जैसे देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। इसके अलावा, कथित तौर पर अज़रबैजान और इराक के साथ सौदे अंतिम रूप से तय हो गए हैं।
एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के बयान के मुताबिक, "JF-17 को अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों और वैश्विक बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। यह बयान साफ़ तौर पर दिखाता है, कि ये लड़ाकू विमान घरेलू बाज़ारों के लिए नहीं, बल्कि उन देशों के लिए थे, जिन्हें कम लागत वाले, मल्टी-रोल, हल्के, सिगल इंजन वाले लड़ाकू विमान की जरूरत थी।"
इरावदी टाइम्स मुताबिक, म्यांमार, पाकिस्तान के बाद JF-17 खरीदने वाला पहला देश है, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उसने अपने बेड़े से इस ग्राउंडे कर दिया। विश्लेषकों और म्यांमार वायु सेना के पूर्व पायलटों ने समाचार आउटलेट को बताया है, कि विमानों में विमान में कई तरह की दिक्कत में है।

कई देशों ने खरीदे हैं JF-17
उन्होंने आगे कहा, कि JF-17 एवियोनिक्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन निर्मित KLJ-7 AI रडार है, जिसकी सटीकता खराब है और रखरखाव को लेकर कई मुद्दे हैं। विमान में घातक BVR मिसाइल और हवाई इंटरसेप्टर रडार की कमी है। इसके अलावा, हथियार मिशन प्रबंधन कंप्यूटर की खराबी के कारण युद्ध अभ्यास के दौरान BVR हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लॉन्च जोन सिकुड़ गए हैं।
म्यांमार वायु सेना के एक पूर्व पायलट के मुताबिक, "इसके अलावा, जब विमान मजबूत गुरुत्वाकर्षण बलों का सामना करता है, तो एयरफ्रेम को नुकसान होने का खतरा होता है, खासकर इसके विंगटिप्स और हार्डपॉइंट्स में कई दिक्कत हैं।"
म्यांमार ने 2016 में चीन के साथ 16 JF-17 विमानों के लिए 25 मिलियन डॉलर की अनुमानित लागत पर सौदा किया था। जबकि, पहले छह विमानों की डिलीवरी 2018 में हुई थी, बाकी 10 विमानों की स्थिति अभी भी साफ नहीं है। पहले चार जेट विमानों को दिसंबर 2018 में और बाकी 2 को दिसंबर 2019 में म्यांमार वायु सेना में शामिल किया गया था।
नाइजीरिया 2016 में चीन-पाक फाइटर जेट का दूसरा ग्राहक बना था, जिसने तीन इकाइयों का ऑर्डर दिया था। 2021 में नाइजीरियाई वायु सेना में शामिल होने के बाद से, इसे मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया में बोको हराम और इस्लामिक स्टेट से जुड़े लोगों के खिलाफ आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों में तैनात किया गया है। जबकि एक नए ऑर्डर की उम्मीदें काफी अधिक थीं, नाइजीरियाई वायु सेना ने 24 M-346FA विमानों की खरीद के लिए इतालवी फर्म लियोनार्डो के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो 4 बैचों में आने वाले हैं, जिनमें से पहला इस साल के अंत में आएगा।
भारतीय एक्सपर्ट की क्या है राय?
यूरेशियन टाइम्स से बात करते हुए वरिष्ठ भारतीय रक्षा विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा, जो नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज के वरिष्ठ फेलो हैं, उन्होंने कई मौकों पर JF-17 की प्रशंसा की है। लोकप्रिय यूट्यूब चैनल 'द जयपुर डायलॉग्स' पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि JF-17 ब्लॉक 1 भी तेजस MK 3 से बेहतर होगा।
इसके अलावा, 'अभिनव प्रकाश' नामक एक अन्य लोकप्रिय यूट्यूब चैनल पर उन्होंने कहा, कि JF-17 की कम लागत ने पाकिस्तानी एयरफोर्स को यह विश्वास दिलाया है, कि वे बड़ी संख्या में विमानों को युद्ध के मैदान में उतार पाएंगे और वो राफेल को काउंटर करने की क्षमता हासिल कर पाएंगे। लेकिन, राफेल के सामने पाकिस्तान का ये फाइटर जेट काफी कमजोर है और इंजन बदले बगैर इसकी मारक क्षमता बढ़ाना अब मुमकिन नहीं है।












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