UN में पाकिस्तान ने फिर उठाया कश्मीर मसला, कहा- 1948 रिजॉल्यूशन पर समीक्षा हो
न्यूयॉर्क। हर साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर का मुद्दा उठाना पाकिस्तान की फितरत में है, मंगलवार को पाक यूएन में पाक प्रतिनिधि ने अपने रिजॉल्यूशन में 'सेलेक्टिव इम्प्लीमेंटेशन' का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए पाकिस्तान के कहा कि परिषद की साख को सेलेक्टिव इम्प्लीमेंटेशन की वजह से जितना नुकसान हुआ है, उतना किसी और चीज से नहीं। बता दें कि इस साल पाकिस्तान में आम चुनाव है, इसलिए इस्लामाबाद से लेकर यूएन तक कश्मीर कार्ड खेलने की पूरी कोशिश में है।

यूएन में पाकिस्तान की प्रतिनिधिन ने कहा, 'परिषद को जम्मू-कश्मीर विवाद को लेकर समय-समय पर रिजॉल्यूशन के इम्प्लिमेंटेशन की समीक्षा करनी चाहिए।' लोधी ने आगे कहा कि परिषद अगर अपना रिजॉल्यूशन को लागू करने में नाकाम रहता है, तो इससे ना सिर्फ दुनिया के लिए बल्कि यूएन पर भी इसका असर पड़ेगा।
मलिहा लोधी यूएन में 1948 रिजॉल्यूशन की बात कर रही थी, जिसमें कश्मीर मसले को सुलझाने के लिए जनमत संग्रह की बात की गई है। साथ ही लोधी ने भारत से पाकिस्तानी आदिवासियों को भी रिहा करने के लिए कहा है, राज्य में घुस गए थे। हालांकि, भारत का कहना है कि वे पाकिस्तानी सैनिक थे, जो कश्मीर को हड़पना चाहते थे।
भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों को वापस भेजने का इनकार करते हुए कहा कि जिस तरह से जम्मू कश्मीर के लोगों ने राज्य चुनाव में भाग लिया है, उससे दिखता है कि उन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल किया है।
वहीं, 1972 में शिमला समझौता के तहत भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान पीएम जुल्फिकार अली भट्टो के बीच यह तय हुआ था कि कश्मीर मसला दोनों देश आपस में सुलझाएंगे और कोई तीसरी पार्टी दखल नहीं देगी। बता दें कि परिषद ने 2010 में कश्मीर को अपने अनसुलझे अंतरराष्ट्रीय विवादों की सूची से हटा दिया था।












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