इजराइल की निंदा, बलूच अत्याचार पर चुप्पी क्यों..? कौन हैं महरंग बलूच, जो इस्लामाबाद में दे रहीं सेना को चुनौती

Baloch Revolution in Pakistan: पाकिस्तान में बलूचिस्तान से गायब किए गये लोगों को लेकर अब आंदोलन ब़ता जा रहा है और हजारों की संख्या में बलूचिस्तान के लोगों ने राजधानी इस्लामाबाद में डेरा डाल दिया है और गायब किए गये लोगों को सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

बलूचिस्तान के हजारों ऐसे युवा हैं, जिन्हें पाकिस्तान की सेना ने सालों पहले गिरफ्तार किया था और उसके बाद से उनका कोई ठिकाना नहीं है। माना जा रहा है, हजारों लोगों को पाकिस्तान की सेना मारकर फेंक चुकी है।

Baloch Revolution in Pakistan

लेकिन, बलूचों का गुस्सा अब फूट पड़ा है और बलूच महिलाओं ने पाकिस्तानी अवाम से पूछना शुरू कर दिया है, कि इजराइल के खिलाफ तो लोगों में बहुत गुस्सा है, लेकिन बलूचों को लेकर पाकिस्तान के लोग सवाल क्यों नहीं पूछ रहे हैं।

पिछले हफ्ते इसी आंदोलन में शामिल करीब 200 महिला प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश करते ही गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदर्शनकारी बलूचिस्तान प्रांत में पुरुषों को कथित तौर पर जबरन गायब करने के खिलाफ कई हफ्तों से देश भर में मार्च कर रहे हैं।

गिरफ्तार किए गए लोगों में प्रदर्शनकारियों के नेता महरंग बलूच भी शामिल थीं।

महरंग बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'इस्लामाबाद पुलिस द्वारा हमला किया जा रहा है।'

महरंग बलूच, पाकिस्तान की सेना से काफी तीखे सवाल पूछ रही हैं और उनके सवालों के जवाब पाकिस्तानी सेना के पास नहीं है। महरंग बलूच के सवाल सोशल मीडिया पर गूंज रहे हैं और पाकिस्तान के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ साथ पाकिस्तानी पत्रकारों का समर्थन उन्हें मिल रहा है।

प्रसिद्ध पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने भी बलूचों के आंदोलन का समर्थन किया है और उन्होंने कहा है, कि पाकिस्तान की सेना ने जबरदस्ती बलूच चुवाओं को गायब करवाया है।

हामिद मीर ने तो यहां तक कहा, कि "पाकिस्तान की सेना की बर्बरता की वजह से पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में विद्रोह शुरू हुआ था, लेकिन सेना अभी भी सबक नहीं सिखी है। बलूचिस्तान में भी सेना ने वही किया है, जो पूर्वी पाकिस्तान में 1971 से पहले किया गया था।"

कौन हैं महरंग बलूच?

महरंग बलूच पाकिस्तान के बलूचिस्तान की रहने वालीं एक बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। वह बलूचिस्तान में अधिकारियों द्वारा गैरकानूनी तरीके से गायब किए जाने और न्यायेतर हत्या जैसे उत्पीड़न के खिलाफ लड़ रही हैं।

महरंग बलूच का जन्म एक बलूच मुस्लिम परिवार में हुआ था और उनकी 5 बहनें और 1 भाई हैं। उनका परिवार कलात, बलूचिस्तान से है। महरंग पेशे से डॉक्टर हैं और उनके पिता अब्दुल गफ्फार बलूच एक मजदूर और राजनीतिक कार्यकर्ता थे।

महरंग के पिता को 2009 में पाकिस्तान के अधिकारियों ने जबरन अपहरण कर लिया था, जब वह कराची में अस्पताल जा रहे थे। महरंग उस समय केवल 16 वर्ष की थीं। अपने पिता के अपहरण के खिलाफ महरंग ने आवाज उठाना शुरू किया और फिर उनके आवाज को स्कूलों और कॉलेजों से समर्थन मिलना शुरू हो गया।

धीरे-धीरे महरंग बलूच, बलूच आंदोलन की प्रमुख तस्वीर बन गईं।

महरंग के पिता का शव 2011 में सुनसान इलाके में पाया गया था। उनके शरीर पर टॉर्चर के निशान थे।

इसके बाद महरंग के इकलौते भाई का 2017 में अपहरण कर लिया गया था और उसे तीन महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था। तब से वह बलूच प्रतिरोध आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति रही हैं।

Baloch Revolution in Pakistan

क्या है बलूचिस्तान आंदोलन?

1947 से पहले बलूचिस्तान एक स्वतंत्र क्षेत्र था, लेकिन भारत से अलग होने के बाद पाकिस्तान ने 1947 में बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया और इसकी स्वतंत्रता को छीन लिया। इसके बाद से ही बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन शुरू हो गया।

अभी तक हजारों बलूच कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की सेना मार चुकी हैं और सैकड़ों बलूच कार्यकर्तांओं को पाकिस्तान से भागना पड़ा।

वर्तमान में, बलूचिस्तान में पाकिस्तान की दमनकारी रणनीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए बलूच के लोग इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। इस आंदोलन में सबसे आगे महरंग बलूच हैं, जो अपने पिता अब्दुल गफ़र बलूच की विरासत को आगे बढ़ाने वाली एक साहसी नेता हैं।

पाकिस्तानी सेना की खुफिया सेना इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने हजारों बलूच युवाओं को काउंटर टेरेरिज्म के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया और उन्हें मार डाला।

हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी इसमें शामिल होने से इनकार करते रहे हैं, लेकिन इस हत्या ने बलूचिस्तान में लगातार होने वाली गैर-न्यायिक हत्याओं और हिरासतों के बारे में चर्चा फिर से शुरू कर दी है।

इस बार प्रदर्शनकारी 1,600 किमी से ज्यादा की दूरी तय करके पाकिस्तान की राजधानी पहुंचे हैं। हालांकि, पुलिस ने उन्हें इस्लामाबाद प्रेस क्लब तक पहुँचने से रोकने के लिए शहर के सभी प्रवेश बिंदुओं को बंद कर दिया है, जहां उन्होंने प्रदर्शन की योजना बनाई थी। अधिकारियों ने उनके शिविरों और प्रेस क्लब के बाहर उनके द्वारा लगाए गए लाउडस्पीकरों को भी नष्ट कर दिया।

वहीं, करीब डेढ़ सौ बलूच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पिछले दो दिनों से जेल में रखा गया था, लेकिन इस्लामाबाद कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें रिहा किया गया है।

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