पाकिस्तान: सरकार ने पहले वापस ली मंदिर की जमीन, फिर हुआ कुछ ऐसा कि चंद घंटे में पलटा आदेश
इस्लामाबाद, 9 नवंबर: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है। बीते कई साल से इस्लामाबाद के एच-9 में कृष्ण मंदिर और श्मशान घाट बनाने को लेकर कई तबकों में तनातनी देखने को मिली है। राजधानी विकास प्राधिकरण (सीडीए) ने यहां मंदिर निर्माण की इजाजत वापस ले ली थी लेकिन आम लोगों की ओर से इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया गया। जिसके बाद सीडीए ने शहर में प्रस्तावित कृष्ण मंदिर और श्मशान पर रोक का नोटिफिकेशन वापस ले लिया।

इजाजत वापस लेनी पर हुई आलोचना
पाकिस्तान सरकार की ओर से हिंदुओं को इस्लामाबाद के एच-9 में मंदिर बनाने के लिए आवंटित किए गए प्लॉट को रद्द करने के बाद सीडीए आम लोगों के निशाने पर आ गया। सोमवार को सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना हुई ही, कई संगठनों ने भी इसको लेकर बयान भी जारी किए। जिसके बाद सीडीए ने कुछ घंटे में ही अपना फैसला पलट दिया। सीडीए ने सोमवार को अपनी वो अधिसूचना वापस ले ली जिसके तहत भूखंड रद्द कर दिया गया था।

हाईकोर्ट में दी गई जानकारी ये चला पता
इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सीडीए के वकील जावेद इकबाल ने अदालत को बताया कि सीडीए ने इस साल फरवरी में हिंदू समुदाय के इस पर निर्माण शुरू करने से पहले ही भूखंड का आवंटन रद्द कर दिया था। इसकी जानकारी मीडिया में आने के बाद सोशल मीडिया पर सीडीए के इस कदम की कड़ी आलोचना हुई। जिसने सीडीए को अधिसूचना वापस लेने और कुछ घंटों के भीतर भूखंड को बहाल करने के लिए मजबूर किया।

सीडीए ने कहा- गलत फैसला ले लिया था
सीडीए के प्रवक्ता सैयद आसिफ रजा ने कहा क मंत्रिमंडल के एक फैसले के आलोक में विभिन्न कार्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों को आवंटित सभी भूमि का आवंटन रद्द कर दिया गया था, जिन पर कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया था। जिसमें सीडीए अधिकारियों ने कैबिनेट के फैसले की गलत व्याख्या की और हिंदू समुदाय को आवंटित भूखंड को रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए आवंटित भूमि पर चारदीवारी के निर्माण के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है, इसलिए कैबिनेट का निर्णय उस पर लागू नहीं होता है।

नवाज शरीफ की सरकार ने दी थी जमीन
पाकिस्तान सरकार ने नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते हुए 2016 में मंदिर निर्माण के लिए इस्लामाबाद के चार मरला एच-9/2 पर में जमीन दी थी। इस जमीन पर हिंदू समुदाय को कृष्ण मंदिर, श्मशान और सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए आवंटित किया गया था। हालांकि इसमें ज्यादा काम नहीं हो सका। मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही कुछ धार्मिक संस्थाओं ने इस पर विरोध जताना शुरू कर दिया था। ये मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।












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