पाकिस्तान में आधी रात नेशनल असेंबली भंग, शहबाज शरीफ की पार्टी ने बताया सबसे खराब 5 साल
Pakistan News: प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के नोट भेजे जाने के तुरंत बाद राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी ने नेशनल असेंबली को समय से पहले भंग करने की सहमति दे दी है। इसके साथ ही, पाकिस्तान में देर रात संसद को भंग कर दिया गया है, लेकिन अब सस्पेंस इस बात को लेकर है, कि क्या तय समय पर चुनाव हो पाएंगे, या सरकार चुनाव को टालती रहेगी।
बुधवार देर रात एक्स, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, उसपर पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, कि "राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 58-1 के तहत प्रधान मंत्री की सलाह पर नेशनल असेंबली को भंग कर दिया।" इमरान खान के चुनाव लड़ने पर पांच साल का प्रतिबंध लगाने के बाद शहबाज सरकार ने नेशनल असेंबली को भंग करने का फाइल आगे बढ़ाया है।

पाकिस्तान में नेशनल असेंबली भंग
संसद के निचले सदन के विघटन के साथ, संघीय कैबिनेट भी भंग हो गई।
इससे पहले एक बयान में, संघीय संसदीय मामलों के मंत्री मुर्तजा जावेद अब्बासी ने डेवलमेंट की पुष्टि करते हुए कहा, कि निर्वाचित सरकार ने अपना 5 साल का संवैधानिक कार्यकाल पूरा कर लिया है।
मंत्री ने कहा, "संसदीय कार्य मंत्रालय ने सरकार के विघटन का सारांश प्रधानमंत्री को भेज दिया है।"
सारांश में, संघीय मंत्री ने कहा, कि प्रधानमंत्री से संविधान के अनुच्छेद 224 के तहत अंतरिम सरकार के गठन के लिए भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्रालय सारांश की मंजूरी और कार्यवाहक सरकार के गठन पर एक अधिसूचना जारी करेगा।
कार्यवाहक सरकार का होगा गठन
नेशनल असेंबली के भंग होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 224-ए के तहत कार्यवाहक प्रधान मंत्री की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। पीएम शहबाज और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता, राजा रियाज से अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम को अंतिम रूप देने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।
अगर तीन दिन के अंदर नाम पर सहमति नहीं बनी, तो मामला कार्यवाहक पीएम की नियुक्ति के लिए संसदीय समिति के पास जाएगा।
कानून के तहत, प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता केयरटेकर प्रधानमंत्री पद के लिए अपने-अपने नाम संसदीय समिति को भेजेंगे।
संसदीय समिति को तीन दिनों के भीतर कार्यवाहक प्रधान मंत्री के नाम को अंतिम रूप देना होगा या यदि वह भी नाम पर आम सहमति तक पहुंचने में विफल रही, तो पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) दो दिनों के भीतर विपक्ष और सरकार द्वारा प्रस्तावित नामों में से कार्यवाहक प्रधान मंत्री का चयन करेगा।
शहबाज सरकार ने चूंकी सयम से 3 दिन पहले नेशनल असेंबली को भंग कर दिया है, लिहाजा अब पाकिस्तान चुनाव आयोग के पास 90 दिनों के भीतर चुनाव करवाने की बाध्यता होगी। लेकिन, अगर 3 दिनों के बाद संसद को भंग किया जाता, तो चुनाव करवाने के लिए 60 दिन मिलते। यानि, शहबाज सरकार चुनाव को लेकर अभी से ही चतुराई दिखा रही है।
तय समय के मुताबिक, अक्टूबर में पाकिस्तान में चुनाव हो जाने चाहिए थे, लेकिन पाकिस्तान के निर्वतमान रक्षा मंत्री आसिफ ख्वाजा ने साफ कर दिया है, कि अब चुनाव मार्च महीने में होने की उम्मीद है।
सबसे खराब 5 सालों का कार्यकाल
वहीं, शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के नेता, शाहिद खाकन अब्बासी ने बुधवार को पीटीआई और पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान नेशनल असेंबली के पांच साल के कार्यकाल को "पाकिस्तान के इतिहास में सबसे खराब" कार्यकाल करार दिया है।
संसद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, कि "इस सदन का प्रदर्शन बहुत निराशाजनक रहा है।"
पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा, कि "सदन द्वारा पारित विधेयकों को कई बार नहीं पढ़ा जाता" और अब राजनीति में मौखिक दुर्व्यवहार का उपयोग व्यापक हो गया है।
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, उन्होंने न तो संसद को समझा है और न ही संसदीय मानदंडों को, न ही उन्होंने लोकतंत्र को और न ही लोकतांत्रिक मानदंडों को समझा है।" उन्होंने कहा कि देश अब इस नेशनल असेंबली से "छुटकारा" पा रहा है।












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