पाकिस्तान के पास बचे सिर्फ 3.7 अरब डॉलर, डिफॉल्ट होने की आई तारीख, जिन्ना के देश को कौन बचाएगा?
पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट में फंसा हुआ है और शहबाज सरकार अब उस नये देश की तलाश में है, जिससे वो कर्ज मांग सके। सऊदी और यूएई इसी महीने आर्थिक मदद देने का ऐलान कर चुके हैं।

Pakistan Crisis: पाकिस्तान का आर्थिक संकट और गहराता जा रहा है और अगर जल्द से जल्द पाकिस्तान को मदद नहीं भेजी गई, तो जिन्ना का देश डिफॉल्ट कर जाएगा। पाकिस्तान के स्टेट बैंक ने कहा है, कि देश का मुद्रा भंडार अब घटकर सिर्फ 3.7 अरब डॉलर ही रह गया है और वो (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) आईएमएफ से बातचीत करने के प्रयास कर रहा है, ताकि बेलऑउट पैकेज हासिल कर डिफॉल्ट होने से बच सके। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है, कि 20 जनवरी तक बाहरी कर्ज भुगतना की वजह से देश का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर सिर्फ 3.7 अरब डॉलर तक रह गया है, जो पाकिस्तान को एक महीने से भी कम आयात कवर प्रदान करता है।

डिफॉल्ट होने का खतरा बढ़ा
पाकिस्तान का संकट इसलिए भी अब खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, क्योंकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस महीने की शुरूआत में ही उसकी मदद कर चुके हैं और पाकिस्तानी बैंक में अपने जमा पैसे नहीं निकालने पर सहमत हो गये थे, लिहाजा अब पाकिस्तान के पास कुछ ऑप्शन बचे नहीं हैं। जियो न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि मित्र देशों के आश्वासन के बाद भी पाकिस्तान में डॉलर की आमद रूक गई है, और जो ऋणदाता हैं, वो पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिले मिला, नया कर्ज देने के मूड में नहीं हैं। यानि, आईएमएफ अगर पाकिस्तान को बेलऑउट पैकेज देने के लिए तैयार हो जाता है, उसके बाद ही ऋणदाता देश, जिसमें चीन भी शामिल है, उससे पाकिस्तान को कर्ज मिलेगा।

पाकिस्तान की कितनी मुश्किल स्थिति?
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने चेतावनी दी है, कि इंटरनेशनल मॉनिट्री फंड (आईएमएफ) से पाकिस्तान सरकार का ऋण प्रोग्राम कामयाब नहीं हो पाया है, लिहाजा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के ऊपर पतन का खतरा आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रोलिंग ब्लैकआउट और विदेशी मुद्रा की भारी कमी व्यवसायों के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल बना रही है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि आयात से भरे शिपिंग कंटेनर बंदरगाहों पर जमा हो रहे हैं, क्योंकि खरीदारों के पास डॉलर नहीं हैं, कि वो सामान खरीद सकें।

विदेशी एयरलाइंस हो सकती हैं बंद
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि "एयरलाइंस और विदेशी कंपनियों के यूनियन्स ने चेतावनी दी है, कि घटते विदेशी भंडार की वजह से सरकार ने डॉलर में भुगतान पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसकी वजह से उन्हें पाकिस्तान के अंदर अपना संचालन बंद करना पड़ सकता है"। वहीं, जियो न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि बिजली संकट की वजह से कपड़ा निर्माता कंपनियां बंद हो रहे हैं या फिर कंपनियों में अब कुछ ही घंटे काम होते हैं। सोमवार को 12 घंटे से अधिक समय तक चलने वाले देशव्यापी ब्लैकआउट से मुश्किलें और बढ़ गईं।" रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान में खाने-पीने की वस्तुएं, कपड़े, दवाओं के साथ साथ हर चीज की कीमत आसमान में पहुंच गई हैं।

डिफॉल्ट होने की तारीख क्या होगी?
मैक्रो इकोनॉमिक इनसाइट्स के संस्थापक साकिब शेरानी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा, कि "पहले से ही बहुत सारे उद्योग बंद हो गए हैं, और यदि वे उद्योग जल्द ही फिर से शुरू नहीं होते हैं, तो कुछ नुकसान स्थायी होंगे।" फाइनेंशियल टाइम्स ने विश्लेषकों का हवाला देते हुए बताया है, कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति "अस्थिर" हो रही है, और अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो शायद देश में श्रीलंका जैसी स्थिति बन सकती है। अखबार ने यह भी चेतावनी दी है, कि यदि "स्थिति बनी रहती है" तो मई में देश डिफ़ॉल्ट हो सकता है। अखबार ने लिखा है, कि "हर दिन अब मायने रखता है"। वहीं, विश्व बैंक के पूर्व सलाहकार आबिद हसन ने कहा है, कि "यह स्पष्ट नहीं है, कि आगे रास्ता क्या है।" उन्होंने कहा, कि "भले ही उन्हें रोल ओवर करने के लिए एक अरब डॉलर मिले या दो अरब डॉलर मिले, लेकिन चीजें इतनी खराब हैं, कि यह केवल बैंड-एड की तरह होगी।" पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने एफटी को बताया, कि डॉलर के संरक्षण के प्रयास में देश ने आयात में "भारी" कमी कर दी है।
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पाकिस्तान में दंगे होने की आशंका
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने कहा, कि "अगर हम आईएमएफ की शर्तों का पालन करते हैं, जैसा कि वे चाहते हैं, तो सड़कों पर दंगे होंगे।" उन्होंने कहा, कि "हमें एक लचीले कार्यक्रम की आवश्यकता है ... अर्थव्यवस्था और समाज आईएमएफ कार्यक्रम के झटके या लागत को सहन नहीं कर सकते हैं।" वहीं, आईएमएफ साफ तौर पर कह चुका है, कि पहले पाकिस्तान उसकी शर्तों को माने, उसके बाद ही उसके अधिकारी पाकिस्तान का दौरा करेंगे। हालांकि, शहबाज सरकार मौखिक तौर पर तो कह चुकी है, कि वो आईएमएफ के सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार है, लेकिन आधिकारिक तौर पर उन्हें लागू करने से सरकार बुरी तरह डरी हुई है और यही वजह है, कि आईएमएफ के अधिकारी पाकिस्तान नहीं आ रहे हैं।












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