भारत संग कारोबार शुरू करने पर गंभीर शहबाज सरकार, व्यापारियों का दबाव या अक्ल आई ठिकाने?
Pakistan On Trade with India: आर्थिक उथल-पुथल के बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है, कि अगस्त 2019 में कारोबारी संबंध को निलंबत करने के बाद उनका देश भारत से कारोबार फिर से शुरू करने को लेकर 'गंभीरता' से विचार करेगा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री का भारत से कारोबार फिर से बहाल करने को लेकर नये बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या पाकिस्तान कारोबारियों के प्रेशर में आकर भारत से फिर से कारोबार शुरू करने की बात कर रहा है, या फिर जिन्ना के 'वंशजों' की अक्ल ठिकाने पर आ गई है?

भारत के साथ फिर कारोबार करेगा पाकिस्तान?
जियो न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, कि ब्रुसेल्स में परमाणु ऊर्जा शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद विदेश मंत्री इशाक डार ने लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये टिप्पणी की है। उन्होंने भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के व्यापारिक समुदाय की तरफ से दिए जा रहे प्रेशर का भी जिक्र किया है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा, कि "पाकिस्तानी कारोबारी चाहते हैं, कि भारत के साथ व्यापार फिर से शुरू हो।"
पाकिस्तान के नेताओं ने अपनी जनता के मन में भारत को लेकर इस स्तर तक नफरत भर रखी है, कि उनके लिए चाहकर भी भारत से व्यापार करना आसान नहीं होता है। क्योंकि, अगर कोई सरकार भारत से कारोबार शुरू करना चाहती है, तो उसे अपना वोट बैंक खोने का डर सताने लगता है।
पाकिस्तान का कूटनीतिक बदलाव?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, कि "पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार संबंध बहाल करने पर विचार करेगा।" वहीं, एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने डार के हवाले से कहा है, कि "हम भारत के साथ व्यापार के मामलों को गंभीरता से देखेंगे।" उनकी टिप्पणियों ने भारत के प्रति राजनयिक रुख में संभावित बदलाव का संकेत दिया है।
भारत सरकार की तरफ से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद पाकिस्तान ने नई दिल्ली के साथ अपने राजनयिक संबंधों को कम कर दिया था। इस्लामाबाद ने हमेशा से कहा है, कि इस फैसले ने पड़ोसियों के बीच बातचीत के माहौल को कमजोर कर दिया है।
पाकिस्तान इस बात पर जोर देता रहा है, कि संबंधों को सुधारने की जिम्मेदारी भारत पर है और वह उससे बातचीत शुरू करने की पूर्व शर्त के तौर पर कश्मीर में अपने "एकतरफा" कदमों को वापस लेने का आग्रह कर रहा है। लेकिन, भारत ने पाकिस्तान की शर्तों पर अब ध्यान देना भी बंद कर दिया है।
पाकिस्तान से कारोबार शुरू करने पर भारत का क्या है रूख?
भारत ने पाकिस्तान को साफ कर दिया है, कि जम्मू-कश्मीर को लेकर उसका फैसला अटल है और कश्मीर में फिर से अनुच्छेद 370 बहाली का कोई सवाल ही नहीं उठता है। नई दिल्ली ने यह भी कहा है, कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में सामाजिक-आर्थिक विकास और सुशासन सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार की तरफ से जो कदम उठाए गए हैं, वो संवैधानिक उपाय भारत का आंतरिक मामला है।
इसके अलावा, भारत ने बार बार साफ किया है, भारत तभी बात करेगा, जब पाकिस्तान पूरी तरह से आतंकवाद पर लगाम लगाएगा। भारत का जोर इस बात पर है, कि बातचीत के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है।
हालांकि, खराब संबंधों के बावजूद, दोनों देश फरवरी 2021 में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 2003 के युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने पर राजी हो गये थे और उसके बाद से एलएसी पर करीब करीब शांति ही है। इसके अलावा, भारत सरकार ने ये भी कहा है, कि व्यापार सस्पेंड करने का फैसला पाकिस्तान ने लिया था और फिर से कारोबार शुरू करना है या नहीं, ये फैसला भी पाकिस्तान को ही लेना है।












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