पाकिस्तान के तीन प्रांतों में आटा खत्म, पंजाब ने गेहूं भेजने से किया इनकार, भूख से रो रही है जनता

पाकिस्तान से जो अलग अलग वीडियो सामने आ रहे हैं, उनमें लोगों को गेहूं और आटे के लिए लड़ते हुए देखा जा रहा है। वहीं, आटे की कीमत 150 रुपये से160 रुपये किलो को पार कर गया है।

Pakistan Flour Crisis

Pakistan Flour Crisis: पाकिस्तान के कई हिस्सों में भीषण अनाज संकट पैदा हो गया है, जिससे देश में विकराल स्थिति उत्पन्न हो गई है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से जो वीडियो सामने आ रहे हैं, उसमें गेहूं और आटे के लिए लोगों को कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोते हुए देखा जा सकता है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खैबर पंहुतुनख्वा, सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के कई इलाकों में गेहूं खत्म हो गया है, जिसकी वजह से पाकिस्तान अब तक के सबसे खराब आटे के संकट का सामना कर रहा है।

गेहूं के लिए पाकिस्तान में अराजकता

गेहूं के लिए पाकिस्तान में अराजकता

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हज़ारों लोग रोज़ाना सब्सिडी वाले आटे की थैलियों को प्राप्त करने में घंटों लाइनों में लगते हैं, जिनकी बाज़ार में आपूर्ति पहले से ही काफी कम हो चुकी है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा है, कि सरकारी राशन दुकानों के आगे सैकड़ों लोग लाइन में लग रहे हैं, जिसकी वजह से अराजकता फैल जाती है और लोगों में आटे के लिए लड़ाई होना काफी आम बात हो गई है। एक दिन पहले मची भगदड़ में कुचलने से एक मजदूर की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही आटे की बोरियां लाने वाले ट्रकों की सुरक्षा के लिए कई पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, लेकिन देखते ही देखते लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है। आटा कारोबारियों और तंदूरों के बीच कई बार झड़पें हुई हैं।

आटे की कीमत में भारी इजाफा

आटे की कीमत में भारी इजाफा

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि, पाकिस्तान में जारी संकट के बीच गेहूं और आटे की कीमतें आसमान छू रही हैं। कराची में आटा 140 रुपये प्रति किलोग्राम से 160 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। वहीं, राजधानी इस्लामाबाद और पेशावर में 10 किलो के आटे का बैग 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है, जबकि 20 किलोग्राम के आटे का बैग 2,800 रुपये में बेचा जा रहा है। पंजाब प्रांत में मिल मालिकों ने आटे की कीमत 160 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी है। बलूचिस्तान के खाद्य मंत्री ज़मारक अचकजई ने कहा है, कि प्रांत में गेहूं का स्टॉक "पूरी तरह से समाप्त" हो गया है। उन्होंने कहा कि, बलूचिस्तान को तुरंत 400,000 बोरी गेहूं की जरूरत है और चेतावनी दी है, अगर ऐसा नहीं किया गया, तो संकट और गहरा सकता है। इसी तरह, खैबर पख्तूनख्वा अब तक के सबसे खराब आटे के संकट का सामना कर रहा है और वहां पर 20 किलोग्राम आटे का एक बैग 3100 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं, सरकार आटे की कीमत को नियंत्रित करने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो गई है।

सिंध में भी स्थिति काफी खराब

वहीं, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि, सिंध सरकार द्वारा लोगों को सब्सिडी वाले आटे की बिक्री के दौरान मीरपुरखास भगदड़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मौत आयुक्त कार्यालय के पास उस समय हुई, जब गुलिस्तान-ए-बलदिया पार्क के बाहर 200-200 बोरी लादे दो वाहन आटा बेच रहे थे। सिंध के अन्य हिस्सों में भी अराजकता के ऐसे ही दृश्य देखे गये हैं, जहां मिनी ट्रकों या वैन के माध्यम से आटा बेचा जा रहा है। शहीद बेनजीराबाद के सकरंद कस्बे में एक आटा चक्की के बाहर सरकारी दर पर आटा खरीदते समय भगदड़ मचने से दो महिलाएं और एक नाबालिग लड़की घायल हो गयी। द न्यूज इंटरनेशनल ने बताया कि स्थिति ने खैबर पख्तूनख्वा में लोगों को नाराज कर दिया है, क्योंकि तंदूरों ने भी रोटी की कीमत बढ़ा दी है। ब्रेड के अलावा बेकरी का सारा सामान ऊंचे दामों पर बिक रहा है।

घंटों तक आटे के लिए लाइन में लोग

घंटों तक आटे के लिए लाइन में लोग

द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों लोगों को सब्सिडी वाला आटा खरीदने के लिए हर दिन कई-कई घंटे लाइन में लगते हैं, जिनकी आपूर्ति पहले से ही कम है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सभी खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं और सरकारों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई उपाय नहीं किए हैं। कीमतों के मुद्दे पर पिछले हफ्तों में खैबर पख्तूनख्वा में आटा डीलरों और तंदूरों में कई झड़पें हुई हैं। कुछ दिन पहले, पिष्टखारा में एक राहगीर की मौत हो गई थी, जब दो स्थानीय लोग रोटी की कीमत को लेकर एक तंदूर मालिक से भिड़ गए थे और फिर उस पर गोलियां चला दी थीं। सब्सिडी वाले आटे के वितरण के दौरान कई अन्य घायल हो गए।

आटे की संकट की क्या है वजह?

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने खुलासा किया है, कि पाकिस्तान में गेहूं संकट के लिए केन्द्र सरकार और पंजाब सरकार के बीच का तनाव जिम्मेदार है। सूत्रों ने कहा कि, पंजाब खाद्य विभाग सही ढंग से अनुमान लगाने में असमर्थ था, कि कितना गेहूं आयात करने की जरूरत है। इस बीच, बलूचिस्तान के खाद्य मंत्री ज़मारक अचकजई ने खुलासा किया है, कि प्रांत में गेहूं का स्टॉक "पूरी तरह से समाप्त" हो गया गै। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा कि बलूचिस्तान में कमोडिटी संकट "गहरा" गया है। वहीं, सूत्र ये भी बताते हैं, कि पंजाब ने बलूचिस्तान को गेहूं भेजने से मना कर दिया है। बलूचिस्तान के खाद्य मंत्री ज़मारक अचकजई ने एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि, बलूचिस्तान को गेहूं का आवश्यक स्टॉक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि, पंजाब के मुख्यमंत्री परवेज इलाही ने पूरा स्टॉक भेजने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने वादा पूरा नहीं किया।

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    पंजाब ने आटा देने से किया मना

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    संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जमरक अचकजई ने कहा कि, बलूचिस्तान को गेहूं का जरूरी स्टॉक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान गेहूं के लिए 85 प्रतिशत पंजाब और सिंध पर निर्भर है, लेकिन दोनों ही प्रांतों ने इस जिंस के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने जमरक अचाकजई के हवाले से कहा कि, "2 लाख गेहूं की बोरियों में से सिर्फ 10 हजार गेहूं की बोरियां ही मिल पाई हैं।" उन्होंने कहा कि, "उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से 600,000 बोरी भेजने का अनुरोध किया था।"

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