IMF की 7 शर्तें, 10 अरब डॉलर और बेबस शहबाज शरीफ, पाकिस्तान आर्थिक संकट की Detail Story
पाकिस्तान नया लोन लेकर पुराना लोन की किश्तें चुकाता आया है, लेकिन अब पुराने लोन इतने ज्यादा हो चुके हैं, कि उन्हें चुकाना नामुमकिन सरीखा बन गया है। वहीं, चुनावी साल में सरकार के हाथ भी बंध गये हैं।

Pakistan Crisis News: भीषण आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान काफी तेजी से दिवालिया होने की तरफ बढ़ रहा है और इंटरनेशनल मॉनिट्री फंड पाकिस्तान को अपनी धुनों पर नचा रहा है। IMF ने पाकिस्तान पर किस तरह से नकेल कस रखी है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मे ट्वीट कर आईएमएफ अधिकारि के पाकिस्तान आने की जानकारी दी थी, लेकिन हफ्ता भर बीत जाने के बाद भी आईएमएफ के अधिकारी पाकिस्तान नहीं पहुंचे, बल्कि आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने साफ शब्दों में शर्त रख दी है, कि उसके अधिकारी पाकिस्तान सरकार से तभी बात करेंगे, जब उसकी सभी शर्तों को मान लिया जाएगा

IMF ने पाकिस्तान को नचाया
जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वर्चुअल बैठक शुरू करने से पहले पाकिस्तान के सामने बजट और अन्य क्षेत्रों के बारे में सरकार की तरफ से उठाए जान वाले कदमों को लेकर अतिरिक्त जानकारियां उपलब्ध करवाने को कहा है। वहीं, जियो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि अगर पाकिस्तान को डिफॉल्ट होने से बचना है, तो उसे फौरन 10 अरब डॉलर लोन की जरूरत है और अगर ये लोन नहीं मिलता है, तो पाकिस्तान डिफॉल्ट हो जाएगा। पाकिस्तान सरकार के एक बड़े अधिकारी ने जियो न्यूज को बताया है, कि "पाकिस्तान को बकाए ऋण को चुकाने और करेंट अकाउंट डेफिसिट को मैनेज करने के लिए 8 से 10 अरब डॉलर की जरूरत है और अगर आईएमएफ के साथ पाकिस्तान सरकार की कर्ज भुगतान को लेकर बात नहीं बनती है, तो पाकिस्तान अपने कर्ज की अदायगी नहीं कर पाएगा।"

शहबाज सरकार के सामने दिक्कतें
पाकिस्तान वित्त विभाग के एक अधिकारी ने जियो न्यूज को बताया, कि "आईएमएफ ने कुछ अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं और आईएमएफ को जवाब भेजने के लिए ही वो वित्त मंत्रालय में देर रात तक बैठे हैं।" वहीं, शहबाज शरीफ सरकार के लिए आईएमएफ की शर्तों को मानना काफी मुश्किल है, लेकिन शर्त नहीं मानने के अलावा कोई और विकल्प बचा भी नहीं है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ की सरकार आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए गैस की कीमत को बढ़ाने के लिए तैयार हो गई है और इसको लेकर जल्द ही कैबिनेट की बैठक होने वाली है। वहीं, सरकार के एक आधिकारिक और राजनियक सूत्र ने डॉन को बताया, कि चुनाव से पहले लोकप्रियता खोने के डर ने शहबाज सरकार के हाथ-पांव फुला दिए हैं और यही वजह है, कि शहबाज सरकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच समझौता नहीं हो पाया है। जबकि, आईएमएफ ने साफ कर दिया है, कि किसी भी तरह की बातचीत करने से पहले ही पाकिस्तान को उसकी शर्तों को मानना होगा।

IMF की शर्तों को पूरा करना मुश्किल
IMF ने शहबाज सरकार के सामने 7 कठिन शर्तों को रखा है और साफ कर दिया है, कि जब तक सरकार उन सात शर्तों को पूरा नहीं करती है, किसी भी तरह की कोई बातचीत नहीं की जाएगीा। आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार के सामने जिन शर्तों को रखा है, उनमें बिजली सब्सिडी को पूरी तरह से हटाना, गैस की कीमतों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कीमतों के मुताबिक करना, डॉलर को पूरी तरह से फ्री करना शामिल है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर आईएमएफ की शर्तों को लागू कर दिया जाता है, तो पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने से हाहाकार मच जाएगा।

पाकिस्तान के पास कितना वक्त बचा?
पाकिस्तान के पास डिफॉल्ट होने से बचने के लिए फरवरी महीने से लेकर जून महीने तक का वक्त बचा है और इस अवधि के दौरान पाकिस्तान को किसी भी हाल में 10 अरब डॉलर की व्यवस्था करनी ही होगी, अन्यथा हालात श्रीलंका से भी बदतर हो जाएंगे। लिहाजा, पाकिस्तान सरकार ने पिछले नवंबर से रुके हुए आईएमएफ कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने के लिए आईएमएफ को एसओएस (सेव आवर सोल) भेजा था। लेकिन, जवाब में आईएमएफ ने पाकिस्तान को सात कठिन शर्तों की लिस्ट भेज दी हैं। वहीं, द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है, कि पाकिस्तान 8 से 10 अरब डॉलर का नया लोन आईएमएफ कार्यक्रम के पुनरुद्धार के बिना हासिल नहीं कर सकता है और आईएमएफ कार्यक्रम को जिंदा करने के लिए उसे सभी सात शर्तों को माननी होगी।
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पाकिस्तान की हकीकत को समझिए
डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 23 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें से उसने पहले ही 15 अरब डॉलर का भुगतान बाहरी ऋण चुकाने के रूप में कर दिया है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 6 अरब डॉलर का रोलओवर हासिल कर लिया है, जो उसे सऊदी अरब और यूएई से हासिल हुआ है, लिहाजा पाकिस्तान को अभी भी 9 अरब डॉलर का भुगतान करना है। पाकिस्तान वित्त विभाग के अधिकारी ने कहा, कि सरकार को चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (जनवरी-जून) की अवधि में 8 अरब डॉलर की बाकी चुकौती की आवश्यकता होगी। जिसमें से सरकार ने मार्च 2023 तक आने वाले द्विपक्षीय लेनदारों से 3 अरब डॉलर का रोलओवर प्राप्त करने की प्रतिबद्धता प्राप्त की है।
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