नवाज शरीफ या बिलावल.. कुछ घंटों में पाकिस्तान को मिलेगा नया प्रधानमंत्री, भारत को लेकर क्या होगी नीति?
Pakistan election 2024: राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में आज 12वां आम चुनाव खत्म होने की तरफ, जिसमें अभी तक काफी कम वोटिंग प्रतिशत रहा है। देश के 12.85 करोड़ मतदाताओं में से नई नेशनल असेंबली (संसद के निचले सदन) और चार प्रांतीय विधानसभाओं के लिए कुल कितने मतदाताओं ने चुनाव में हिस्सा लिया है, फिलहाल इसके आंकड़े नहीं आ पाए हैं।
लेकिन, पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने चुनाव में भारी धांधली की आशंका जताई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इंटरनेट और मोबाइल सर्विसेज बंद किए जाने पर गहरी आपत्ति जताई है और उन्होंने पाकिस्तान के इस चुनाव को फेल करार दिया है।

पाकिस्तान में अबकी बार किसकी सरकार?
इमरान खान को साइडलाइन किए जाने के बाद इस बार के चुनाव में मुख्य तौर पर नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और बिलावल भुट्टो जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच दोतरफा मुकाबला होने की उम्मीद है।
भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को चुनाव से रोक दिया गया है और पीटीआई के उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
हालांकि, भले ही पाकिस्तान में फिर से सलक्टेट सरकार ही क्यों ना बने, लेकिन पाकिस्तान के चुनावों पर उसके पड़ोसी भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी अन्य विश्व शक्तियों की उत्सुकता से नजर है।
नई दिल्ली और इस्लामाबाद पुराने दुश्मन हैं। हाल ही में, पाकिस्तान द्वारा भारतीय एजेंटों पर पाकिस्तानी धरती पर दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या कराने का आरोप लगाने के बाद दोनों देशों के बीच ताजा तनाव पैदा हो गया है। नई दिल्ली ने आरोपों को खारिज कर दिया, इसे इस्लामाबाद का "झूठे और दुर्भावनापूर्ण भारत विरोधी प्रचार" का प्रयास बताया है।
लिहाजा, अब जब कुछ घंटों में पाकिस्तान में एक नई नागरिक सरकार चुना जाना है, उसके प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ियों और भारत पर उनके रुख पर नजर डालना प्रासंगिक हो जाता है।

अगर नवाज़ शरीफ प्रधानमंत्री बने तो...
नवाज शरीफ के चौथी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावना है। विदेश में चार साल के आत्म-निर्वासन के बाद, पिछले साल अक्टूबर में देश लौटे पीएमएल (एन) नेता के बारे में माना जाता है, कि उन्हें पाकिस्तानी सेना का आशीर्वाद प्राप्त है।
पाकिस्तान वापस आने के बाद से 74 वर्षीय तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, भारत के संबंध में शांति संबंधी बयान देते रहे हैं और कहते रहे हैं, कि वह पड़ोसी देश के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं। पिछले साल दिसंबर में नवाज शरीफ ने पाकिस्तानी सेना पर हमला किया था, और कहा था कि पाकिस्तान की परेशानियों के लिए भारत और अमेरिका जिम्मेदार नहीं हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का भारत के साथ मेलजोल बढ़ाने का इतिहास रहा है। उनकी पार्टी के घोषणापत्र में भारत को 'शांति का संदेश' देने का वादा किया गया है, लेकिन इस शर्त के साथ, कि नई दिल्ली अनुच्छेद 370 को रद्द कर देगी, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था।
एनडीटीवी के अनुसार, शरीफ ने दोनों देशों के बीच नए राजनयिक संबंधों का आह्वान करते हुए भारत की वैश्विक उपलब्धियों को भी मान्यता दी है।
माना जा रहा है, कि नवाज शरीफ अगर प्रधानमंत्री बनते हैं, तो भारत और पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध तेजी से सुधरेंगे और दोनों देश संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

अगर बिलावल भुट्टो प्रधानमंत्री बने...
बिलावल भुट्टो जरदारी को अपने दादा, पूर्व प्रधान मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और उनकी मां - बेनज़ीर भुट्टो, जो एक पूर्व प्रधान मंत्री भी थीं, उनसे एक समृद्ध राजनीतिक विरासत मिली है।
बिलावल के पिता आसिफ अली जरदारी, जो पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं, वो भी मैदान में हैं। हालांकि पीपीपी को बहुमत मिलने की संभावना नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में इसका प्रभाव इसे भविष्य में किसी भी गठबंधन के निर्माण में बढ़त देता है।
बिलावल भुट्टो, जो अप्रैल 2022 में इमरान खान के सत्ता से बाहर होने के बाद नवाज के भाई शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल (एन) -पीपीपी गठबंधन सरकार में विदेश मंत्री थे, वो इस बार पीपीपी के प्रधान मंत्री पद के चेहरे हैं। भुट्टो वंशज ने भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की वकालत की। हालांकि, विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत पर आक्रामक रुख भी अपनाया है।
बिलावल ने दिसंबर 2022 में अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी टिप्पणी से एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने उनके बयान को "असभ्य" करार दिया था।
पाकिस्तान के चुनाव पर भारत की सोच
मोदी सरकार की विदेश नीति, पाकिस्तान को भारत के राजनयिक एजेंडे में "अप्रासंगिक" बनाने की रही है। इसका मतलब है, कि इस्लामाबाद में जो भी सत्ता में आएगा, भारत अपनी इसी नीति को आगे बढ़ा सकता है। पाकिस्तान ने बार बार भारत के भरोसे को तोड़ा है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आतंकवाद के लिए पाकिस्तान का निरंतर समर्थन, भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। नई दिल्ली ने पाकिस्तान में होने वाले इस चुनाव को लेकर बड़े पैमाने पर "उदासीनता के सिद्धांत" का पालन किया है, क्योंकि पाकिस्तान राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
वहीं, नई दिल्ली इसे चुनाव से ज्यादा प्रधानमंत्री को 'सेना का चयन' मानती है।
इंडियन एक्सप्रेस ने भूराजनीतिक विशेषज्ञ सी राजा मोहन के हवाले से कहा है, कि "भारत ने पाकिस्तान के उन जनरलों से निपटा है, जिन्होंने पहले देश की कमान संभाली थी। लेकिन जनरल (आसिम) मुनीर की अधिक नियंत्रण की तलाश वह फिल्म नहीं हो सकती, जो हमने पहले देखी है।"
उन्होंने आगे लिखा है, कि "निश्चित तौर पर, दिल्ली में प्रमुख धारणा यह है, कि पाकिस्तान में कभी कुछ नहीं बदलता। और पाकिस्तान पर कब्ज़ा बरकरार रखते हुए पाकिस्तान के जनरल गड़बड़झाला करेंगे। और इस बार भी, पाकिस्तान में पुरानी व्यवस्था के अस्थिर होने की बढ़ती संभावना के बीच जनरल मुनीर का नियंत्रण बढ़ रहा है।"
भारत में भी अब चुनाव होने वाले हैं और मई तक नई सरकार बन जाएगी। रॉयटर्स के अनुसार, अगर पीएम मोदी प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता में लौटते हैं, तो यह "पाकिस्तान की नई सरकार के लिए मामलों को और अधिक जटिल बना सकते हैं।"
हालांकि, अगर नवाज शरीफ पाकिस्तान के पीएम बनते हैं तो रिश्तों में नरमी आ सकती है। एचटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश व्यापार और पारंपरिक संबंधों को फिर से शुरू कर सकते हैं। अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भुट्टो के मामले में, नई दिल्ली को विश्वास नहीं है, कि उनमें "भारत के मामले को लेकर परिपक्वता है, क्योंकि उनके दादा जुल्फिकार अली भुट्टो ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का फैसला किया था, तब से उनका परिवार भारत विरोधी रहा है।"
यह देखना बाकी है कि पाकिस्तान की नई सरकार की नीतियों का भारत के साथ देश के तनावपूर्ण संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।












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