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पाकिस्तान में तबाही! बलूचिस्तान FC मुख्यालय पर फिदायीन हमला, 3 TTP आतंकी ढेर, दहशत का नया मंजर!

Terrorist Attack in Pakistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ है। नोककुंडी में फ्रंटियर कोर (FC) मुख्यालय के मुख्य द्वार पर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, जिसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कम से कम तीन आतंकवादी मारे गए।

यह हमला रिको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों के कंपाउंड को निशाना बनाकर किया गया। बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने भी इस फिदायीन हमले की जिम्मेदारी ली है। यह घटना पाकिस्तान की अंदरूनी सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है, जहां अपने पाले हुए आतंकी अब उसी पर भारी पड़ रहे हैं।

Terrorist Attack in Pakistan

Terrorist Attack in Balochistan: बलूचिस्तान में दोहरा आतंकी हमला

बलूचिस्तान के नोककुंडी में फ्रंटियर कोर (FC) मुख्यालय के मुख्य द्वार पर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इसके बाद, कम से कम छह हथियारबंद हमलावर मुख्यालय में घुस गए, जिसके जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने तीन टीटीपी (TTP) आतंकवादियों को मार गिराया। वहीं, इसी इलाके में रिको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों के कंपाउंड पर भी फिदायीन हमले हुए, जिनकी जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ली है। इन हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Rising Activities of Proscribed TTP: प्रतिबंधित TTP की बढ़ती गतिविधियां

नवंबर 2022 में पाकिस्तान सरकार के साथ युद्धविराम समाप्त होने के बाद से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियां, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में, तेज हो गई हैं। हाल ही में क्वेटा और डेरा मुराद जमाली में सात विस्फोट हुए, जिससे रेल यातायात भी बाधित हो गया। टीटीपी (TTP) लगातार पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है, और यह घटनाएं दर्शाती हैं कि यह प्रतिबंधित समूह अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, जिससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।

Threat to Reko Diq Project: रिको डिक परियोजना पर खतरा

नोककुंडी में हुआ फिदायीन हमला रिको डिक और सैंडक खनन परियोजनाओं से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों के कंपाउंड में हुआ है। पाकिस्तान सरकार इन परियोजनाओं को अपनी "सबसे सुरक्षित" विदेशी निवेश परियोजना के रूप में पेश कर रही थी, और इसने दुनिया भर से निवेश आमंत्रित किया था, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। अब इसी संवेदनशील कंपाउंड पर हुए हमले ने परियोजना की सुरक्षा और पाकिस्तान में विदेशी निवेश के माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला पाकिस्तान के आर्थिक विकास की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक बड़ा झटका है।

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Pakistan Trapped in its Own Web: अपने ही जाल में फंसा पाकिस्तान

दुनिया भर में आतंकी घटनाओं (Terrorist Incidents) को अंजाम देने वाला पाकिस्तान अब अपने पाले हुए आतंकियों की वजह से बड़े संकट का सामना कर रहा है। टीटीपी (TTP) जैसे समूह, जिन्हें कभी पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया था, अब पाकिस्तान की सेना और आईएसआई (ISI) पर ही हमला कर रहे हैं। पेशावर में एफसी हेडक्वार्टर पर हुए फिदायीन हमले और बहावलपुर के अबू दुजाना जैसे आतंकियों का टीटीपी में शामिल होना, यह दर्शाता है कि आतंकवाद को 'एक्सपोर्ट' करने की पाकिस्तान की नीति अब उसके लिए ही 'इम्पोर्ट' होकर बड़ा संकट बन गई है।

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