Pakistan: इमरान खान को जेल भेजना चाहते थे जनरल मुनीर? वो कड़वी शुरुआत जिसने सब बदल दिया
Pakistan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल भेजने के पीछे आर्मी चीफ आसिम मुनीर का हाथ माना जाता है। लेकिन मुनीर, इमरान खान से इतने क्यों चिढ़ते हैं इसकी जड़ 2017 में छुपी हुई है। किसी जमाने में इमरान खान को सेल्यूट ठोकने वाले मुनीर आज इतने पावरफुल कैसे हुए और क्या है दोनों में दुश्मनी की असली कहानी और वजह?
इमरान खान और जनरल मुनीर की पुरानी दुश्मनी
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच टकराव नया नहीं है, बल्कि कई साल पुराना है। मुनीर ने इमरान खान की गिरफ्तारी में बड़ी भूमिका निभाई और पीटीआई को खत्म करने का रास्ता भी साफ किया। नवंबर 2022 में उन्होंने जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह ली, जो 2016 से सेना प्रमुख थे।

2018 से शुरू हुआ मनमुटाव
खान और मुनीर के रिश्ते 2018 में खराब हुए, जब मुनीर ISI चीफ थे और इमरान देश के प्रधानमंत्री। शहबाज शरीफ का दावा है कि मुनीर को इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने इमरान की पत्नी पर लगे भ्रष्टाचार के सबूत दिखाए थे। खान इसलिए नाराज़ थे क्योंकि वह ISI के DG पद पर अपने करीबी जनरल फैज हमीद को लाना चाहते थे। लेकिन इमरान इसमें रोड़ा बने रहे।
सेना प्रमुख बनने से रोकने की कोशिश?
जब मुनीर सीनियरिटी के आधार पर अगले सेना प्रमुख बनने वाले थे, तो इमरान खान ने बाजवा का कार्यकाल बढ़ाकर उनकी राह रोकने की कोशिश की। लेकिन तब तक दोनों के रिश्ते काफी खराब हो चुके थे।
सत्ता से गिरने के बाद मुनीर को मिल गया टॉप पोस्ट
अविश्वास प्रस्ताव से अप्रैल 2022 में इमरान खान सत्ता से हटे। नई शहबाज सरकार ने कानून में बदलाव कर मुनीर को सेना प्रमुख बना दिया, जबकि वह बाजवा की रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले रिटायर हो चुके थे। इस बदलाव ने मुनीर को दोबारा सर्विस में लाकर सीधा आर्मी चीफ बना दिया।
शुरू में शांत, लेकिन बाद में टकराव बढ़ा
सेना प्रमुख बनने के बाद कुछ महीनों तक मुनीर राजनीति से दूर रहे। लेकिन इमरान के लगातार आरोप लगाते रहे कि सेना उन्हें मारने की साजिश कर रही है। इसी बात ने माहौल तेजी से बिगाड़ दिया। इससे जनरल मुनीर और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी। तनाव इतना बढ़ा कि इमरान की कुर्सी ही चली गई।
9 मई की हिंसा ने दिया सेना को मौका
9 मई को इमरान समर्थकों की हिंसा ने हालात पलट दिए। खान की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके सपोर्टर्स ने देशभर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। सैन्य ठिकानों पर हमला किया, लाहौर कोर कमांडर हाउस में घुस गए, और शहीद सैनिकों की मूर्तियां भी तोड़ दीं। इन घटनाओं ने खान और पीटीआई के खिलाफ बड़े पैमाने पर जनमत खड़ा कर दिया। नतीजतन इमरान पर एक के बाद एक कई मुकदमें लगा दिए गए।
मुनीर ने तोड़ दी PTI?
शहबाज सरकार और सेना ने खान व उनके साथियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी। लगातार गिरफ्तारियों, पूछताछ और दबाव के कारण करीब 100 से ज़्यादा नेता पीटीआई छोड़ चुके हैं। कई राजनीति से दूर हो गए हैं, और कई ने सेना के इशारे पर नई पार्टियां बना लीं जैसे:
• पीटीआई (पार्लियामेंटेरियन) - परवेज खट्टक
• इस्तेखाम-ए-पाकिस्तान पार्टी - जहांगीर तरीन
इमरान भी भुट्टो-बेनजीर-नवाज़ की तरह कर पाएंगे वापसी?
इतिहास बताता है कि पाकिस्तान के कई नेता जैसे- जुल्फिकार अली भुट्टो, बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ आदि सेना से टकराकर भी वापसी कर चुके हैं। लेकिन खान की राह आसान नहीं है। अगर नवाज शरीफ फिर पीएम बन गए, तो उनकी पॉपुलरिटी खान को कड़ी टक्कर दे सकती है।
मुनीर ने अपनी पकड़ की और मजबूत की
हाल ही में जनरल मुनीर ने अमेरिका के साथ CIS-MOA (कम्यूनिकेशन इंटरऑपरेबिलिटी एंड सिक्योरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट) पर साइन किए हैं। इससे पाकिस्तान को अमेरिकी हथियार और सैन्य उपकरण तेज़ी से मिल सकेंगे। पहला ऐसा समझौता 2005 में हुआ था, लेकिन 2020 में खत्म हो गया था।
अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते क्यों बिगड़े थे?
अमेरिका के अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर आरोप लगा कि उसने तालिबान को सपोर्ट किया। बाद में, जब अमेरिका भारत के और करीब हुआ, तो पाकिस्तान चीन की तरफ झुक गया। इससे US-Pakistan रिश्ते और खराब हो गए। इमरान खान भी अमेरिका के साथ रिश्ते ठीक नहीं कर पाए और उल्टा एंटी-US बयान देकर माहौल और बिगाड़ते रहे।
रिश्ते सुधरे, F-16 मिले, और अब नया डिफेंस डील
खान के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका-पाकिस्तान रिश्तों में सुधार शुरू हुआ। अमेरिका ने पाकिस्तान को F-16 लड़ाकू विमान भी उपलब्ध कराए। अब नया समझौता आने वाले समय में और हथियारों की सप्लाई बढ़ा सकता है।
भारत की बराबरी हासिल करना मुश्किल
कुछ लोग मानते हैं कि अमेरिका के प्लान में पाकिस्तान भारत की बराबरी कभी नहीं कर पाएगा-
कम से कम आने वाले कई सालों तक। लेकिन US चाहता है कि पाकिस्तान पूरी तरह चीन पर निर्भर न हो। अब देखने वाली बात यह है कि मुनीर और नवाज शरीफ आने वाले समय में किस तरह तालमेल बैठाते हैं।
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