Pak Food Crisis: करोड़ पाकिस्तानी जूझ रहे भुखमरी से, जूठा और बचा-कुचा खाने को मजबूर, किसने खोली पोल?

Pak Food Crisis: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के सर्वे-सर्वा आसिम मुनीर और उनके नंबर-टू यानि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों अपनी इमेज बदलने में लगे थे। लेकिन इस्लामाबाद में फेल हुई शांतिवार्ता ने बता दिया कि 'तुमसे न हो पाएगा'। इसी बीच अब बेइज्जती का दूसरा तमाचा मारा है United Naitons ने। एक तरफ विदेशी मेहमानों के लिए फाइव स्टार इंतजाम करने वाले पाकिस्तान में 1 करोड़ लोग भूख से जूझ रहे हैं। क्या है पूरा मामला, डिटेल में समझते हैं।

कैसे हुई खाने की किल्लत

दरअसल United Nations की खाद्य और मौसम एजेंसियों की नई रिपोर्ट 'Extreme Heat and Agriculture' के मुताबिक, भीषण गर्मी अब वैश्विक खेती के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी एक Risk Multiplier यानी ऐसा खतरा है जो सूखा, जंगल की आग और पानी की कमी जैसी समस्याओं को और बढ़ा देता है। इसका असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, हर 1°C तापमान बढ़ने पर मक्का की पैदावार 7.5% और गेहूं की पैदावार 6.0% घट गई है। आने वाले समय में हर 1°C अतिरिक्त वृद्धि पर इसमें 10.0% तक और गिरावट आने का अनुमान है। इसी वजह से पाकिस्तान में खाने की किल्लत हो रही है।

Pak Food Crisis

पाकिस्तान के पंजाब में आधी फसल खत्म

रिपोर्ट में पाकिस्तान के पंजाब के उन ग्रामीण इलाकों का जिक्र किया गया है, जहां खेती बारिश पर निर्भर है। यहां लगातार बढ़ती हीटवेव की वजह से फलों का उत्पादन 50.0% तक गिर गया है। सिर्फ फसल ही नहीं, पशुधन भी इससे प्रभावित हो रहा है। दूध उत्पादन कम हो रहा है और जानवरों में बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। गांवों में पानी भरने जैसे कठिन काम करने वाली महिलाओं पर इसका असर और ज्यादा है, क्योंकि वे गर्मी और उससे जुड़ी बीमारियों के उच्च जोखिम में हैं।

खाद्य संकट पहले से गंभीर

पाकिस्तान के जिन इलाकों को देश का ब्रेडबास्केट कहा जाता है, वहां ऐसी स्थिति बेहद चिंता की बात है। शुक्रवार 24 अप्रैल को जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पहले से ही दुनिया में खाद्य असुरक्षा के सबसे खराब स्तर वाले देशों में शामिल है। यह उन केवल 10 देशों में से एक है, जहां दुनिया के खाद्य संकट से जूझ रहे दो-तिहाई लोग रहते हैं।

जूठ और बचा-कुचा खाने पर मजबूर लोग

कम खेती और पानी की कमी से पाकिस्तान में तकरीबन 1 करोड़ लोग मौजूदा वक्त में ऐसे हैं जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। इनमें से ज्यादातर लोग जूठा या बचा हुआ खाना खाकर दिन गुजारते हैं। जबकि सुदूर क्षेत्र के लोगों को वो भी नसीब नहीं होता।

संकट सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं

यह समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है और सिर्फ गर्मी इसकी एकमात्र वजह नहीं है। पिछली सप्ताह की रिपोर्टों में खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी बटग्राम जिले में गहराते पर्यावरणीय संकट पर भी रोशनी डाली गई। यहां जलवायु परिवर्तन और बिगड़े हुए बारिश के पैटर्न ने खेती को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। वहीं जिन इलाकों में पहले बारिश होती थी अब वहा सूखे के कारण प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं। जिससे किसानों की कमाई गिरती जा रही है।

बढ़ता जा रहा फूड इम्पोर्ट बिल

इस संकट का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले 9 महीनों में देश का खाद्य आयात बिल 15.0% से ज्यादा बढ़कर 7.09 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि घरेलू उत्पादन कम होने पर देश को बाहर से ज्यादा अनाज खरीदना पड़ रहा है। वहीं खेती की बात करें तो अगर बारिश कम होती है तो खेती सूखे से प्रभावित होती है, लेकिन ज्यादा बारिश भी बड़ी समस्या बन जाती है।

मौसम की मार से खेती कमजोर

यह पूरी तस्वीर दिखाती है कि खराब मौसम कैसे खेती को कमजोर कर रहा है और लंबे समय की समस्याएं जैसे खाद्य असुरक्षा और गरीबी को और बढ़ा रहा है। पाकिस्तान का वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में योगदान 1.0% से भी कम है। वहीं अमीर देश अब भी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में धीमे हैं, इसलिए पाकिस्तान अकेले ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में सीमित भूमिका निभा सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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