ऑक्सफोर्ड वैक्सीनः 2020 के अंत तक आ सकता है अंतिम ट्रायल का संभावित परिणाम
नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि वह वर्ष 2020 के अंत तक COVID-19 वैक्सीन के अंतिम चरण ट्रायल का संभावित परिणाम पेश कर देगा। शीर्ष वैज्ञानिक निरीक्षक ने आगाह किया कि अभी भी जीवन को सामान्य होने में कुछ समय लगेगा। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने टीके को कम से कम 50 फीसदी प्रभावी होने के लिए निर्धारित किया था, जो महामारी पर परिवर्तनकारी प्रभाव डालेगा।
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गौरतलप है एक वैक्सीन को कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जाता है, जिसने अब तक दुनिया भर में 12 लाख से अधिक लोगों की जान ले ली है और वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप कर अरबों लोगों के लिए सामान्य जीवन को पलट चुकी है।

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल के मुख्य जांचकर्ता पोलार्ड ने ब्रिटिश सांसदों को इस साल ट्रायल के नतीजे पेश करने के बारे में कहा, मैं आशावादी हूं कि हम इस साल के अंत से उस बिंदु तक पहुंच सकते हैं। पोलार्ड ने कहा कि इस वर्ष वैक्सीन पेश कर देंगे, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि वैक्सीन काम कर रही है या नहीं। वैक्सीन डेटा को नियामकों द्वारा सावधानीपूर्वक समीक्षा की जानी चाहिए, उसके बाद वैक्सीन किसे मिलना चाहिए, इस पर राजनीतिक निर्णय लिया जाए।

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के निदेशक पोलार्ड के मुताबिक हम वैक्सीन के विकास में करीब आ रहे हैं, लेकिन अभी तक निर्माण की दिशा तक नहीं पहुंचे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें उम्मीद है कि टीका क्रिसमस से पहले लगाना शुरू हो जाएगा, तो उन्होंने कहा: "ऐसा होने की बहुत कम संभावना है,लेकिन वो अभी ठीक-ठीक कुछ कह नहीं सकते हैं।

उल्लेखीय है ऑक्सफोर्ड /एस्ट्राजेनका वैक्सीन दुनिया की प्रमुख कोरोनावायरस वैक्सीन में से एक है, जिसे फाइजर और बॉयोटेक के उम्मीदवार के साथ नियामक अनुमोदन के लिए पेश किया जाना है। जनवरी में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम शुरू हुआ, जिसे AZD1222, या ChAdOx1 nCoV-19 कहा जाता है। यह वैक्सीन चिम्पांजी में संक्रमण के लिए जिम्मेदार कॉमन कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से निर्मित एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है।












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