Coronavirus Vaccine: CureVac की वैक्सीन ट्रायल में बेहतर, एस्ट्राजेनेका की समीक्षा भी शुरू
नई दिल्ली। दुनियाभर में कोरोना वायरस (कोविड-19) का कहर अब भी नहीं थमा है। वायरस के खातमे के लिए हर कोई वैक्सीन आने का इंतजार कर रहा है, जिसके लिए कई कंपनियां कड़ी मेहनत कर रही हैं। वैक्सीन के अपडेट की बात करें तो जर्मनी की कंपनी क्योरवैक का कहना है कि उसकी वैक्सीन ने पहले चरण के ट्रायल में प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने का काम किया है। क्योरवैक ने ये दावा अपनी वैक्सीन CVnCoV के अंतरिम फेज 1 डाटा के आधार पर किया है। ये वैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युन रेस्पांस ट्रिगर करने में सफल हुई है। इसके लिए जुलाई में ट्रायल शुरू हुआ था।

क्योरवैक का कहना है कि वैक्सीन के ट्रायल परिणाम अंतिम फेज के ट्रायल को लॉन्च करने की योजना का समर्थन कर रहे हैं। जो साल के अंत में होगा और इसमें 30 हजार लोगों को शामिल किया जाएगा। क्योरवैक ने बताया कि ये वैक्सीन जब वॉलंटीयर्स को दी गईं, तो उनमें उतनी ही एंटीबॉडीज विकसित हुईं, जितनी कोरोना के गंभीर मामले में रिकवर होने के बाद होती हैं। जहां कंपनी कम डोज दिए जाने पर अधिक ध्यान दे रही है, वहीं उसकी वैक्सीन आरएनए (mRNA) अप्रोच का इस्तेमाल कर रही है। आपको बता दें अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन भी mRNA आधारित ही है।
वहीं ब्रिटेन ने रियल-टाइम क्लीनिकल डाटा देखने के लिए एस्ट्राजेनेका कोरोना वायरस वैक्सीन की समीक्षा शुरू कर दी है। इस वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही अमेरिकन फार्मा कंपनी फाइजर ने भी अपनी कोविड-19 वैक्सीन की समीक्षा शुरू कर दी है। रोलिंग रिव्यू यानी समीक्षा से कंपनियां रियल टाइम डाटा देखने में सक्षम हो पाती हैं, साथ ही विनिर्माण प्रक्रिया और ट्रायल को लेकर दवा निर्माताओं से बातचीत कर पाती हैं। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि उसकी वैक्सीन युवाओं में प्रतिरक्षा (रोग प्रतिरोधक शक्ति) पैदा कर रही है। हालांकि बुजुर्गों में भी प्रतिरक्षा पैदा हो रही है लेकिन इसकी मात्रा कम है।
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