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OPEC+ का तेल के प्रोडक्शन पर बड़ा फैसला, क्या भारत में पेट्रोल की कीमत कम करेंगी तेल कंपनियां?

ओपेक प्लस तेल उत्पादक देशों का संगठन है, जिसमें सऊदी अरब और रूस का वर्चस्व है और ये देश अपनी मर्जी से तेल उत्पादन में कटौती करते रहते हैं। पिछले दिनों तो अमेरिका ने सऊदी को अंजाम भुगतने की भी धमकी दी थी।

OPEC Oil Production: तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस ने फैसला लिया है, कि वो तेल के प्रोडक्शन में कटौती करना जारी रखेगा। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले ओपेक प्लस ने रविवार को फैसला लिया है, कि वो तेल की आपूर्ति में कटौती के फैसले पर सहमत है और आने वाले वक्त में भी तेल का प्रोडक्शन कम रखा जाएगा। यानि, ओपेक प्लस के फैसले का मतलब ये है, कि तेल प्रोडक्शन स्थिर रखा जाएगा और जिस तरह से कटौती की जा रही है, वो कटौती ऐसे ही जारी रहने वाली है। ओपेक प्लस के इस फैसले का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है, क्योंकि जी7 देशों ने रूसी तेल की कीमत पर प्राइस कैप लगा दिया है।

ओपेक प्लस के फैसले का मतलब

ओपेक प्लस के फैसले का मतलब

अक्टूबर महीने के आखिर में ओपेक प्लस ने हर दिन 20 लाख बैरल तेल उत्पादन में कटौती का फैसला किया था, जिसका अमेरिका ने काफी सख्त विरोध किया था और सऊदी अरब को परिणाम भुगतने तक की धमकी दी गई थी। लेकिन, उसके बाद भी सऊदी अरब अपने फैसले से टस से मस नहीं हुआ। वहीं, अब आशंका है, कि तेल और गैस के प्रोडक्शन में कटौती की वजह से तेल और गैस की कीमतों में भारी इजाफा होग, लेकिन ये अनुमान गलत साबित हुआ, क्योंकि दुनिया आर्थिक सुस्ती में जा चुकी है और कोविड की वजह से घरेलू लॉकडाउन में फंसे चीन ने तेल खरीदना काफी कम कर दिया है, जिसका असर ये हुआ कि, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगीं। वहीं, गैसोलीन की कीमत यूक्रेन युद्ध शुरू होने के पहले स्तर तक जा चुकी है।

रूसी तेल पर जी7 का प्राइस कैप

रूसी तेल पर जी7 का प्राइस कैप

ओपेक प्लस ने तेल के प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने का फैसला उस वक्त लिया है, जब जी7 देशों ने रूसी तेल की कीमत पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप लगा दिया है। यानि, अब अगर कोई देश इस कीमत से ज्यादा पैसे देकर रूसी तेल खरीदता है, तो वो पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के निशाने पर आ जाएगा। वहीं, रूस ने कहा है, कि वो इस प्राइस कैप को नहीं मानता है और इस प्राइस कैप पर तेल नहीं बेचेगा। रूस ने साफ कर दिया है, कि जो देश 60 डॉलर प्रति बैरल पर तेल खरीदने आएंगे, उन्हें रूस तेल नहीं बेचेगा। यानि, प्राइस कैप पर एक तरफ जी7 हैं, तो दूसरी तरफ रूस है और ये प्राइस कैप का फैसला आज से ही प्रभावी हो रहा है, लिहाजा तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। भारत की रिलायंस ने सिर्फ 5 दिसंबर तक के लिए रूस से तेल खरीदने का ऑर्डर दिया हुआ है, लिहाजा रूसी तेल पर सरकार का मंथन जारी है। कई एक्सपर्टस का कहना है, कि प्राइस कैप से भारत को जबरदस्त फायदा होगा और रूस भारत को 60 डॉलर प्रति बैरल तेल बेचने पर मजबूर होगा।

अगर प्राइस कैप का उल्लंघन होता है?

अगर प्राइस कैप का उल्लंघन होता है?

जी7 देशों ने रूसी तेल को लेकर कीमत तय कर दी है और इसके मुताबिक, रूसी तेल की कीमत है 60 डॉलर प्रति बैरल। और अब अगर कोई देश 60 डॉलर से ज्यादा कीमत पर रूस से तेल खरीदता है, तो वो प्राइस कैप का उल्लंघन होगा और ऐसे में उस देश के खिलाफ भी प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। हालांकि, इसबार उल्लंघन करने पर प्रतिबंधों में थोड़ी राहत दी गई है। जैसे, इस बार उल्लंघन करने पर तेल के परिवहन में शामिल जहाजों पर सिर्फ 90 दिनों का प्रतिबंध लगाया जाएगा, जैसे पहले ये प्रतिबंध हमेशा के लिए था। चूंकी, परिवहन में लगे जहाज और हर आवाजाही के लिए इंश्योरेंस करने वाली कंपनियां पश्चिमी देशों की ही हैं, लिहाजा अगर कोई देश 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत पर रूसी तेल खरीदेंगे, तो फिर कोई जहाज कंपनी उस तेल को उस देश तक पहुंचाने के लिए तैयार ही नहीं होगा।

भारत में तेल की कीमत होगी कम?

भारत में तेल की कीमत होगी कम?

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत अभी कम हो गई है और पूरी संभावना है, कि आने वाले कुछ और महीनों में तेल की कीमत में इजाफा नहीं होगा। लिहाजा, भारत में तेल की कीमत में और कमी की जा सकती है। पिछले हफ्ते तेल के दाम कम हुए हैं और माना जा रहा है, कि भारत की तेल कंपनियां, बीपीसीएल, एचपीसीएल आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और कम कर सकती हैं। एसएमसी ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत एक डॉलर प्रति बैरल कम होती है, तो भारतीय तेल कंपनियों को रिफाइनिंग के बाद 45 पैसे प्रति लीटर का फायदा होता है। वहीं, भारत, जो यूक्रेन युद्ध से पहले रूस ने सिर्फ 0.2 प्रतिशत ही तेल खरीदता था, वो अब रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है और भारत ने प्राइस कैप डॉक्यूमेंट्स पर साइन भी नहीं किए हैं, लिहाजा आने वाले दिनों में प्राइस कैप को ध्यान में रखते हुए भारत और रूस के बीच कोई और डील हो सकती है, जिसका फायदा नागरिकों को हो सकता है।

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