तालिबानी लड़ाकों ने हवाई फायरिंग कर मनाया एक साल का जश्न, बोले- अब तो पहले से भी अधिक सुरक्षित है देश

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आज एक साल पूरे हो गए हैं। अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद तालिबान ने एक बार फिर से देश पर कब्जा कर लिया था। इस मौके पर तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल में एक समारोह का आयोजन किया।

काबुल, 15 अगस्तः अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के आज एक साल पूरे हो गए हैं। अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से जाने के बाद तालिबान ने एक बार फिर से देश पर कब्जा कर लिया था। इस मौके पर तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल में एक समारोह का आयोजन किया। आजादी की पहली सालगिरह पर हजारों की तादाद में अलग-अलग प्रातों से तालिबान लड़ाकू तालिबानी अधिकारियों को सुनने के लिए काबुल पहुंचे। मौके पर लोगों में काफी उत्साह नजर आया। लोग तालिबान के काले-सफेद झंडे लहराते नजर आए। इस दौरान काबुल शहर में दिन भर कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित

पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित

वहीं देश में तालिबान शासन की पहली वर्षगांठ के तौर पर आज यानी 15 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस मौके पर कुछ तालिबानी लड़ाकों ने जश्न में हवा में गोलियां चलाईं। तालिबानी प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने इस मौके पर कहा, 'आज का दिन झूठ पर सच्चाई की जीत और अफगान की आजादी का है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि देश अब कहीं अधिक सुरक्षित है।

पूर्व उपराष्ट्रपति सालेह ने जताया दुख

वहीं अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भारत को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। सालेह ने ट्वीट करते हुए कहा, "भारत को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। जय हिन्द। 15 अगस्त भारत के लिए शुभ दिन है और अफगानों के लिए एक कड़वा संयोग है। आज के ही दिन जो पाक समर्थित तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था। इस गलती को सुधारा जाएगा और यह काला बिंदु हमारे कैलेंडर से हटा दिया जाएगा।"

अफगानिस्तान की स्थिति हुई बदतर

तालिबान के दोबारा सत्ता में आने से पहले भी अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक था ऐसे में अभी की स्थिति की तो बस कल्पना ही की जा सकती है। तालिबानी शासन में जिसकी जिंदगी पर सबसे अधिक असर पड़ा है वो अफगानिस्तान की आधी आबादी वाली महिलाएं हैं। तालिबान जब दूसरी बार सत्ता में लौटा था तो उसने पिछले शासन के मुकाबले ज्यादा नरम शासन का वायदा किया था। लेकिन तालिबान अपने वायदे पर कायम नहीं रहा और तालिबानी सरकार ने धीरे-धीरे अफगान लोगों के अधिकारों पर अंकुश बढ़ाता चला गया और लोगों की जिंदगियों को मुश्किल हो गयी।

घोर गरीबी में गुजर कर रहे अफगानिस्तानी

घोर गरीबी में गुजर कर रहे अफगानिस्तानी

इसके अलावा पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। मोटे तौर पर 25 मिलियन अफगान अब गरीबी में जी रहे हैं जो कि देश की आधी से अधिक आबादी है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इस साल 900,000 तक नौकरियां जा सकती हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था ठप हो गई है। इसके अलावा महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से वोमेन-सेंट्रिक अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है। वर्ल्ड बैंक के एक सर्वे के मुताबिक पुरुषों के 26 फीसदी के मुकाबले महिलाओं के स्वामित्व वाले 42 फीसदी बिजनेस बंद हो गए हैं। अस्पतालों में महिला डॉक्टरों न के बराबर रह गई हैं जिससे महिलाओं से जुड़ी समस्याओं का ठीक तरीके से निदान नहीं हो पा रहा है। बच्चों की डिलिवरी में संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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