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Nobel Prize 2025: आज से घोषणा, सबकी निगाहें ट्रंप पर, क्या मिल पाएगा 'शांति पुरस्कार'?

Nobel Prize Donald Trump: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की घोषणा आज से शुरू हो रही है। इस बार सबकी निगाहें 10 अक्टूबर को घोषित होने वाले नोबेल शांति पुरस्कार पर टिकी हैं। 6 अक्तूबर से 13 अक्टूबर तक अलग-अलग क्षेत्रों के नोबेव विजेताओं की घोषणा होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी दावेदारी चमकाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे, यहाँ तक कि उन्होंने आखिरी वक्त में गाजा पीस प्लान का दांव भी चला था।

हालांकि, विशेषज्ञों के संकेत मिल रहे हैं कि यह पुरस्कार ट्रंप के हाथों से फिसल सकता है। शांति पुरस्कारों के नामांकन की समय-सीमा 31 जनवरी 2025 थी। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 11 दिन बाद। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि उनका नामांकन हो भी पाया है या नहीं, खासकर जब नेतन्याहू और शहबाज़ शरीफ़ जैसे नेताओं ने उन्हें काफी देर से नामित किया था।

Nobel Prize Donald Trump

सबसे पहले मेडिसिन के क्षेत्र में घोषणा

नोबेल पुरस्कार की घोषणाओं का सिलसिला आज, सोमवार, 6 अक्टूबर को फिजियोलॉजी या मेडिसिन पुरस्कार के साथ शुरू होगा। यह पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिनकी खोजों ने चिकित्सा या मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया हो। स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट से दोपहर करीब 3:00 बजे (स्थानीय समय) इस पुरस्कार का ऐलान किया जाएगा। विजेता को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 9 करोड़ रुपये), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जबकि पुरस्कार 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में वितरित किए जाएंगे।

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Nobel Prize 2025 का पूरा शेड्यूल

  • फिजियोलॉजी या मेडिसिन सोमवार, 6 अक्टूबर
  • फिजिक्स मंगलवार, 7 अक्टूबर
  • लिटरेचर (साहित्य) गुरुवार, 9 अक्टूबर
  • पीस (शांति) शुक्रवार, 10 अक्टूबर
  • इकोनॉमी (अर्थशास्त्र) सोमवार, 13 अक्टूबर

कैसे होता है विजेताओं का चयन और ऐलान?

पुरस्कार विजेताओं का चुनाव स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल कमेटी करती है। इस कमेटी के 5 सदस्य हजारों नामांकनों की गहन जांच करते हैं। विजेताओं के नामों की घोषणा करने से पहले, कमेटी के सेक्रेटरी थॉमस पर्लमैन विजेताओं को व्यक्तिगत रूप से फोन करते हैं। इस ऐलान को नोबेल की आधिकारिक वेबसाइट nobelprize.org, यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव देखा जा सकता है।

नोबेल प्राइज वेबसाइट की नीति के अनुसार, किसी भी फील्ड में नामांकन पाने वाले लोगों के नाम अगले 50 साल तक उजागर नहीं किए जाते हैं।

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मेडिसिन के लिए इन सेक्टरों पर है नज़र

भले ही अभी तक किसी भी संभावित विजेता या क्षेत्र का आधिकारिक नाम नहीं बताया गया है, लेकिन मनी फोल्ड वेबसाइट के मुताबिक, इस साल मेडिसिन के 5 सेक्टरों में अवॉर्ड मिलने की संभावना सबसे अधिक है।

  • GLP-1 दवाएं: डायबिटीज और मोटापे के लिए नई दवाएं।
  • ऑप्टोजेनेटिक्स: लाइट का उपयोग करके नर्व सेल्स की गतिविधि को नियंत्रित करना और समझना।
  • माइक्रोस्कोपी: माइक्रोस्कोप का उपयोग करके कोशिकाओं की तस्वीरें लेना।
  • BRCA: वे जीन जो स्तन (Breast) और ओवरी कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
  • कैंसर इम्युनोथैरेपी: कैंसर से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का उपयोग करने वाली नई दवाएं।

ये पुरस्कार ऐसी खोजों को सम्मानित करते हैं जो इंसानों की जिंदगी बेहतर बनाती हैं, जैसे वैक्सीन या नई दवाएं। पिछले साल (2024) माइक्रोRNA की खोज को यह पुरस्कार मिला था, जो जीन को नियंत्रित करने से जुड़ा था।

नोबेल का इतिहास और भारतीय कनेक्शन

अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की वसीयत के आधार पर नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में हुई थी और ये पहली बार 1901 में दिए गए थे। शुरुआत में यह केवल फिजिक्स, मेडिसिन, केमिस्ट्री, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में दिया जाता था, बाद में अर्थशास्त्र को भी जोड़ा गया।1901 से 2024 तक मेडिसिन के क्षेत्र में 229 लोगों को सम्मानित किया जा चुका है।

भारतीय मूल के हरगोविंद खुराना को चिकित्सा के क्षेत्र में मिल चुका है पुरस्कार

चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना को 1968 में नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने जेनेटिक कोड से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज की थी, जिससे यह समझने में मदद मिली कि हमारे शरीर में प्रोटीन कैसे बनते हैं। इस खोज ने कैंसर, दवाओं और जेनेटिक इंजीनियरिंग की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया था। भारत से जुड़े कुल 12 लोग नोबेल जीत चुके हैं, लेकिन मेडिसिन में यह अवॉर्ड केवल खुराना को ही मिला है।

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