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लॉकडाउन में प्रकृति आराम नहीं कर रही, कोरोना दुनियाभर के जंगलों को पहुंचा रहा भारी नुकसान

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की वजह से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव की तमाम खबरें सामने आईं थी, जिसमे दावा किया जा रहा था कि लॉकडाउन की वजह से लोग अपने घर में हैं, जिसके चलते पर्यावरण अच्छा हो रहा है। लेकिन जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है उसके अनुसार लॉकडाउन का जगलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा एक रिपोर्ट पब्लिश की गई है। इस रिपोर्ट को न्यूज एजेंसी थॉमसन रायटर्स के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिसमे कहा गया है कि कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की वजह से दुनिया के जंगलों पर खतरा बढ़ गया है।

जंगलों को काटा जा रहा है

जंगलों को काटा जा रहा है

रिपोर्ट के अनुसार गरीब लोग जिनका रोजगार छिन गया है, वह अस्थायी रूप से बेरोजगार हो गए हैं और ये लोग ईंधन व अन्य जरूरतों के लिए पेड़ों को काट रहे हैं। कई लोग अपनी आजीविका, खाने और शरण के लिए जंगल के ईंधन पर निर्भर होते हैं। लाखो लोगों का लॉकडाउन की वजह से शहरों मेमं रोजगार छिन गया है और वह वापस अपने ग्रामीम क्षेत्र में स्थित घर लौट आए हैं। पूरी दुनिया में एक बिलियन लोग जंगली भोजन पर निर्भर हैं, जबकि 2.4 बिलियन लोग खाना पकाने के लिए लकड़ी पर निर्भर हैं। यही नहीं दुनियाभर में जो लोग बेहद गरीबी हैं उनमे 10 में से 9 लोग अपनी आजीविका के लिए जंगल पर निर्भर हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े

चौंकाने वाले आंकड़े

यूएन फूड एंड एग्रिकल्चर आर्गेनाइजेशन (FAO) के फॉरेस्ट डिवीजन के डायरेक्टर मेट विल्की का कहना है कि पेड़ को अधिकतर खाने और ईंधन के लिए काटा जाता है। दुनिया की एक तिहाई आबादी अभी भी खाना पकाने के लिए लकड़ी पर निर्भर है। लेकिन कोरोना काल में लॉकडाउन में यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। एफएओ ने अपने स्टेट ऑफ द वर्ल्ड फॉरेस्ट्स 2020 रिपोर्ट में कोरोना वायरस को जंगलों के नुकसान से जोड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार धरती से 420 मिलियन हेक्टेअर जंगल 1990 के बाद खत्म हो चुका है, जोकि दक्षिण अफ्रीक के कुल साइज का तकरीबन तीन गुना है।

गलत धारणा बनाई जा रही

गलत धारणा बनाई जा रही

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह गलत तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि लॉकडाउ में प्रकृति आराम कर रही है और अपने आप को ठीक कर रही है। एक अन्य रिपोर्ट में डब्ल्यूईएफ का कहना है कि उष्ण कटिबंधीय इलाकों में कई ग्रामीण क्षेत्र जंगलों का दोहन हो रहा है, अवैध खनन हो रहा है, जंगली जानवरों का शिकार किया जा रहा है। बता दें कि कोरोना वायरस से दुनियाभर में अबतक 5.5 मिलियन यानि तकरीबन 55 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। जबकि तकरीबन 34 लाख लोगों की इस वायरस की वजह से जान जा चुकी है।

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English summary
No nature is not on break amid lockdown world Covid-19 is harming the foret badly.
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