मार्च 2021 से पहले नहीं तैयार हो सकेगी Moderna की वैक्सीन: रिपोर्ट

वॉशिंगटन। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए दुनियाभर के देश कोशिशें कर रहे हैं। अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, भारत सहित कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने की हरसंभव कोशिश में जुटे हैं। अमेरिका की बायोटेक कंपनी मॉडर्ना भी कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी है। कंपनी के सीईओ ने कहा है कि कोरोना की वैक्सीन को आपातकाल में उपयोग के लिए 25 नवंबर से पहले कंपनी सरकार से इसकी अनुमति नहीं मांगेगी। रिपोर्ट के अनुसार कोरोना की वैक्सीन मार्च 2021 से पहले नहीं तैयार हो सकेगी।

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    25 नवंबर से पहले FDA की मंजूरी नहीं ली जाएगी

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    मॉडर्ना के सीईओ स्टीफन बैंसेल ने कहा कि 25 नवंबर तक हमारे पास सुरक्षा के पर्याप्त मानक होंगे, जिसके बाद हम ईयूए में इसकी इसकी स्वीकृति के लिए फूड एंड ट्रग एडमिनिस्ट्रेशन केक पास भेजेंगे। बता दें कि जिस तरह से कोरोना संकट का डोनाल्ड ट्रंप ने सामना किया है, उसको लेकर उनकी काफी आलोचना हो रही है। ट्रंप का कहना था कि 2 नवंबर को अमेरिका में वोट से पहले कोरोना की वैक्सीन तैयार हो सकती है। ऐसे में कई विशेषज्ञों ने सवाल खड़ा किया था कि ट्रंप प्रशासन वैक्सीन को जल्द अप्रूवल देने के लिए एफडीए के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

    दो वैक्सीन का चल रहा ट्रायल

    दो वैक्सीन का चल रहा ट्रायल

    बता दें कि हाल ही में मॉडर्ना (Moderna Inc) और फाइजर (Pfizer Inc) ने वैक्सीन को सिंगल और डबल डोज के साथ टेस्ट किया। वैक्सीन का ट्रायल 1000 स्वस्थ युवाओं पर किया गया है, जिसे अमेरिकी सरकार ने भी समर्थन दिया। ये ट्रायल जुलाई के बाद शुरू हुआ था, जब वैक्सीन का बंदरों पर प्रयोग सफल साबित हुआ था। अब वैक्सीन का ट्रायल सबसे अधिक 60 हजार लोगों पर होगा। तीसरे चरण के ट्रायल के लिए बुधवार को घोषणा की गई है। ताकि इसे बाद में मंजूरी मिल सके। कंपनी का कहना है कि तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजे इस साल के अंत में या फिर अगले साल की शुरुआत तक आ सकते हैं।

    अंतिम परिणाम पर नजर

    अंतिम परिणाम पर नजर

    हालांकि वैक्सीन का अध्ययन खत्म होने के बाद ही इसकी सुरक्षा को लेकर विस्तृत जानकारी मिल पाएगी। लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि वैक्सीन के गंभीर प्रतिकूल प्रभाव का पता लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों पर कई अध्ययन करने की जरूरत है। बता दें कि दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से बढ़ रहा है। पूरी दुनिया में कोरोना के तकरीबन 60 मिलियन केस हो चुके हैं, जबकि 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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