मलेशिया में नया राजनीतिक संकट, किसी को बहुमत नहीं, भारत विरोधी नेता महातिर मोहम्मद की जमानत जब्त

इसके साथ ही मलेशिया के सबसे अनुभवी नेता महातिर मोहम्मद को 53 सालों में अपनी पहली चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।

मलेशिया के आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। इस चुनाव में विपक्षी दलों का नेतृत्व अनवर इब्राहिम कर रहे थे, जबकि उनके सामने पूर्व पीएम मुहयिदीन यासिन की अगुवाई वाला गठबंधन था। दोनों के बीच कांटे का मुकाबला तो हुआ, लेकिन किसी को भी इतनी सीटें नहीं मिली हैं कि सरकार बना सके। लंबे समय तक विपक्ष के नेता रहे अनवर इब्राहिम और पूर्व प्रधानमंत्री मुहीदीन यासिन दोनों ने कहा कि वे अन्य दलों के समर्थन से सरकार बना सकते हैं।

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अनवर इब्राहिम की पार्टी को बढ़त

अनवर इब्राहिम की पार्टी को बढ़त

मलेशिया के चुनाव आयोग ने रविवार सुबह कहा कि अनवर के पाकतन हरपन गठबंधन ने 222 सदस्यीय संसद में 82 सीटें हासिल कीं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री मुहीदीन यासिन की पेरिकटन नैशनल गठबंधन को 73 सीटें हासिल हुई हैं। प्रधानमंत्री इस्माइल साबरी याकूब अपने पारंपरिक गढ़ में ही पिछड़ गए हैं। उनके गठबंधन को मात्र 30 सीटें ही मिली हैं। जैसा कि परिणाम बता रहे हैं सत्तारूढ़ यूनाइटेड मलयेज नेशनल ऑर्गेनाइजेशन को जनता ने बुरी तरह से नकार दिया है।

महातिर मोहम्मद को मिली हार

महातिर मोहम्मद को मिली हार

इसके साथ ही मलेशिया के सबसे अनुभवी नेता महातिर मोहम्मद को 53 सालों में अपनी पहली चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। वे अपनी पारंपरिक सीट लैंगकावी के हॉलीडे रिसॉर्ट द्वीप गंवा बैठे हैं। यहां पर वे न सिर्फ हारे हैं बल्कि चौथे नंबर पर रहे हैं और उनकी जमानत तक जब्त हो गई है। यही नहीं महातिर मोहम्‍मद की पार्टी पेजुआंग को एक भी सीट नहीं मिली है।

मलय आंदोलन का असर नहीं दिखा

मलय आंदोलन का असर नहीं दिखा

महातिर मोहम्मद इस बार के चुनाव में मलय आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। दरअसल मलेशिया की आबादी 3.3 करोड़ है। इस आबादी का दो तिहाई हिस्सा मलय का है। मलय समुदाय को ये डर है कि अधिक बहुलता के साथ वे अपने अधिकारों को खो सकते हैं। इनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक जातीय चीनी और भारतीय लोग शामिल हैं। हालांकि एक बड़ी आबादी के हक में आंदोलन का नेतृत्व करना भी महातिर मोहम्मद को यह चुनाव जीता नहीं पाया। महातिर मोहम्‍मद 1981 से लेकर साल 2003 तक 22 साल मलेशिया के प्रधानमंत्री रहे थे। इसके बाद उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया था। 92 साल की उम्र में 2018 में वह फिर से राजनीति में आए थे।

अनवर इब्राहिम बन सकते हैं अगले पीएम

अनवर इब्राहिम बन सकते हैं अगले पीएम

अनवर इब्राहिम ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने बहुमत हासिल करने के लिए सांसदों से लिखित में समर्थन हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि इसे देश के राजा को सौंपा जाएगा जो अंतिम फैसला लेंगे। इस बीच, उनके विरोधी मुहिद्दीन ने कहा कि उन्हें राजमहल से एक पत्र मिला है जिसका संकेत है कि उनके गठबंधन को सरकार बनाने में प्राथमिकता दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थिर सरकार बनाने का भरोसा है। यूएमएनओ के नेता अहमद जहीद हामिदी ने एक बयान में कहा कि उनके गठबंधन ने नतीजों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि नेशनल फ्रंट स्थिर सरकार बनाने के लिए मतभेदों को दरकिनार रखना चाहता है।

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