पाकिस्तान में हिंदू मंदिर पर हमला, इलाक़े में सुरक्षाबल तैनात
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीम यार ख़ान ज़िले के भोंग शरीफ़ इलाक़े में एक मंदिर में गुस्साए लोगों ने हमला और तोड़-फोड़ की है जिसके बाद इलाक़े में हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और रेंजर्स को बुलाया गया है.

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दर्जनों लोगों को मंदिर की खिड़कियों, दरवाज़ों और वहां स्थापित मूर्तियों को लाठी, पत्थर और ईंटों से तोड़ते हुए देखा जा सकता है.
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पुलिस ने बीबीसी को बताया कि अब तक कोई गिरफ़्तारी नहीं की गई है.
https://www.youtube.com/watch?v=Q5FVwtmNguU
लोगों की सुरक्षा के लिए जवान तैनात किए गए
डीपीओ रहीम यार ख़ान असद सरफ़राज़ ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि सादिक़ाबाद के भोंग शरीफ़ इलाक़े में फ़िलहाल पुलिस अभियान जारी है.
उन्होंने आगे कहा कि इलाक़े में रेंजर्स और पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया है, स्थिति नियंत्रण में है और यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
उन्होंने कहा कि इस समय घटना के संबंध में क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है.
जिस इलाक़े में यह घटना हुई वहां मंदिर के आसपास हिंदू समुदाय के 80 घर हैं और क्षेत्र की अधिकांश आबादी मुसलमानों की है.
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले यहां इस तरह की कोई घटना सामने नहीं आई है.
क्या है मामला?
नेशनल असेंबली के सदस्य और देश में हिंदू काउंसिल के संरक्षक डॉक्टर रमेश कुमार ने बीबीसी को बताया कि इलाक़े में 4 अगस्त दोपहर 12 बजे से तनाव शुरू हो गया था.
भोंग थाने के एएसआई ने बीबीसी को बताया कि इलाक़े के एक जौहरी ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट की थी जिसमें लिखा था कि ''हिन्दू और मुसलमान यहां एक साथ खाना खाते हैं, उन्हें इससे रोका जाना चाहिए.''
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https://www.youtube.com/watch?v=tDmDh3iGbss
एएसआई आगे बताते हैं कि उसके बाद वहां झगड़ा शुरू हो गया और पास के इलाके से असामाजिक तत्व भी वहां पहुंच गए.
पुलिस अधिकारी के मुताबिक गुस्साए लोगों ने स्थानीय मंदिर में तोड़फोड़ की और जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उन पर भी पथराव किया.
उन्होंने कहा कि अभी तक घटना की कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई है और न ही कोई गिरफ़्तारी हुई है, लेकिन स्थिति अब नियंत्रण में है और वहां रेंजर्स भी मौजूद हैं.
ईशनिंदा से जुड़ा है मामला
पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के संरक्षक डॉक्टर रमेश ने बीबीसी को बताया कि यह घटना 23 जुलाई को इलाक़े की एक घटना से जुड़ी हुई है, जिसमें एक आठ साल के बच्चे पर ईशनिंदा का आरोप लगा था.
पुलिस का कहना है कि "24 तारीख़ को हमने एक आठ साल के लड़के के ख़िलाफ़ 295ए के तहत मामला दर्ज किया था."
उन्होंने बताया कि स्थानीय मदरसा प्रशासन ने आरोप लगाया था कि एक बच्चे ने लाइब्रेरी में आकर पेशाब किया है.
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पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर बच्चे को गिरफ़्तार कर लिया था.
एएसआई के मुताबिक, चूंकि बच्चा नाबालिग था, इसलिए उसे क़ानून के तहत 295ए के अनुसार कड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती थी. मजिस्ट्रेट ने बच्चे को 28 तारीख़ को ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया था.
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डॉक्टर रमेश ने बताया कि रहीम यार ख़ान के डीपीओ ने उस बच्चे को गिरफ़्तार किया और पोस्ट डिलीट कराकर उसे छोड़ दिया.
रिहाई के बाद मामला गर्माया
https://www.youtube.com/watch?v=pkA_5PM0gNE
उनका कहना है कि लड़के के रिहा होने के बाद, इलाक़े में दोबारा गतिविधियां शुरू हो गई थीं.
"शाम को करीब चार बजे के लगभग 25 लोगों ने सी-पैक रोड जाम कर दिया. मैंने एडिशनल आईजी को बताया. शाम साढ़े छह बजे उन्होंने मंदिर पर हमला किया. घरों में घुसने की कोशिश की. इसके बाद रेंजर्स को बुलाया गया. अब स्थिति नियंत्रण में है."
डॉक्टर रमेश ने चीफ़ जस्टिस से घटना पर संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने घटना में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ़्तारी की भी मांग की है.
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