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Diplomacy: नेपाली प्रधानमंत्री ने नरेन्द्र मोदी को भेजा देश आने का न्योता, चायनामैन ओली की डिप्लोमेसी क्या है?

India-Nepal News: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को हिमालयी राष्ट्र की यात्रा का निमंत्रण भेजा है। नेपाली प्रधानमंत्री के सचिवालय की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक, ओली ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी को यात्रा का निमंत्रण दिया है, जिन्होंने नेपाली प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट की है।

प्रधानमंत्री ओली ने पिछले महीने चौथी बार नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के नेतृत्व वाली सरकार से नेपाली कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद वो संसद में बहुमत साबित करने में नाकाम हो गये थे और उनकी सरकार गिर गई थी।

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मिस्री ने पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा से काठमांडू के बाहरी इलाके बुधनीलकांठा में उनके आवास पर मुलाकात की। देउबा के कार्यालय के मुताबिक, बैठक के दौरान उन्होंने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मामलों पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने नेपाल-भारत संबंधों को मजबूत करने और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

ओली का भारत को लेकर कैसा रहा है रूख?

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (CPN-UML) ने जुलाई महीने में कहा था, कि चारों ओर से घिरा यह हिमालयी देश भारत के साथ 'घनिष्ठ मैत्रीपूर्ण संबंध' बनाए रखकर ही आर्थिक समृद्धि प्राप्त कर सकता है। साथ ही, ओली की पार्टी ने जोर देकर कहा था, कि वह नेपाल की धरती से अपने दक्षिणी पड़ोसी देश के खिलाफ किसी भी तरह की गतिविधि की अनुमति नहीं देगी।

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इसके अलावा, सीपीएन-यूएमएल के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख और स्थायी समिति के सदस्य डॉ. राजन भट्टाराई ने पीटीआई-भाषा को दिए इंटरव्यू में कहा था, कि "सीपीएन-यूएमएल का मानना ​​है, कि भारत विरोधी नीति अपनाकर नेपाल प्रगति नहीं कर सकता या नेपाली लोगों के हितों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।"

केपी शर्मा ओली अपने चीन समर्थक रुख के लिए जाने जाते हैं और इसीलिए अब देखना दिलचस्प हो जाता है, कि वे दोनों पड़ोसियों के साथ कैसे समान निकटता के संबंध बनाए रखते हैं।

डॉ. राजन भट्टाराई का कहना है, कि "हमारा मानना ​​है, कि हम भारत के साथ घनिष्ठ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखकर ही ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित कर सकते हैं, व्यापार को बढ़ावा दे सकते हैं और आर्थिक समृद्धि हासिल कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, कि "हम भारत को एक महत्वपूर्ण पड़ोसी मानते हैं, और हम अपनी धरती से भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देंगे।"

लेकिन, सवाल ये हैं, कि क्या केपी शर्मा ओली एक बार फिर से नक्शे को लेकर भारत के साथ विवाद को बढ़ाएंगे, जिसके तहत में तीन भारतीय क्षेत्रों, 'लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख' को नेपाल का हिस्सा बताते हैं। क्योंकि वो केपी शर्मा ओली ही थे, जिनके कार्यकाल में माना जाता है, कि चीन के इशारे पर भारत के साथ सीमा विवाद शुरू हुआ था।

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