नासा ने जारी की सौरमंडल के बाहर के 'एलियन ग्रह' की पहली तस्वीर, वैज्ञानिक बोले- ये परिवर्तनकारी पल

नई दिल्ली: नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहा है। उसके जरिए अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित ग्रहों और गैलेक्सी की साफ तस्वीरें मिल रहीं, जिससे वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्ड की संरचना और उत्पत्ति को समझने में काफी मदद मिल रही है। इसी कड़ी में पहली बार जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने सौरमंडल के बाहर एक एलियन वर्ल्ड की फोटो ली है।

बृहस्पति से 12 गुना भारी

बृहस्पति से 12 गुना भारी

नासा के मुताबिक वेब टेलिस्कोप ने एक्सोप्लैनेट की पहली फोटो ली है, जिसका नाम HIP 65426 b है। वैसे तो हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा और भारी ग्रह बृहस्पति है, लेकिन आपको जानकर ये हैरानी होगी कि ये एलियन प्लैनेट उससे भी 12 गुना ज्यादा भारी है। नासा ने हाल ही में इसके प्रारंभिक परिणाम ऑनलाइन साझा किए।

वैज्ञानिक के लिए परिवर्तनकारी क्षण

वैज्ञानिक के लिए परिवर्तनकारी क्षण

एक्सेटर विश्वविद्यालय में भौतिकी और खगोल विज्ञान के प्रोफेसर साशा हिंकले काफी वक्त से एक्सोप्लैनेट पर अध्ययन कर रहे हैं, उन्होंने इस फोटो के रिलीजिंग को 'परिवर्तनकारी क्षण' कहा है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ये सिर्फ वेब टेलीस्कोप के लिए नहीं बल्कि खगोल विज्ञान के लिए काफी अहम चीज है। वैसे हबल स्पेस टेलीस्कोप ने भी इससे पहले एलियन प्लैनेट की तस्वीरें ली हैं, लेकिन उसमें ग्रह के पास के तारे की चमक एक्सोप्लैनेट से आने वाले प्रकाश को छिपा देती थी।

मेजबान तारे का प्रकाश दबाया

मेजबान तारे का प्रकाश दबाया

डॉ. हिंकले के मुताबिक वेब के उपकरणों में कोरोनग्राफ हैं, जो पास के तारे की चमक को कम कर सकते हैं, जिससे एक्सोप्लैनेट की फोटो पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। उन्होंने HIP 65426 b की फोटो लेने वाले उपकरणों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वेब कोरोनग्राफ वास्तव में प्रभावशाली थी, उसने मेजबान तारे के प्रकाश को अच्छी तरह से दबाया।

भविष्य होगा चिलचस्प

भविष्य होगा चिलचस्प

वेब के नियर-इन्फ्रारेड कैमरा (निर्कैम) और मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (मिरी) के साथ-साथ ग्रहों की फोटोग्राफी में कई फिल्टर का भी उपयोग किया गया था। इन संसाधनों को एक्सोप्लैनेट की अधिक फोटो बनाने और अंतरिक्ष में अज्ञात खोज करने के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। वहीं मामले में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के रिसर्चर आर्यन कार्टर ने कहा कि सबसे रोमांचक बात ये है कि हमने अभी शुरुआत की है। आने वाले वक्त में एक्सोप्लैनेट की बहुत सी तस्वीरें सामने आने वाली हैं, जो ब्रह्माण्ड को लेकर नए राज खोलेंगी।

महा-पृथ्वी की भी खोज हुई

महा-पृथ्वी की भी खोज हुई

वहीं दूसरी ओर मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक महा-पृथ्वी खोज निकाली है, जिसको TOI-1452 b नाम दिया गया। इस ग्रह के पास दो विशाल तारे यानी सूर्य हैं, जिसमें से ये एक की परिक्रम करता है। इसकी विस्तार से जांच करने पर पता चला कि ये हमारे ग्रह से 70 प्रतिशत ज्यादा बड़ा है और इसका द्रव्यमान 5 गुना ज्यादा होगा। खास बात तो ये है कि इस पर पानी होने के भी कुछ संकेत मिले हैं। इसकी भी खोज वेब टेलीस्कोप की मदद से हुई थी।

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