कौन भेज रहा रहस्यमयी सिग्नल? 35 साल से हर 20 मिनट पर आ रहे, आज तक नहीं पता चला सोर्स
अंतरिक्ष अपने आप में बहुत सारे राज समेटे हुए है। वैज्ञानिक लगातार दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज कर रहे, लेकिन अभी तक सकारात्मक परिणाम नहीं मिल पाए हैं। अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक अज्ञात स्रोत से पिछले कई दशकों से रहस्यमयी सिग्नल आ रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरिक्ष का एक अज्ञात स्रोत कम से कम 1988 से पृथ्वी की ओर रेडियो बस्ट भेज रहा है। इसको लेकर काफी रिसर्च हुई, लेकिन अभी तक ये क्लियर नहीं हो पाया कि इसका स्रोत क्या है। तरंगों की प्रकृति किसी भी मॉडल के अनुरूप नहीं है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक पिछले 35 वर्षों से स्रोत नियमित रूप से 20 मिनट की 'ऊर्जा के विस्फोट' (Blasts of Energy) भेज रहा है, जिनकी चमक काफी ज्यादा अलग है। ये उत्सर्जन कुछ-कुछ पल्सर से निकलने वाले विस्फोटों या तेज रेडियो विस्फोटों जैसा प्रतीत होता है, जो मिलीसेकंड से लेकर कई सेकंड तक रहता है।
नया खोजा गया स्रोत रेडियो सिग्नल भेजता है जो 21 मिनट की अवधि में पल्स (स्पंदित) होता है। पल्सर न्यूट्रॉन तारे हैं जो तेजी से घूमते हैं और रेडियो विस्फोट करते हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रक्रिया केवल तभी काम कर सकती है जब पल्सर का चुंबकीय क्षेत्र मजबूत हो और वो काफी तेजी से घूम रहा हो, अगर ऐसा नहीं है तो पृथ्वी से पल्सर को देखने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं होगी।
वहीं वैज्ञानिकों ने इस पल्सर को GPMJ1839-10 नाम दिया है। ये वस्तु डेथ लाइन से कहीं आगे है। अगर ये एक पल्सर है, तो ये उन तरीकों से काम करता हुआ प्रतीत होता है, जिन्हें वैज्ञानिक असंभव मानते थे।
ये एक अत्यधिक चुंबकीय सफेद बौना या मैग्नेटर भी हो सकता है, जो अविश्वसनीय रूप से मजबूत चुंबकीय क्षेत्र वाला एक अतिरिक्त प्रकार का न्यूट्रॉन तारा है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि वे इस तरह का उत्सर्जन नहीं भेजते हैं।
वैसे तो पहली बार 1988 में इन संकेतों का पता चला था, लेकिन ये और पुराना भी हो सकता है, क्योंकि उस वक्त ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था।












Click it and Unblock the Notifications