यमन में ज्वालामुखीय द्वीप पर बना रहस्यमयी एयरबेस, किसने बनाया नहीं पता, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

हैरानी की बात ये है कि इस एयरबेस का निर्माण जहां हो रहा है वो एक ज्वालामुखीय द्वीप है और यमन की सरकार ने कहा है कि इस एयरबेस निर्माण के पीछे UAE है। जहां इस एयरबेस का निर्माण हो रहा है वो सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण है।

यमन, मई 26: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब की सेना के बीच लंबे वक्त से संघर्ष चल रहा है और यमन कई सालों से गृहयुद्ध से परेशान है। लेकिन, इन सबके बीच यमन में एक द्वीप पर बनने वाले रहस्यमयी एयरबेस ने दुनिया को हैरान कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों में एयरबेस बनने का खुलासा तो हो गया है लेकिन सबसे हैरानी की बात ये है कि ये एयरबेस कौन बना रहा है, इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है। (तस्वीर सौजन्य- एसोसिएट प्रेस)

कौन बना रहा है एयरबेस ?

कौन बना रहा है एयरबेस ?

हैरानी की बात ये है कि इस एयरबेस का निर्माण जहां हो रहा है वो एक ज्वालामुखीय द्वीप है और यमन की सरकार ने कहा है कि इस एयरबेस निर्माण के पीछे संयुक्त अरब अमीरात है। जहां इस एयरबेस का निर्माण हो रहा है वो सामरिक लिहाज से समुद्री मार्ग का विश्व का सबसे प्रमुख स्थान है और यहां के एयरबेस के द्वारा एनर्जी शिप्स, कॉमर्शियल जहाजों और दूसरे जहाजों को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन, अभी तक किसी भी देश ने मायुन द्वीप पर बनने वाले एयरबेस के निर्माण की जिम्मेदारी नहीं ली है। इस द्वीप को मायुन द्वीप के अलावा पेरिम आइलैंड भी कहते हैं और ये द्वीप बाब एल-मांदेब खाड़ी में स्थिति है, जो 5.63 किलोमीटर लंबा है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ये एयरबेस इतना लंबा है कि यहां पर बड़े बड़े कार्गो प्लेन, फाइटर जेट और नागरिक विमान बेहद आसानी से लैंड करने के साथ साथ अपने ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकते हैं।

यूएई बना रहा है एयरबेस?

यूएई बना रहा है एयरबेस?

यमन की सरकार ने मायुन द्वीप पर बन रहे इस एयरबेस के पीछे संयुक्त अरब अमीरात का हाथ बताया है। आपको बता दें कि यमन में अंतर्राष्ट्रीय मदद से सरकार बनी है और करीब 10 सालों से यमन आंतरिक युद्ध से काफी परेशान रहा है। यहां पर हूती विद्रोही चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं और सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल है। साल 2019 में संयुक्त अरब अमीरात ने कहा था कि वह सऊदी अरब के नेतृत्व वाली सेना के साथ अपनी सेना को भी यमन से वापस बुला लेगा। ओपन सोर्स इंटेलीजेंस कंपनी जेन्स के मिडिल ईस्ट एडिटर जेरेमी बिनी ने कहा है कि 'इस एयरबेस का निर्माण भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।' आपको बता दें कि जेरेमी काफी लंबे वक्त से मायुन द्वीप पर चल रहे निर्माण कार्य पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने दावा किया है कि 'इस एयरबेस का निर्माण यमन को ध्यान में रखने हुए नहीं बल्कि इस जलमार्ग से गुजरने वाली जहाजों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।'

बेहद महत्वपूर्ण है एयरबेस

बेहद महत्वपूर्ण है एयरबेस

यमन की सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात को सीधे तौर पर एयरबेस निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराया है लेकिन वाशिंगटन दूतावास में संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने इस एयरबेस को लेकर कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। वहीं, अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक मायुन द्वीप पर बनने वाले इस एयरबेस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां से यमन के मुख्य इलाकों से लेकर लाल सागर, एडन की खाड़ी और पूर्वी अफ्रीकी देशों पर निगरानी रखने के साथ साथ सीधा हमला किया जा सकता है।

कैसा है मायुन द्वीप का एयरबेस ?

कैसा है मायुन द्वीप का एयरबेस ?

समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस ने प्लैनेट लैब्स से इन तस्वीरों को सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस एयरबेस पर करीब 2 किलोमीटर लंबा रनवे है। रिपोर्ट के मुताबिक ये तस्वीर 11 अप्रैल 2021 की हैं और 18 मई तक इस एयरबेस का काम पूरा हो चुका है। इस एयरबेस पर तीन हैंगर्स बनाए गये हैं। वहीं, एयरबेस पर करीब 2 किलोमीटर लंबा रनवे है। रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में यहां पर तीन किलोमीटर लंबा रनवे बनाने की कोशिश की गई थी लेकिन उसका काम पूरा नहीं हो पाया और फिर 2 किलोमीटर लंबा रनवे बनाया गया है। वहीं, अगर ये रनवे तीन किलोमीटर लंबा होता तो यहां भारी बम वर्षक विमान भी उतर कर ऑपरेशन को अंजाम दे सकते थे।

मायुन द्वीप को जानिए

मायुन द्वीप को जानिए

मायुन पर 1857 से 1967 तक ब्रिटेन सरकार का राज था और उस वक्त इसे पेरिम द्वीप कहा जाता था। केकड़े जैसे आकार वाले इस द्वीप की लंबाई 5.63 किलोमीटर और चौड़ाई करीब 2.85 किलोमीटर है और इसका क्षेत्रफल 13 वर्ग किलोमीटर है। मायुन द्वीप पर काफी साल पहले एक काफी गहरा और प्राकृतिक बंदगराह भी था, जो इस एयरबेस के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। मायुन द्वीप पर एक गांव भी है, जहां मछुआरे मछली पकड़ने आते हैं और यहां पर पीने के पानी की काफी दिक्कत है, लिहाजा मछली पकड़ने के बाद मछुआरे यहां से चले जाते हैं। इस द्वीप के नीचे एक ज्वालामुखी भी है जो अब समुद्र के नीचे है और रिपोर्ट के मुताबिक इस द्वीप का निर्माण ज्वालामुखी फूटने के बाद उससे निकले लावा और पत्थरों से हुआ था।

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