मल्टीनेशनल कंपनी Yahoo ने चीन से समेटा अपना बिजनेस, सेवाएं बंद होने से यूजर्स की दिक्कतें बढ़ीं
बीजिंग। चीन में शी-जिनपिंग सरकार की कुछ सख्त नीतियों के चलते विदेशी टेक्नोलॉजी-कंपनियां अपने कारोबार समेटते जा रही हैं। अब मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनी याहू (Yahoo) ने वहां से पूरी तरह पुल-आउट कर लिया है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ समय से चीन में वह अपनी सेवाएं बंद करने में लगी थी। ऐसा चीन की डिजिटल सेंसरशिप की वजह से किया गया।' उसकी पॉलिसीज की कारण कई कंपनियां पहले ही सेवाएं बंद कर चुकी हैं, जबकि कुछ कंपनियों को सिक्का जमाने ही नहीं दिया गया।
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Yahoo ने भी समेट लिया चीन से अपना बिजनेस
याहू ने चीन में सर्विस बंद करने के बाद कहा कि, वह इंटरनेट पर स्वतंत्र सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले गूगल भी चीन में अपनी सर्विस बंद कर चुका है। माइक्रोसॉफ्ट का नौकरी संबंधित नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन भी जल्द चीन में अपनी सर्विस बंद करने जा रहा है। कई अच्छी सर्विस बंद होने से यूजर्स परेशान हो गए हैं। उधर..सरकार अपने यहां की कंपनियों को बढ़ावा देते जा रही है।
कुछ ही दिन पहले, चीनी सरकार ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि ठंड के मौसम में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित रखें, साथ ही लोगों से कहें कि वह भी अपने घरों में जरूरी चीजों का पर्याप्त स्टॉक अभी से जुटाकर रख लें।

क्यों चीन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा?
चीनी सरकार ने देश में चल रही लगभग सभी बड़ी कंपनियों पर अपना नियंत्रण बढ़ाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, चीनी सरकार ने अपने यहां के लोगों से खाने-पीने की चीजें जमा करने को कहा है। इस अपील के बाद वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। शॉपिंग माल के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगने लगी हैं। जिसे जो कुछ भी मिल रहा है, वह स्टोर कर रहा है। माना जा रहा है कि, इस शॉर्टेज के 2 बड़े कारण हैं। पहली डीजल की किल्लत और दूसरी बाढ़ के हालात। क्योंकि, चीन में डीजल की किल्लत के कारण ट्रक ठीक से सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि, अगर चीन सही समय पर ऑस्ट्रेलिया से कोयला खरीद लेता तो आज डीजल की कमी का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा अक्टूबर की शुरुआत में कई राज्यों में बाढ़ के हालात बन गए थे। इससे चीन में फसलों को नुकसान पहुंचा था। यह भी फूड शॉर्टेज की वजह है।

श्रीलंका के सबसे बड़े बैंक को ब्लैकलिस्ट किया
कुछ दिनों पहले चीन ने श्रीलंका के पीपुल्स बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इस बारे में उसके अधिकारियेां ने कहा कि, सरकारी कंपनी 49 लाख डॉलर का पेमेंट नहीं कर पाई थी। दरअसल, श्रीलंका की एक सरकारी कंपनी को चीन की एक कंपनी को पेमेंट करना था। यह पेमेंट श्रीलंका के सबसे बड़े बैंक 'पीपुल्स बैंक' के जरिए होना था। 49 लाख डॉलर का यह पेमेंट बैंक कर नहीं पाई। तब चीन ने इस बैंक को ही ब्लैकलिस्ट कर दिया।












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