कतर के विदेश मंत्री से नहीं मिले मुल्ला बरादर, तालिबान में चरम पर सत्ता संघर्ष, फूट की आशंका

कई घटनाओं से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि मुल्ला बरादर को लेकर तालिबान कुछ ना कुछ तो छिपा रहा है। तालिबान सरकार का शपथ ग्रहण समारोह भी पैसों की कमी का हवाला देकर टाल दिया गया है।

काबुल, सितंबर 13: तालिबान में सत्ता के लिए काफी तेजी से संघर्ष शुरू हो गया है। तालिबान ने भले ही अंतरिम सरकार का निर्माण कर दिया हो और अजीब फैसलों का ऐलान कर सबकुछ सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन धीरे-धीरे तालिबान के अंदर मचा कोहराम बाहर आ रहा है। रिपोर्ट है कि तालिबान से संस्थापक मुल्ला बरादर ने अफगानिस्तान के दौरे पर आए कतर के विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं की। वहीं, सोशल मीडिया पर अफगानिस्तान के कुछ छोटे स्वतंत्र पत्रकारों ने दावा किया है कि मुल्ला बरादर तालिबान के अंदर हुई गोलीबारी में मारा जा चुका है। जबकि, तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा है कि मुल्ला बरादर ना ही जख्मी है और ना ही उसकी मौत हुई है।

मारा गया मुल्ला बरादर?

मारा गया मुल्ला बरादर?

सोशल मीडिया पर काफी तेजी से ये खबर फैल रही है कि हक्कानी नेटवर्क के साथ संघर्ष में मुल्ला बरादर को गोली लगी थी और अब कुछ स्वतंत्र पत्रकारों और पंजशीर ऑब्जर्वर ने दावा किया है कि मुल्ला बरादर की गोली लगने से मौत हो चुकी है। हालांकि, इस खबर की पुष्टि नहीं की गई है और हम भी मुल्ला बरादर की मौत की पुष्टि नहीं कर रहे हैं और मौत की खबर अफवाह हो सकती है। लेकिन, ये साफ हो गया है कि मुल्ला बरादर ने कतर के विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं की है। सिर्फ मुल्ला बरादर ही नहीं, बल्कि तालिबान के प्रमुख नेताओं में से एक शेर मोहम्मब अब्बास स्टेनिकजई ने भी कतर के विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं की है, जबकि वो तालिबान की सरकार में उप-विदेश मंत्री है, ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि तालिबान के अंदर सत्ता के लिए संघर्ष काफी तेज हो चुका है और आने वाले वक्त में पूरी दुनिया के सामने खुलकर ये लड़ाई सामने आ सकती है।

अफगानिस्तान दौरे पर कतर के विदेश मंत्री

अफगानिस्तान दौरे पर कतर के विदेश मंत्री

दरअसल, कतर के विदेश मंत्री अफगानिस्तान के दौरे पर पहुंचे थे। जिसमें तालिबान सरकार के कार्यवाहक प्रधान मंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद ने रविवार को उनसे मुलाकात की। कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद से मुलाकात के दौरान देश के नए शासकों से आह्वान किया है कि वो अफगानिस्तान में बनने वाली स्थाई सरकार में अफगानिस्तान की सभी पार्टियों को शामिल करें, ताकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय समर्थन मिल सके। रिपोर्ट है कि दोनों पक्षों ने राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक के दौरान "द्विपक्षीय संबंधों, मानवीय सहायता, आर्थिक विकास और दुनिया के साथ संबंधों को लेकर बातचीत की है। कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शेख मोहम्मद और तालिबान के प्रधान मंत्री हसन अखुंड ने "अफगानिस्तान की स्थिरता को खतरा पैदा करने वाले आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए ठोस प्रयासों" और देश में शांति बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की है''।

बैठक में मुल्ला बरादर क्यों नहीं?

रिपोर्ट के मुताबिक, कतर के विदेश मंत्री के साथ बैठक के दौरान हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी भी मौजूद था, जो देश का गृहमंत्री है। इसके साथ ही तालिबान के कई ऐसे मंत्री भी बैठक में मौजूद थे, जिनका बैठक में होना कोई जरूरी नहीं था। लेकिन, इस बैठक में दो बड़े चेहरे शामिल नहीं थे। एक चेहरा था मुल्ला बरादर का और दूसरा चेहरा था शेर मोहम्मब अब्बास स्टेनिकजई। जिसके बाद अटकलों का बाजार काफी गर्म है। कई स्वतंत्र पत्रकारों ने जहां मुल्ला बरादर के मारे जाने या घायल होने का दावा किया है, वहीं शेर मोहम्मब अब्बास स्टेनिकजई के बारे में कहा जा रहा है कि उनका कद घटा दिया गया है, लिहाजा वो नाराज हैं। शेर मोहम्मब अब्बास स्टेनिकजई को उप-विदेश मंत्री बनाया गया है, जिससे वो खुश नहीं हैं।

हक्कानी के साथ हुआ था संघर्ष

आपको बता दें कि ऐसी खबरें आईं थीं कि तालिबान की अंतरिम सरकार की गठन से पहले तालिबान के नेताओं और हक्कानी नेटवर्क के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान सरकार बनाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया था कि हक्कानी नेटवर्क की तरफ से गोली चला दी गई थी, जिसमें मुल्ला बरादर घायल हो गया था और उसके बाद से ही मुल्ला बरादर नहीं देखा गया है। जबकि, तालिबान के सभी नेता दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मुल्ला बरादर मारा जा चुका है और तालिबान की तरफ से इसका खंडन अभी तक नहीं किया गया है। जबकि, भारत के मिलिट्री स्कूल में पढ़ चुके शेर मोहम्मब अब्बास स्टेनिकजई भी काफी नाराज हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अफगानिस्तान की दूसरी पार्टियों को सरकार में शामिल करने की बात तो दूर, तालिबान अपने अंदर भी कलह को रोकने में नाकामयाब साबित हो रहा है।

आईएसआई ने करवाई लड़वाई

दरअसल, पहले खबरें आईं थी कि मुल्ला बरादर अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री बनेगा, जो पाकिस्तान को पसंद नहीं था। पाकिस्तान अपने प्यादे को अफगानिस्तान के शीर्ष पद पर देखना चाहता था, लिहाजा आईएसआई के चीफ फैज हमीद खुद अफगानिस्तान पहुंच गया, ताकि अपने प्यादे को सरकार में अहम विभाग दिलवा सके। माना जा रहा है कि आईएसआई के दखल देने के बाद मुल्ला बरादर को प्रधानमंत्री नहीं बनाकर उसे उप- प्रधानमंत्री बना दिया गया, जबकि स्टेनिकजई को उप-विदेश मंत्री बनाया गया। ऐसी रिपोर्ट है कि मुल्ला बरादर की अमेरिका के साथ कई बार बातचीत हुई थी, वहीं स्टेनिकजई भारत के साथ लगातार बातचीत कर रहा था, जिसके बाद आईएसआई ने इन दोनों के पर कतर दिए। आपको बता दें कि हक्कानी नेटवर्क को तालिबान की सरकार में सभी महत्वपूर्ण पद दिए गये हैं, लिहाजा मुल्ला बरादर या तो नाराजगी की वजग से सरकार में शामिल नहीं हो रहा है या फिर वो मारा जा चुका है या फिर उसका इलाज चल रहा है।

समारोह भी टाला गया

समारोह भी टाला गया

तालिबान की तरफ से पहले कहा गया था कि तालिबान की सरकार एक समारोह के जरिए 'शपथ' लेगी। लेकिन पहली बार शपथ ग्रहण समारोह को कुछ दिनों के लिए टाल दिया गया और फिर 11 सितंबर को सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख तय की गई थी। लेकिन, 11 सितंबर को दोपहर बाद तालिबान की तरफ से कहा गया कि वो 'पैसे बचाने' के लिए समारोह कर रहा है। लेकिन, अब शक इस बात पर जा रहा है कि क्या मुल्ला बरादर की मौत होने की वजह से तो शपथ ग्रहण कार्यक्रम नहीं टाला गया? क्या तालिबान मुल्ला बरादर की मौत को छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है?

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