जानिए रूस के सामने कितना बौना है मोल्दोवा, जहां पुतिन कर सकते हैं हमला, कितनी है सैन्य क्षमता?
ट्रांसनिस्ट्रिया और मोल्दोवा, दोनों यूक्रेन के पश्चिम में स्थिति हैं। जहां, मोल्दोवा एक बेहद छोटा देश है, वहीं ट्रांसनिस्ट्रिया एक टूटा हुआ स्वायत्त क्षेत्र है, जहां करीब 5 लाख लोग रहते हैं।
मोल्दोवा, मई 02: यूक्रेन पर आक्रमण के 67 वें दिन, यानि कल रूस ने इस बात की तरफ संकेत दिए थे, कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अगला टारगेट मोल्दोवा हो सकता है, जहां पर आज विस्फोटों की आवाज सुनी जाने की रिपोर्टें आई हैं। कल रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने खुले शब्दों में मोल्दोवा को चेतावनी दी थी, कि 'मोल्दोवा को अपने भविष्य के बारे में चिंता करनी चाहिए। क्योंकि उन्हें नाटो में खींचा जा रहा है।' ऐसे में सवाल ये है, कि आखिर मोल्दोवा से रूस इतना गुस्सा क्यों हैं और अगर मोल्दोवा पर रूस आक्रमण करता है, तो क्या वो अपना बचाव चंद घंटे भी कर पाएगा?

कहां है मोल्दोवा, क्या है ट्रांसनिस्ट्रिया
ट्रांसनिस्ट्रिया और मोल्दोवा, दोनों यूक्रेन के पश्चिम में स्थिति हैं। जहां, मोल्दोवा एक बेहद छोटा देश है, वहीं ट्रांसनिस्ट्रिया एक टूटा हुआ स्वायत्त क्षेत्र है, जहां करीब 5 लाख लोग रहते हैं। ट्रांसनिस्ट्रिया, यूक्रेन और मोल्दोवा के बीच एक सैंडविच की तरह का क्षेत्र है, जिसको लेकर आशंका है, कि उसके भी युद्ध में बहुत जल्द घसीट लिया जाएगा। ट्रांसनिस्ट्रिया को यूनाइटेड नेशंस में मान्यता नहीं मिली है और यूनाइटेड नेशंस ट्रांसनिस्ट्रिया को मोल्दोवा का ही हिस्सा मानता है, लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया अपने आप को एक अलग देश मानता है और इसे रूस का समर्थन प्राप्त है। और अब कहा जा रहा है, कि ट्रांसनिस्ट्रिया क्षेत्र को रूस पूरी तरह से अपने कंट्रोल में ले सकता है और फिर उसका इस्तेमाल मोल्दोवा पर आक्रमण करने के लिए करेगा।

ट्रांसनिस्ट्रिया क्षेत्र को समझिए
आधिकारिक तौर पर ट्रांसनिस्ट्रिया, खुद को प्रिडनेस्ट्रोवियन मोल्डावियन गणराज्य कहता है जो, मोल्दोवा और पश्चिमी यूक्रेन के बीच स्थिति जमीन की एक संकीर्ण पट्टी है, जो लगभग 5 लाख लोगों का घर है। यह एक गैर-मान्यता प्राप्त अलग राज्य है, जो 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद मोल्दोवा से अलग हो गया था। ट्रांसनिस्ट्रियन सरकार के पास वास्तव में स्वतंत्रता है, लेकिन इसे अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मोल्दोवा के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है। हालांकि, रूस भी आधिकारिक तौर पर ट्रांसनिस्ट्रिया को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता है, लेकिन ट्रांसनिस्ट्रिया ने आज भी अपनी स्वतंत्रता बरकरार रखी है, जो कि ट्रांसनिस्ट्रियन क्षेत्र में तैनात रूसी सेना द्वारा प्रदान किए गए सैन्य समर्थन की वजह से है।

मोल्दोवा से क्यों गुस्सा हैं पुतिन?
हालांकि, मोल्दोवा बार बार जरूर कहता आया है, कि वो नाटो का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन मोल्दोवा के काम इस तरफ इशारा नहीं करते हैं। यूक्रेन युद्ध में मोल्दोवा ने सीधे तौर पर यूक्रेन के प्रति सहानुभूति दिखाई है और मोल्दोवा के नेता लगातार यूरोपीय नेताओं से मुलाकात करते रहते है और उनसे घनिष्ठ संबंध दर्शाने की कोशिश करते रहते हैं, जिससे रूस चिढ़ता रहता है। दोनों देशों के बीच तनाव उस वक्त और बढ़ गया है, जब ब्रिटे के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने सार्वजनिक तौर पर बयान देते हुए कहा कि, यूक्रेन में जीत हासिल करने के लिए रूस अब आक्रमण की रफ्तार को काफी तेज कर सकता है और युद्ध के नये फ्रंट को खोल सकता है। बेन वालेस का इशारा ट्रांसनिस्ट्रिया क्षेत्र को लेकर था, जिससे रूस आग-बबूला हो गया है और रूसी विदेश मंत्री ने साफ तौर पर कहा, कि मोल्दोवा को अपने भविष्य की चिंता करनी चाहिए।

मोल्दोवा से ट्रांसनिस्ट्रिया में तनाव
मोल्दोवा रूसी सैनिकों को चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान भरने की अनुमति नहीं देता है। 2015 के बाद से यूक्रेन ने उन्हें अपने क्षेत्र के माध्यम से प्रवेश करने से मना कर दिया। जिसके बाद इन परिवहन प्रतिबंधों के कारण ट्रांसनिस्ट्रिया में स्थानीय लोगों के साथ रूस का अनुबंध हुआ। ट्रांसनिस्ट्रियन सेना अपने आप में अपेक्षाकृत छोटी है और इसमें 4,500 से 7,500 सैनिक शामिल हैं। रूसी सैन्य कमांडर रुस्तम मिनेकेव ने 22 अप्रैल, 2022 को कहा कि रूस का इरादा दक्षिणी यूक्रेन से ट्रांसनिस्ट्रिया तक एक ह्यूमन कॉरिडोर स्थापित करने का है।

रूस के सामने कितनी देर टिकेगा मोल्दोवा?
यूक्रेन युद्ध और ट्रांसनिस्ट्रिया में रूसी सैनिकों की उपस्थिति ने मोल्दोवन और कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है कि रूस अगले मोल्दोवा पर हमला कर सकता है। यूक्रेन के विपरीत, मोल्दोवा में एक बेहद कमजोर सेना है, जो ट्रांसनिस्ट्रिया की सेना से छोटी है। मोल्दोवा के सक्रिय सैन्य कर्मियों की संख्या 6,000 सैनिकों की है, जो रूस का किसी भी हाल में मुकाबला नहीं कर सकते हैं। वहीं, करीब 35 लाख की आबादी के साथ मोल्दोवा यूरोप के सबसे गरीब देशों में से एक है। मोल्दोवा का ऊर्जा क्षेत्र इसकी सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है। यह रूसी गैस पर 100% निर्भर है, जो यूरोपीय समर्थक राजनीतिक के बावजूद, मोल्दोवा के लिए मास्को की कक्षा से बचना मुश्किल बनाता है।

रूस को उकसाता रहता है नाटो
हालांकि, मोल्दोवा की प्रधानमंत्री नतालिया गवरिलिका ने कहा है कि, मोल्दोवा नाटो में शामिल नहीं होना चाहता, जिसे रूस प्रत्यक्ष खतरे के रूप में देखेगा, जैसा कि उसने यूक्रेन में किया था। लेकिन, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि नोटा की तरफ से मोल्दोवा को लालच दिया जाता रहा है। लिहाजा, कई एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं, कि मोल्दोवा के लिए तटस्थ रहने में ही भलाई है और उसे महाशक्तियों के बीच के तनाव में नहीं आना चाहिए। लेकिन, अब यूक्रेन युद्ध के बाद तमाम समीकरण बदल से गये हैं और माना जा रहा है, कि बहुत जल्द ही ट्रांसनिस्ट्रिया और मोल्दावा भी युद्ध की चपेट में आ सकता है।












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